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'हरियाणा दंगों की फिल्म की निदेशक, निर्माता, लेखक और कलाकार BJP'
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Mon, 28 Mar 2016 12:12 PM IST
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bhupinder singh hudda
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पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दंगों का ठीकरा भाजपा के सिर फोड़ा है। उन्होंने कहा कि जातीय दंगों की फिल्म की निदेशक, निर्माता, लेखक और कलाकार खुद भाजपा है। पुलिस को सीएम मनोहर लाल खट्टर, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु और कृषि मंत्री ओपी धनखड़ को भी रिमांड पर लेकर पूछताछ करनी चाहिए। यही नहीं भाजपा एसवाईएल पर भी राजनीति कर रही है। मौके की स्थिति को देखते हुए हरियाणा और पंजाब में राष्ट्रपति शासन लागू कर देना चाहिए।
हुड्डा रविवार दोपहर रोहतक में डी-पार्क स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। मांग की कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज से होनी चाहिए। क्योंकि भाजपा घुमा फिराकर पर मुझ पर साजिश रचने का आरोप जड़ा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार व पुलिस निर्दोष लोगों को फसाने में जुटी हुई है।
धींगड़ा आयोग ने माना, मेरे खिलाफ नहीं बनता चार्ज
हुड्डा ने धींगड़ा आयोग को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया और कहा कि मैं आयोग का सम्मान करता हूं। मेरे वकील ने आयोग के समक्ष पक्ष रखा है। आयोग ने भी माना है कि उनके खिलाफ कोई चार्ज नहीं बनता। आयोग से उन्होंने भी कुछ दस्तावेज मांगे हैं। उनका अध्ययन करने के बाद आयोग अगर उन्हें स्वयं पेश होने के लिए कहेगा तो वे तैयार हैं।
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दंगों में प्रोफेसर विरेंद्र की ऑडियो टेप वायरल होने के मामले में उन्होंने कहा कि जब प्रदेश के सीएम, वित्त मंत्री व कृषि मंत्री मेरा नाम ले रहे हैं तो पुलिस उन तीनों से पूछताछ करे और उनसे सबूत जुटाए। खुद कोर्ट भी प्रोफेसर विरेंद्र सिंह के मामले में कह चुकी है कि उन पर प्रथम दृष्टि में राजद्रोह का मामला नहीं बनता। इसके बावजूद उन पर दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन सच्चाई यह भी है कि भाजपा सब कुछ कराती है और इसका ठीकरा दूसरों पर फोड़ती है।
उत्तराखंड के सियासी हालात पर हुड्डा ने कहा कि ये तो होना ही था। भाजपा की मंशा पहले ही साफ दिख रही थी। पंजाब ने एसवाईएल पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश नहीं माने और प्रदेश में भी हालात बेकाबू हैं। ऐसे में दोनों ही प्रदेशों में राष्ट्रपति शासन लागू कर देना चाहिए। लेकिन सच है कि भाजपा एसवाईएल के मुद्दे पर केवल राजनीति कर रही है। पूर्व सीएम ने प्रशासन द्वारा शहर में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर कहा कि उस समय स्थिति ठीक नहीं थी।
कानून ने उन्हें जाने को कहा वे चले गए। क्योंकि वे कभी कानून का अपमान नहीं करते। उनके शहर में या घर पर आने के लिए कोई प्रतिबंध नहीं था। इस मौके पर पूर्व विधायक भारत भूषण बतरा, राज्यसभा सदस्य शादीलाल बतरा, विधायक डॉ. रघुबीर कादियान, विधायक आनंद सिंह दांगी, विधायक शकुंतला खटक, पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा और चक्रवर्ती शर्मा मौजूद रहे। गौरतलब है कि दंगों के तुरंत बाद जब पूर्व सीएम मॉडल टाउन में व्यापारियों से मिलने आए थे तो उस समय उनका विरोध हुआ था। प्रशासन ने लोगों के आक्रोश को देखते हुए उन्हें शहर से बाहर चले जाने को कहा था।
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हुड्डा रविवार दोपहर रोहतक में डी-पार्क स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। मांग की कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज से होनी चाहिए। क्योंकि भाजपा घुमा फिराकर पर मुझ पर साजिश रचने का आरोप जड़ा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार व पुलिस निर्दोष लोगों को फसाने में जुटी हुई है।
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धींगड़ा आयोग ने माना, मेरे खिलाफ नहीं बनता चार्ज
हुड्डा ने धींगड़ा आयोग को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया और कहा कि मैं आयोग का सम्मान करता हूं। मेरे वकील ने आयोग के समक्ष पक्ष रखा है। आयोग ने भी माना है कि उनके खिलाफ कोई चार्ज नहीं बनता। आयोग से उन्होंने भी कुछ दस्तावेज मांगे हैं। उनका अध्ययन करने के बाद आयोग अगर उन्हें स्वयं पेश होने के लिए कहेगा तो वे तैयार हैं।
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दंगों में प्रोफेसर विरेंद्र की ऑडियो टेप वायरल होने के मामले में उन्होंने कहा कि जब प्रदेश के सीएम, वित्त मंत्री व कृषि मंत्री मेरा नाम ले रहे हैं तो पुलिस उन तीनों से पूछताछ करे और उनसे सबूत जुटाए। खुद कोर्ट भी प्रोफेसर विरेंद्र सिंह के मामले में कह चुकी है कि उन पर प्रथम दृष्टि में राजद्रोह का मामला नहीं बनता। इसके बावजूद उन पर दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन सच्चाई यह भी है कि भाजपा सब कुछ कराती है और इसका ठीकरा दूसरों पर फोड़ती है।
उत्तराखंड के सियासी हालात पर हुड्डा ने कहा कि ये तो होना ही था। भाजपा की मंशा पहले ही साफ दिख रही थी। पंजाब ने एसवाईएल पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश नहीं माने और प्रदेश में भी हालात बेकाबू हैं। ऐसे में दोनों ही प्रदेशों में राष्ट्रपति शासन लागू कर देना चाहिए। लेकिन सच है कि भाजपा एसवाईएल के मुद्दे पर केवल राजनीति कर रही है। पूर्व सीएम ने प्रशासन द्वारा शहर में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर कहा कि उस समय स्थिति ठीक नहीं थी।
कानून ने उन्हें जाने को कहा वे चले गए। क्योंकि वे कभी कानून का अपमान नहीं करते। उनके शहर में या घर पर आने के लिए कोई प्रतिबंध नहीं था। इस मौके पर पूर्व विधायक भारत भूषण बतरा, राज्यसभा सदस्य शादीलाल बतरा, विधायक डॉ. रघुबीर कादियान, विधायक आनंद सिंह दांगी, विधायक शकुंतला खटक, पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा और चक्रवर्ती शर्मा मौजूद रहे। गौरतलब है कि दंगों के तुरंत बाद जब पूर्व सीएम मॉडल टाउन में व्यापारियों से मिलने आए थे तो उस समय उनका विरोध हुआ था। प्रशासन ने लोगों के आक्रोश को देखते हुए उन्हें शहर से बाहर चले जाने को कहा था।