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Chandigarh News: सुखना लेक कैचमेंट एरिया में हाईकोर्ट की बिल्डिंग एक्सटेंशन की योजना को बड़ा झटका

Thu, 19 Dec 2024 02:03 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 19 Dec 2024 02:03 AM IST
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Big setback to High Court building extension plan in Sukhna Lake catchment area
चंडीगढ़। सर्वे ऑफ इंडिया ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की विस्तार योजना को बड़ा झटका दिया है। सर्वे ऑफ इंडिया ने बताया है कि हाईकोर्ट का मूल हेरिटेज भवन, एक्सटेंशन और कुछ अन्य इमारतों को छोड़कर बाकी परिसर सुखना झील के कैचमेंट एरिया में स्थित है। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल की खंडपीठ ने केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को यह जानकारी देने का निर्देश दिया है कि कैपिटल कॉम्प्लेक्स, विशेष रूप से हाईकोर्ट के मूल भवन, और सुखना झील का निर्माण कब शुरू हुआ।
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हाईकोर्ट ने अगस्त में तकनीकी विशेषज्ञों की समिति को निर्देश दिया था कि वे यह जांच करें कि क्या हाईकोर्ट परिसर सुखना झील के कैचमेंट एरिया के साथ ओवरलैप करता है। हाईकोर्ट ने कहा था कि सर्वे ऑफ इंडिया के 21 सितंबर, 2004 के नक्शे के अनुसार यह तय करना महत्वपूर्ण है कि हाईकोर्ट परिसर कैचमेंट एरिया में आता है या नहीं। इसके लिए भौतिक सीमांकन जल्द से जल्द पूरा करना आवश्यक है।
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यह मामला एक जनहित याचिका के तहत विचाराधीन है, जिसे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट कर्मचारी संघ के विनोद धत्तरवाल और अन्य ने दायर किया है। याचिका में हाईकोर्ट भवन की समग्र विकास योजना को तेज करने की मांग की गई है, जिसमें बहुमंजिला भवनों का निर्माण शामिल है। हाईकोर्ट की वर्तमान बिल्डिंग पर बोझ अधिक बढ़ने के कारण हाईकोर्ट ने इसके लिए अतिरिक्त स्थान उपलब्ध कराने के लिए दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वे आफ इंडिया को फिजिकल सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी थी।
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पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिया था कि चीफ जस्टिस के कोर्ट रूम के बाहर बरामदा बनाया जाए। चीफ जस्टिस के कोर्ट रूम के सामने बरामदे का निर्माण न शुरू करने पर चंडीगढ़ प्रशासन को फटकार लगाई है। चीफ इंजीनियर सीबी ओझा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए। हाईकोर्ट ने 29 नवंबर को आदेश दिया था कि कोर्ट रूम नंबर एक (चीफ जस्टिस का कोर्ट) के सामने उसी प्रकार का बरामदा बनाया जाए जैसा कोर्ट रूम नंबर दो से नौ के सामने हैं। आदेश के दो सप्ताह बाद भी निर्माण कार्य शुरू न होने पर अदालत ने नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट के विस्तार के मार्ग में सबसे बड़ा अवरोध इसलिए खड़ा हो गया है कि कैचमेंट एरिया में निर्माण नहीं किया जा सकता। ऐसे में वर्तमान क्षेत्र में जहां इमारत मौजूद है, उसमें भी छेड़छाड़ की संभावना लगभग समाप्त हो चुकी है।
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