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Chandigarh News: राम किशन गुज्जर को बड़ा झटका, सजा निलंबित करने से हाईकोर्ट का इन्कार

Wed, 11 Sep 2024 02:31 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 11 Sep 2024 02:31 AM IST
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Big blow to Ram Kishan Gujjar, High Court refuses to suspend sentence.
आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अंबाला की जिला अदालत ने सुनाई थी चार साल की सजा
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चुनाव लड़ने के लिए सजा निलंबित करने की मांग लेकर गुज्जर पहुंचे थे हाईकोर्ट

चुनाव लड़ने के लिए कानून का पालन करने वाले नागरिकों की कमी नहीं : हाईकोर्ट

चंडीगढ़। पूर्व विधायक व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राम किशन गुज्जर को बड़ा झटका देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उनके चुनाव लड़ने के इरादे पर पानी फेर दिया है। हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में उनकी सजा निलंबित करने की मांग खारिज करते हुए कहा कि प्रदेश में चुनाव लड़ने के लिए कानून का पालन करने वालों की कमी नहीं है।


दो मार्च, 2017 को अंबाला की ट्रायल कोर्ट ने गुज्जर को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में चार साल जेल की सजा सुनाई थी। साथ ही पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए उन्होंने बताया था कि वह पांच अक्तूबर को होने वाले हरियाणा विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं। लेकिन सजा के कारण वह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 (3) के तहत अयोग्यता का सामना कर रहे हैं। ऐसे में उनकी अपील लंबित रहने तक सजा निलंबित कर दी जाए। याची ने बताया कि 2005 से वह नारायणगढ़ से विधायक हैं, हालांकि 2019 में वह जन प्रतिनिधि अधिनियम के तहत अयोग्यता के कारण विधानसभा चुनाव नहीं लड़ सके थे। अब 2024 के विधानसभा चुनाव के लिए भी यही अयोग्यता रोड़ा है। याची ने कहा कि यदि सजा निलंबित नहीं की गई तो उसे अपूरणीय क्षति होगी, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकेगी। साथ ही सजा निलंबित न करना क्षेत्र के निवासियों के साथ अन्याय होगा। याचिका के विरोध में सरकार ने कहा कि चुनाव लड़ने की इच्छा सजा को निलंबित करने का आधार नहीं हो सकती। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि सजा निलंबित करने के लिए न तो कोई ठोस आधार है न ही असाधारण परिस्थिति, जिसके चलते सजा को निलंबित/स्थगित किया जा सके। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश को देखकर सरसरी जांच से प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि ट्रायल कोर्ट की ओर से दर्ज किए गए निष्कर्ष काफी हद तक विश्वसनीय हैं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि अभी सजा निलंबन पर बहस हुई है और मामले के गुण दोष पर अपील में फैसला होगा।
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