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Chandigarh News: बड़ा फैसलाः 17 साल बाद इंडस्ट्रियल एरिया के लिए प्रशासन लाएगा कन्वर्जन नीति
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चंडीगढ़। यूटी प्रशासन करीब 17 साल बाद इंडस्ट्रियल एरिया फेस-वन और फेस-टू के लिए कन्वर्जन नीति लाने जा रहा है। वीरवार को सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय में शहर के उद्योगपतियों व व्यापारियों और प्रशासन के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में इस संबंध में सहमति बनी है। बैठक में डीसी विनय प्रताप सिंह ने कहा है कि कन्वर्जन नीति का ड्राफ्ट और मंजूरी में कम से कम दो महीने का समय लगेगा। नीति को लेकर उद्योगपतियों ने कई सुझाव भी दिए हैं।यूटी प्रशासन के उद्योग विभाग ने शहर के उद्योगपतियों व व्यापारियों की समस्याओं को सुनने के लिए वीरवार को यूटी सचिवालय में एक ओपन हाउस संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें शहर के मेयर अनूप गुप्ता, डीसी विनय प्रताप सिंह, स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग, उद्योग विभाग की सचिव हरगुनजीत कौर समेत अन्य विभागों के कई अधिकारी और शहर के उद्योगपति व व्यापारी उपस्थित रहे। बैठक में कुल 16 एजेंडों पर विस्तार से चर्चा हुई।
उद्योगपतियों ने कहा कि प्रशासन ने नियमों के जाल में इंडस्ट्रियल एरिया को फंसा रखा है, जिसकी वजह से उद्योगों का पलायन हो रहा है। उद्योगपतियों ने इंडस्ट्रियल एरिया में बी-टू-सी (बिजनेस-टू-कस्टमर) शुरू करने की अनुमति मांगी, जिसपर डीसी विनय प्रताप सिंह ने कहा कि इसका एक ही इलाज है कि कन्वर्जन नीति लाई जाए। बैठक में ही सभी उद्योगपतियों ने नीति के लिए हामी भरी। डीसी ने कहा कि अगर सभी ऐसा चाहते हैं तो इस पर जल्द काम शुरू किया जाएगा और नीति का ड्राफ्ट और मंजूरी में कम से कम दो महीने का समय लगेगा। हालांकि, नीति को लेकर उद्योगपतियों ने कई सुझाव भी दिए। डीसी ने आश्वस्त किया कि कन्वर्जन रेट व नियम बातचीत के आधार पर ही तय किए जाएंगे। बता दें कि आखिरी बार कन्वर्जन नीति दो कनाल से ऊपर के प्लॉट्स के लिए 2005 से 2008 के बीच आई थी। इस दौरान 82 प्लॉट्स को कन्वर्जन की अनुमति मिली थी। इसके बाद उद्योगपतियों ने होटल समेत अन्य व्यवसाय शुरू भी कर दिया है।
कन्वर्जन नीति को लेकर उद्योगपतियों के सुझाव
1. बड़े प्लॉट के साथ छोटे प्लॉट के लिए भी कन्वर्जन नीति हो
2. कन्वर्जन रेट ज्यादा न हों
3. कन्वर्जन का सैकड़ों करोड़ कंसोलिडेटेड फंड में न जाकर चंडीगढ़ में रहे
4. कन्वर्जन के पैसों से ही इंडस्ट्रियल एरिया का विकास किया जाए
5. नीति को हमेशा के लिए खुली रखी जाए। पिछली बार की तरह कुछ समय के लिए न हो।
गृह से अर्बन मंत्रालय में गया लीज होल्ड से फ्री होल्ड का मामला
बैठक में लीज होल्ड से फ्री होल्ड का मुद्दा भी उठा। कई उद्योगपतियों ने कहा कि लीज होल्ड होने की वजह से किसी भी संपत्ति का टाइटल क्लियर नहीं है। खरीदार नहीं मिल रहे, जिसकी वजह से वह काम को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। जो लोग बुजुर्ग हो चुके हैं वो अपनी संपत्ति को बेच नहीं पा रहे हैं। इस पर डीसी ने बताया कि फ्री होल्ड करने के लिए प्रशासन ने पहले ही केंद्र को प्रस्ताव भेजा है। हाल में जानकारी मिली है कि मामला अब गृह मंत्रालय से अर्बन मंत्रालय के पास गया है। बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद भी मौजूद रहे। उन्होंने उद्योगपतियों को कहा कि वह संबंधित मंत्रालय के मंत्री के समक्ष इस मुद्दे को उठाएंगे, ताकि जल्द फैसला लिया जा सके।
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वैट के पुराने मामलों पर प्रशासन 15 दिन लेगा फैसला
उद्योगपतियों ने वैट के पुराने मामलों के वन टाइम सेटलमेंट की मांग की। कहा कि चंडीगढ़ के अलावा अन्य सभी राज्यों ने वैट के पुराने मामलों को खत्म करने के लिए वन टाइम सेटलमेंट नीति लाई और सभी मामलों का निपटारा कर दिया, लेकिन चंडीगढ़ आज भी पुराने मामलों में ही उलझा हुआ है। इससे उद्योगपति काफी ज्यादा परेशान हैं। इस पर डीसी ने कहा कि पुराने मामलों को खत्म करने के लिए वन टाइम सेटलमेंट की नीति पर काम चल रहा है। करीब 15 दिन में ही इस संबंध में प्रशासन की तरफ से फैसला ले लिया जाएगा।
इंडस्ट्रियल एरिया में फिर होगा सर्वे, इस बार उद्योगपति भी होंगे साथ
बिल्डिंग मिस यूज और उल्लंघन को लेकर जारी किए गए नोटिस का मामला भी उद्योगपतियों ने जोर-शोर से उठाया। डीसी ने कहा कि नीड बेस चेंज की जरूरतों को समझने के लिए पिछले साल भी सर्वे करने की कोशिश की, लेकिन उद्योगपतियों ने पूरा नहीं होने दिया। बैठक में सहमति बनी कि फिर सर्वे होगा, लेकिन इस बार उद्योगपति भी सर्वे की टीम में शामिल होंगे। उद्योगपतियों ने डीसी से आश्वासन लिया सर्वे में जो भी उल्लंघन दिखेंगे, उसको लेकर नए नोटिस नहीं जारी किए जाएंगे। डीसी ने आश्वासन दिया, जिसके बाद सर्वे पर सहमति बनी।
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उद्योगपतियों ने कहा कि प्रशासन ने नियमों के जाल में इंडस्ट्रियल एरिया को फंसा रखा है, जिसकी वजह से उद्योगों का पलायन हो रहा है। उद्योगपतियों ने इंडस्ट्रियल एरिया में बी-टू-सी (बिजनेस-टू-कस्टमर) शुरू करने की अनुमति मांगी, जिसपर डीसी विनय प्रताप सिंह ने कहा कि इसका एक ही इलाज है कि कन्वर्जन नीति लाई जाए। बैठक में ही सभी उद्योगपतियों ने नीति के लिए हामी भरी। डीसी ने कहा कि अगर सभी ऐसा चाहते हैं तो इस पर जल्द काम शुरू किया जाएगा और नीति का ड्राफ्ट और मंजूरी में कम से कम दो महीने का समय लगेगा। हालांकि, नीति को लेकर उद्योगपतियों ने कई सुझाव भी दिए। डीसी ने आश्वस्त किया कि कन्वर्जन रेट व नियम बातचीत के आधार पर ही तय किए जाएंगे। बता दें कि आखिरी बार कन्वर्जन नीति दो कनाल से ऊपर के प्लॉट्स के लिए 2005 से 2008 के बीच आई थी। इस दौरान 82 प्लॉट्स को कन्वर्जन की अनुमति मिली थी। इसके बाद उद्योगपतियों ने होटल समेत अन्य व्यवसाय शुरू भी कर दिया है।
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कन्वर्जन नीति को लेकर उद्योगपतियों के सुझाव
1. बड़े प्लॉट के साथ छोटे प्लॉट के लिए भी कन्वर्जन नीति हो
2. कन्वर्जन रेट ज्यादा न हों
3. कन्वर्जन का सैकड़ों करोड़ कंसोलिडेटेड फंड में न जाकर चंडीगढ़ में रहे
4. कन्वर्जन के पैसों से ही इंडस्ट्रियल एरिया का विकास किया जाए
5. नीति को हमेशा के लिए खुली रखी जाए। पिछली बार की तरह कुछ समय के लिए न हो।
गृह से अर्बन मंत्रालय में गया लीज होल्ड से फ्री होल्ड का मामला
बैठक में लीज होल्ड से फ्री होल्ड का मुद्दा भी उठा। कई उद्योगपतियों ने कहा कि लीज होल्ड होने की वजह से किसी भी संपत्ति का टाइटल क्लियर नहीं है। खरीदार नहीं मिल रहे, जिसकी वजह से वह काम को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। जो लोग बुजुर्ग हो चुके हैं वो अपनी संपत्ति को बेच नहीं पा रहे हैं। इस पर डीसी ने बताया कि फ्री होल्ड करने के लिए प्रशासन ने पहले ही केंद्र को प्रस्ताव भेजा है। हाल में जानकारी मिली है कि मामला अब गृह मंत्रालय से अर्बन मंत्रालय के पास गया है। बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद भी मौजूद रहे। उन्होंने उद्योगपतियों को कहा कि वह संबंधित मंत्रालय के मंत्री के समक्ष इस मुद्दे को उठाएंगे, ताकि जल्द फैसला लिया जा सके।
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वैट के पुराने मामलों पर प्रशासन 15 दिन लेगा फैसला
उद्योगपतियों ने वैट के पुराने मामलों के वन टाइम सेटलमेंट की मांग की। कहा कि चंडीगढ़ के अलावा अन्य सभी राज्यों ने वैट के पुराने मामलों को खत्म करने के लिए वन टाइम सेटलमेंट नीति लाई और सभी मामलों का निपटारा कर दिया, लेकिन चंडीगढ़ आज भी पुराने मामलों में ही उलझा हुआ है। इससे उद्योगपति काफी ज्यादा परेशान हैं। इस पर डीसी ने कहा कि पुराने मामलों को खत्म करने के लिए वन टाइम सेटलमेंट की नीति पर काम चल रहा है। करीब 15 दिन में ही इस संबंध में प्रशासन की तरफ से फैसला ले लिया जाएगा।
इंडस्ट्रियल एरिया में फिर होगा सर्वे, इस बार उद्योगपति भी होंगे साथ
बिल्डिंग मिस यूज और उल्लंघन को लेकर जारी किए गए नोटिस का मामला भी उद्योगपतियों ने जोर-शोर से उठाया। डीसी ने कहा कि नीड बेस चेंज की जरूरतों को समझने के लिए पिछले साल भी सर्वे करने की कोशिश की, लेकिन उद्योगपतियों ने पूरा नहीं होने दिया। बैठक में सहमति बनी कि फिर सर्वे होगा, लेकिन इस बार उद्योगपति भी सर्वे की टीम में शामिल होंगे। उद्योगपतियों ने डीसी से आश्वासन लिया सर्वे में जो भी उल्लंघन दिखेंगे, उसको लेकर नए नोटिस नहीं जारी किए जाएंगे। डीसी ने आश्वासन दिया, जिसके बाद सर्वे पर सहमति बनी।