फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Big blow to Supertech directors from Punjab and Haryana High Court

Haryana: सुपरटेक के निदेशकों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, गैर-जमानती वारंट के खिलाफ दायर याचिका खारिज

Wed, 23 Aug 2023 12:19 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 23 Aug 2023 12:19 AM IST
सार

याचिका का विरोध करते हुए शिकायतकर्ता की ओर से एडवोकेट आफताब सिंह खारा ने कहा कि याचिकाकर्ता ने केवल अपने पैसे की वसूली के लिए यह शिकायत नहीं दी है बल्कि यह चेक में दर्ज राशि का भुगतान करने के चलते कार्रवाई की मांग को लेकर दी है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि दोनों मामलें अलग हैं।

विज्ञापन
Big blow to Supertech directors from Punjab and Haryana High Court
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कंपनी के खिलाफ अगर दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया जारी है तो भी चेक बाउंस की शिकायत और इसके तहत हो रही कार्रवाई को अवैध नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने यह आदेश सुपरटेक लिमिटेड के निदेशकों की याचिका को खारिज करते हुए जारी किया है।

विज्ञापन


याचिका दाखिल करते हुए चंडीगढ़ निवासी मोहित अरोड़ा व अन्य ने एडवोकेट आफताब सिंह खारा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि वे सुपरटेक लिमिटेड के निदेशक हैं और उनकी कंपनी के खिलाफ दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है। याचिकाकर्ताओं के खिलाफ देवेंद्र सिंह बबला व अन्य ने चेक बाउंस की शिकायत 2 जून 2021 को दी थी। 
विज्ञापन


इस शिकायत के आधार पर मजिस्ट्रेट ने 20 सितंबर 2022 को याचिकाकर्ताओं के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। याची ने कहा कि जब उनके खिलाफ दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया विचाराधीन है तो समानांतर नेगोशिएबल एक्ट की धारा 138 के तहत स्वतंत्र वसूली व आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


याचिका का विरोध करते हुए शिकायतकर्ता की ओर से एडवोकेट आफताब सिंह खारा ने कहा कि याचिकाकर्ता ने केवल अपने पैसे की वसूली के लिए यह शिकायत नहीं दी है बल्कि यह चेक में दर्ज राशि का भुगतान करने के चलते कार्रवाई की मांग को लेकर दी है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि दोनों मामलें अलग हैं क्योंकि दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया सिविल है, जबकि एनआई एक्ट आपराधिक कार्रवाई है। ऐसे में दोनों कार्रवाई समानांतर चल सकती है। हाईकोर्ट ने इन टिप्पणियों के साथ ही आपराधिक शिकायत और इसके आधार पर चल रही कार्रवाई के तहत जारी गैर-जमानती वारंट को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।

यह था मामला

शिकायतकर्ता ने गुरुग्राम में कंपनी का फ्लैट बुक किया था। इस फ्लैट का कब्जा नहीं मिलने पर रेरा में शिकायत दी गई थी। रेरा ने शिकायतकर्ता को पैसा वापस करने का कंपनी को आदेश दिया था। आदेश के बाद कंपनी की ओर से शिकायतकर्ता को बाद की तारीख का चेक दिया गया था, जो बाउंस हो गया। चेक बाउंस होने पर चंडीगढ़ की अदालत में शिकायत दी गई थी। इसके आधार पर निदेशकों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed