{"_id":"a32e136e1427b8dfe7b3005687d4f900","slug":"big-relief-now-killer-tb-test-in-just-two-hours-in-pgi-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीजीआई में किलर टीबी की जांच अब मात्र 2 घंटे में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीजीआई में किलर टीबी की जांच अब मात्र 2 घंटे में
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 09 Feb 2016 09:06 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मल्टीड्रग-रेसिस्टेंस (एमडीआर) टीबी एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रही है। यदि जांच में इसका जल्दी पता चल जाए तो 50 प्रतिशत तक केसों का इलाज संभव है। आमतौर पर इसकी जांच में दो से तीन महीने लगते हैं, लेकिन अब इसकी जांच दो घंटे में संभव हो गई है।
विज्ञापन
पीजीआई के मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट में जीन एक्सपर्ट मशीन स्थापित कर दी गई है। यह एमडीआर टीबी के साथ अन्य टीबी को पता लगाने में काफी मददगार साबित होगी।
विज्ञापन
चंडीगढ़ के गृह सचिव अनुराग अग्रवाल, डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेस डा. वीके गगनेजा व पल्मनरी डिपार्टमेंट के एचओडी डा. डी बहेरा ने मशीन का उद्घाटन किया।
प्राइवेट में दो हजार, पीजीआई में मुफ्त
पल्मनरी डिपार्टमेंट के एचओडी डा. डी बहेरा ने बताया कि यदि संदिग्ध एमडीआर पेशेंट की जांच प्राइवेट में होती है तो उसके इलाज में करीब दो हजार रुपये का खर्च आता है। लेकिन पीजीआई में इसके लिए एक भी रुपया नहीं लिया जाएगा। इस मशीन का लाभ चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के मरीजों को मिलेगा। पूरे देश में 150 स्थानों पर नई मशीन स्थापित की गई हैं। जल्द ही अन्य मशीने और दी जाएंगी, जिन्हें शहर के अन्य अस्पतालों में स्थापित किया जाएगा।
विज्ञापन
एचआईवी पेशेंट में भी फायदेमंद
लैब के नोडल आफिसर व मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डा. सुनील सेठी ने बताया कि एचआईवी के मरीजों में टीबी होने की काफी आशंका रहती है। इसका पता लगाने में काफी समय लग जाता है, लेकिन इसमें अब मात्र दो घंटे में ही पता चल जाएगा। सामान्य टीबी के पेशेंट के इलाज के दौरान यदि चार हफ्ते बाद भी बलगम का रिजल्ट पॉजीटिव आता है तो इन पेशेंटों की जांच भी इस नई मशीन से की जाएगी।
क्या है एमडीआर टीबी
टीबी के इलाज करीब छह महीने तक चलता है। यदि इलाज के दौरान कभी दवा खाना भूलना, घटिया किस्म की दवाओं का इस्तेमाल या फिर तय समय से पहले इलाज छोड़ देना जैसे कदम मल्टीड्रग-रेसिस्टेंस टीबी का कारण बनते हैं। इसमें दवाएं बेअसर हो जाती हैं।
जांच में पता चलने के बाद इसका इलाज करीब दो साल चलता है, जो काफी महंगा होता है। हालांकि सरकार की ओर यह मुफ्त में मुहैया करवाया जा रहा है। एक स्टडी के मुताबिक पूरे भारत में करीब 70 हजार एमडीआर पेशेंट हैं।