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सरकार पर बरसे हुड्डा: बोले- 20 फीसदी को ही मिला मुआवजा, आंदोलन को मजबूर 80 फीसदी किसान
Fri, 30 Jun 2023 07:24 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 30 Jun 2023 07:24 PM IST
सार
हुड्डा ने कहा कि चरखी दादरी समेत प्रदेशभर के किसानों का आरोप है कि सरकार ने पिछले दिनों हुई बेमौसम बारिश से हुए नुकसान के एवज में बमुश्किल 20 फीसदी किसानों को ही नाममात्र मुआवजा दिया है।
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भूपेंद्र हुड्डा
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बीजेपी-जेजेपी सरकार किसानों को मुआवजा, एमएसपी और समय पर खाद देने के मामले में पूरी तरह विफल साबित हुई है। लंबे आंदोलन के बाद सरकार ने सूरजमुखी के किसानों की फसल एमएसपी पर खरीदने का वादा किया था लेकिन खुद के वादे से मुकरते हुए सरकार ने पोर्टल ही बंद कर दिया।
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अब किसान अपनी फसल बेचने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इसी तरह 1962 रुपये एमएसपी वाली मक्का एक हजार से भी कम रेट पर बिक रही है। इससे पहले किसानों को सरसों, धान और गेहूं के को भी घाटे में बेचना पड़ा था। हैरानी की बात है कि हर मामले में पोर्टल सिस्टम फेल होने के बाद सरकार अब इसे खाद पर भी थोपना चाहती है, यानि जो पोर्टल व्यवस्था किसानों को एमएसपी और मुआवजे से वंचित कर रही थी, वह अब खाद से भी वंचित करने जा रही है।
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मुआवजे के मुद्दे पर बोलते हुए हुड्डा ने कहा कि उन्हें जो डर था आखिरकार वहीं हुआ। बार-बार मांग किए जाने के बावजूद बीजेपी-जेजेपी सरकार ने किसानों को मुआवजा नहीं दिया। सरकार एक बार फिर जानबूझकर किसानों को आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है। चरखी दादरी समेत प्रदेशभर के किसानों का आरोप है कि सरकार ने पिछले दिनों हुई बेमौसम बारिश से हुए नुकसान के एवज में बमुश्किल 20 फीसदी किसानों को ही नाममात्र मुआवजा दिया है।
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80 फीसदी किसानों को मुआवजा देने से सरकार ने इनकार कर दिया। इसके लिए सरकार ने मुआवजे के लिए जानबूझकर ऐसे मानक बनाए और शर्तें थोपी, जिसके चलते 80 फीसदी किसान मुआवजे की पात्रता के दायरे से बाहर हो गए। अबकी बार रबी सीजन के दौरान सर्दी के प्रकोप एवं ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों का मुआवजा लेने के लिए ऑनलाइन पोर्टल ‘क्षतिपूर्ति’ पर शिकायत दर्ज कराने वाले 80 फीसदी किसानों को मुआवजे से वंचित रखा गया है। जबकि पूर्व में सभी सरकारें पटवारी द्वारा तैयार की गई एपीआर स्पेशल गिरदावरी की रिपोर्ट के आधार पर किसानों को मुआवजा देती आई हैं। चरखी दादरी समेत विभिन्न जिलों के किसान उसी पद्धति से मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं और गूंगी बहरी सरकार के सामने ‘पोर्टल हटाओ, खेती बचाओ’ का नारा लगा रहे हैं।