BJP नेताओं की चाहत, जल्द इस्तीफा दें पाटिल
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चंडीगढ़ की सांसद सांसद किरण खेर से जुड़े विवाद के बाद भाजपा मौजूदा प्रशासक शिवराज पाटिल से पूरी तरह निराश है। चंडीगढ़ के विकास के लिए पार्टी की उम्मीद अब केंद्र सरकार पर टिकी है।
स्थानीय भाजपा नेताओं का कहना है कि यूटी में अब जो भी नया प्रशासक आएगा उसके और सांसद के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाएगा तभी शहर का विकास होगा। इसके साथ ही स्थानीय नेताओं ने पाटिल को हटवाने के लिए अपनी मुहिम भी तेज कर दी है।
भाजपा के नेता अगले सप्ताह केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिल कर पाटिल को हटाने की मांग करेंगे। पटिल को व्यवहार को लेकर वे जल्द ही एक पत्र भी राजनाथ सिंह को भेजने वाले हैं। 30 जून को सलाहकार समिति की अगली बैठक है और समझा जा रहा है कि इस बैठक के बाद पाटिल अपना पद छोड़ सकते हैं।
मल्होत्रा के लिए भाजपा नेताओं की लॉबिंग तेज
हालाकि राजभवन के सूत्रों के अनुसार पाटिल पर फिलहाल इस्तीफा देने का दबाव नहीं है। पाटिल ने अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर रखी है। पाटिल का कार्यकाल 22 जनवरी 2015 को खत्म हो रहा है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार मल्होत्रा को यूटी का अगला प्रशासक बनवाने के लिए भाजपा के स्थानीय नेताओं ने लॉबिंग तेज कर दी है। मल्होत्रा यूटी के प्रशासक और पंजाब के अगले राज्यपाल की दौड़ में सबसे आगे हैं। हालाकि यूटी के प्रशासक के लिए लालजी टंडन का नाम भी चल रहा है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन ने बताया कि चंडीगढ़ के लोग भी यह बात अच्छे से जानते हैं कि पूर्व सांसद की प्रशासक के साथ नहीं बनी। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। जो भी अगला प्रशासक आएगा वह सांसद के साथ मिलकर चलेगा और इस शहर के लोगों की जो भी समस्याएं हैं, उन्हें दूर किया जाएगा।
किरण खेर के मुद्दे पर प्रशासक का यू-टर्न
पूर्व सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता सत्यपाल जैन के मुताबिक पिछले दस साल में शहर में दो प्रशासक आए और दोनों के साथ ही तत्कालीन सांसद के बेहतर संबंध नहीं रहे। जब तक सांसद और प्रशासक के बीच बेहतर तालमेल नहीं होगा शहर का विकास नहीं हो सकता। शहर में जो भी अगला प्रशासक आएगा उनके और सांसद के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। तभी विकास होगा।
शहर के पूर्व सांसद सत्यपाल जैन ने दावा किया है कि प्रशासक शिवराज पाटिल ने किरण खेर के मुद्दे पर अपनी ही बात पर यू टर्न लिया। जैन के अनुसार पाटिल ने वीरवार सुबह सलाहकार समिति की बैठक में कहा था कि वह भविष्य में भी सांसद से सलाह कर सलाहकार समिति की बैठक की तिथि तय नहीं करेंगे।
लेकिन तीन सदस्यों के बहिष्कार करने का असर हुआ और शाम को उन्होंने अपनी बात से यू टर्न ले लिया। राजभवन से किरण खेर को फोन गया और उनसे सलाह लेकर ही 30 जून की बैठक रखी गई।
पंजाब के मुख्यमंत्री तटस्थ भूमिका में
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक शिवराज पाटिल को बदलने के लिए भले ही चंडीगढ़ भाजपा के नेता जोर लगा रहे हों, लेकिन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की इस मामले में कोई दिलचस्पी दिखाई नहीं पड़ती।
इसका एक कारण तो यह है कि प्रदेश के मामलों में पाटिल की कोई सीधी दखलंदाजी नहीं है तथा दूसरे उनके साथ बादल के संबंध काफी मधुर हैं। मुख्यमंत्री आमतौर पर यह कहते रहे हैं कि गृह मंत्री रहते हुए पाटिल ने उनके द्वारा रखी गई मांगों को कभी दरकिनार नहीं किया।
ऐसे में तय है कि मुख्यमंत्री बादल इस मामले में पूरी तरह से तटस्थ भूमिका में हैं तथा वह उन्हें बदलवाने के लिए मोदी सरकार पर कोई दबाव बनाने नहीं जा रहे हैं, लेकिन वे पाटिल को रोकने का भी प्रयास नहीं करेंगे।