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साइक्लिंग के शौकीन हैं तो चंडीगढ़ में आपके लिए हैं ढेरों जगह... साइकिल उठाइए और निकल जाइए
Mon, 14 Dec 2020 03:33 PM IST
निवेदिता शर्मा
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता शर्मा
Updated Mon, 14 Dec 2020 03:33 PM IST
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चंडीगढ़ में जयंति और पर्च डैम को जाने वाले रास्ते।
- फोटो : अमर उजाला
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साइक्लिंग के लिए चंडीगढ़ सबसे मुफीद माना जाता है लेकिन ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि चंडीगढ़ के आसपास भी कुछ ऐसी जगह हैं, जहां साइक्लिंग करना किसी रोमांच से कम नहीं है। हरियाली से भरपूर ये रास्ते शहर के शोर और प्रदूषण से दूर एक ऐसी दुनिया में ले जाते हैं, जो न सिर्फ सुकून का अहसास दिलाते हैं बल्कि एक सकारात्मक ऊर्जा भरते हैं।
पर्च डैम
चंडगढ़ से सात किलोमीटर दूर पर्च डैम है। पीजीआई से खुड्डा लाहौरा को पार कर कुराली-चंडीगढ़ रूट की सड़क पर आगे बढ़ने पर दाहिने मुड़ना होगा। उसी सड़क पर आगे चलने पर पर्च डैम मिलेगा। डैम का रास्ता फार्म के बीच से होकर गुजरता है। पर्च डैम बिल्कुल सुखना लेक जैसा दिखता है। एक तरफ पानी है तो दूसरी तरफ जंगल। यहां सूर्योदय व सूर्यास्त का नजारा बेहद खूबसूरत होता है।
जयंति डैम
यह डैम चंडीगढ़ से करीब 12 किलोमीटर दूर जयंति मंदिर के पास स्थित है। जयंति मंदिर काफी प्रसिद्ध है। इसका रास्ता भी पीजीआई के सामने वाली रोड से होकर जाता है। पर्च डैम से इसकी दूरी करीब पांच किलोमीटर है। यह डैम भी काफी बड़ा है और इसका व्यू भी बहुत खूबसूरत है। डैम के आसपास काफी कच्चे रास्ते हैं, जो जंगल की ओर जाते हैं। कई साइक्लिस्ट इन रास्तों से गुजरकर जंगल की ओर जाते हैं और साइक्लिंग का लुत्फ उठाते हैं।
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सिसवां डैम
चंडीगढ़ से करीब 22 किलोमीटर दूर सिसवां डैम बद्दी रोड पर पड़ता है। यह डैम भी बहुत खूबसूरत है। आसपास जंगल एरिया और कच्चे रास्ते हैं, जिन पर साइक्लिंग किसी रोमांच से कम नहीं है। यहां जाने के लिए पीजीआई से मुल्लांपुर की सड़क पकड़नी होगी। टी प्वाइंट से बाएं जाने पर सिसवां डैम का रास्ता मिल जाएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां आसपास काफी सारे रिजॉर्ट बने हुए हैं। शहर के कई लोग साइकिल से यहां आते हैं और नाश्ता कर यहां के खूबसूरत नजारों का लुत्फ उठाते हैं। इस डैम की एक विशेषता यह है कि यहां से आठ किलोमीटर लंबा रास्ता जंगल व पहाड़ों के बीच से होकर गुजरता है। यह रास्ता आगे जाकर मिर्जापुर डैम को जोड़ता है। मिर्जापुर डैम भी बहुत सुंदर है, जो पर्च डैम का दोगुना होगा।
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पर्च डैम
चंडगढ़ से सात किलोमीटर दूर पर्च डैम है। पीजीआई से खुड्डा लाहौरा को पार कर कुराली-चंडीगढ़ रूट की सड़क पर आगे बढ़ने पर दाहिने मुड़ना होगा। उसी सड़क पर आगे चलने पर पर्च डैम मिलेगा। डैम का रास्ता फार्म के बीच से होकर गुजरता है। पर्च डैम बिल्कुल सुखना लेक जैसा दिखता है। एक तरफ पानी है तो दूसरी तरफ जंगल। यहां सूर्योदय व सूर्यास्त का नजारा बेहद खूबसूरत होता है।
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जयंति डैम
यह डैम चंडीगढ़ से करीब 12 किलोमीटर दूर जयंति मंदिर के पास स्थित है। जयंति मंदिर काफी प्रसिद्ध है। इसका रास्ता भी पीजीआई के सामने वाली रोड से होकर जाता है। पर्च डैम से इसकी दूरी करीब पांच किलोमीटर है। यह डैम भी काफी बड़ा है और इसका व्यू भी बहुत खूबसूरत है। डैम के आसपास काफी कच्चे रास्ते हैं, जो जंगल की ओर जाते हैं। कई साइक्लिस्ट इन रास्तों से गुजरकर जंगल की ओर जाते हैं और साइक्लिंग का लुत्फ उठाते हैं।
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सिसवां डैम
चंडीगढ़ से करीब 22 किलोमीटर दूर सिसवां डैम बद्दी रोड पर पड़ता है। यह डैम भी बहुत खूबसूरत है। आसपास जंगल एरिया और कच्चे रास्ते हैं, जिन पर साइक्लिंग किसी रोमांच से कम नहीं है। यहां जाने के लिए पीजीआई से मुल्लांपुर की सड़क पकड़नी होगी। टी प्वाइंट से बाएं जाने पर सिसवां डैम का रास्ता मिल जाएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां आसपास काफी सारे रिजॉर्ट बने हुए हैं। शहर के कई लोग साइकिल से यहां आते हैं और नाश्ता कर यहां के खूबसूरत नजारों का लुत्फ उठाते हैं। इस डैम की एक विशेषता यह है कि यहां से आठ किलोमीटर लंबा रास्ता जंगल व पहाड़ों के बीच से होकर गुजरता है। यह रास्ता आगे जाकर मिर्जापुर डैम को जोड़ता है। मिर्जापुर डैम भी बहुत सुंदर है, जो पर्च डैम का दोगुना होगा।
मनौली।
- फोटो : अमर उजाला
थापली नेचर रिजॉर्ट
चंडीगढ़ से पंचकूला की ओर से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है थापली नेचर रिजॉर्ट। इसे हरियाणा के वन विभाग की ओर से तैयार किया गया है। कई साइक्लिस्ट थापली नेचर रिजॉर्ट की ओर जाते हैं और ब्रेकफास्ट का आनंद उठाते हैं। कुछ लोग कार में अपनी साइकिल लेकर जाते हैं और थापली नेचर रिजॉर्ट से पांच किलोमीटर पहले अपनी कार खड़ी कर साइकिल से आगे बढ़ते हैं। यह रास्ता काफी मनमोहक है। वीकेंड में काफी साइक्लिस्ट ग्रुप में आते हैं।
मांदना और मोरनी की पहाड़ियां
चंडीगढ़ से करीब 35 किलोमीटर दूर। पंचकूला से मोरनी की ओर जाते हुए मांदना हिल्स पड़ता है। यहां काफी ठंड पड़ती है। इसलिए गर्मियों में साइक्लिस्टों का हुजूम उमड़ता है। घुमावदार रास्ता होने की वजह से यहां पर ट्रेंड साइक्लिस्ट ही आते हैं। यहां से करीब आठ किलोमीटर दूर मोरनी की पहाड़ियां हैं। यहां सूर्योदय व सूर्यास्त को देखने के लिए साइक्लिस्ट आते हैं।
मनौली का किला
मोहाली स्थित सेक्टर-70 से करीब छह किलोमीटर दूर मनौली का किला है। यह एक ऐतिहासिक किला है। इसे बाबा बंदा सिंह बहादुर ने मुगलों से जीता था। यहां जाने के लिए जो रास्ता मिलता है, वो साइक्लिस्टों को सबसे ज्यादा भाता है। इसका रास्ता गांव के अंदर से जाता है। स्थानीय लोग साइक्लिस्टों का काफी अच्छे तरह से स्वागत करते हैं। अच्छी बात यह है कि सिटी से कुछ ही दूरी में गांव आ जाता है। जो मुल्लांपुर व पंचकूला की ओर नहीं जाते हैं, वे इस ओर चले आते हैं।
एयरपोर्ट रोड
कई लोग सुखना लेक न जाकर एयरपोर्ट रोड पर साइक्लिंग के लिए जाते हैं। दरअसल, यह रोड काफी चौड़ी है और ज्यादा ट्रैफिक भी नहीं होता है। कई महिलाएं इस रोड को ज्यादा तवज्जो देती हैं क्योंकि यह सुरक्षित है और यहां पुलिस भी रहती है। साइक्लिंग के लिहाज से सबसे मुफीद सड़क है। सुबह के वक्त यहां का नजारा बेहद खूबसूरत रहता है।
चंडीगढ़ से पंचकूला की ओर से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है थापली नेचर रिजॉर्ट। इसे हरियाणा के वन विभाग की ओर से तैयार किया गया है। कई साइक्लिस्ट थापली नेचर रिजॉर्ट की ओर जाते हैं और ब्रेकफास्ट का आनंद उठाते हैं। कुछ लोग कार में अपनी साइकिल लेकर जाते हैं और थापली नेचर रिजॉर्ट से पांच किलोमीटर पहले अपनी कार खड़ी कर साइकिल से आगे बढ़ते हैं। यह रास्ता काफी मनमोहक है। वीकेंड में काफी साइक्लिस्ट ग्रुप में आते हैं।
मांदना और मोरनी की पहाड़ियां
चंडीगढ़ से करीब 35 किलोमीटर दूर। पंचकूला से मोरनी की ओर जाते हुए मांदना हिल्स पड़ता है। यहां काफी ठंड पड़ती है। इसलिए गर्मियों में साइक्लिस्टों का हुजूम उमड़ता है। घुमावदार रास्ता होने की वजह से यहां पर ट्रेंड साइक्लिस्ट ही आते हैं। यहां से करीब आठ किलोमीटर दूर मोरनी की पहाड़ियां हैं। यहां सूर्योदय व सूर्यास्त को देखने के लिए साइक्लिस्ट आते हैं।
मनौली का किला
मोहाली स्थित सेक्टर-70 से करीब छह किलोमीटर दूर मनौली का किला है। यह एक ऐतिहासिक किला है। इसे बाबा बंदा सिंह बहादुर ने मुगलों से जीता था। यहां जाने के लिए जो रास्ता मिलता है, वो साइक्लिस्टों को सबसे ज्यादा भाता है। इसका रास्ता गांव के अंदर से जाता है। स्थानीय लोग साइक्लिस्टों का काफी अच्छे तरह से स्वागत करते हैं। अच्छी बात यह है कि सिटी से कुछ ही दूरी में गांव आ जाता है। जो मुल्लांपुर व पंचकूला की ओर नहीं जाते हैं, वे इस ओर चले आते हैं।
एयरपोर्ट रोड
कई लोग सुखना लेक न जाकर एयरपोर्ट रोड पर साइक्लिंग के लिए जाते हैं। दरअसल, यह रोड काफी चौड़ी है और ज्यादा ट्रैफिक भी नहीं होता है। कई महिलाएं इस रोड को ज्यादा तवज्जो देती हैं क्योंकि यह सुरक्षित है और यहां पुलिस भी रहती है। साइक्लिंग के लिहाज से सबसे मुफीद सड़क है। सुबह के वक्त यहां का नजारा बेहद खूबसूरत रहता है।
मसौल की तरफ जाने वाला रास्ता।
- फोटो : अमर उजाला
बुर्ज कोटिया का झरना
चंडीगढ़ के आसपास इकलौता झरना है, जो पंचकूला में पड़ता है। चंडीगढ़ से करीब 30 किलोमीटर दूर बुर्ज कोटिया जाने के दौरान कच्चा रास्ता मिलता है। इसके एक तरफ घग्गर नदी है। इसी पर आगे जाकर झरना मिलता है। कई लोग यहां पिकनिक मनाने आते हैं। इस रास्ते पर सिर्फ माउंटेन बाइक जाती हैं। इसी सड़क पर आगे चलकर मुगलों के जमाने का किला बना हुआ है। यहां से पंचकूला, अमरावती व कौशल्या डैम का व्यू बहुत सुंदर दिखता है।
मसौल गांव
पीजीआई से करीब 17 किलोमीटर की दूरी पर मसौल गांव है। पीजीआई से नयागांव और वहां से करोरा होते हुए मसौल जा सकते हैं। मसौल पहुंचने से पहले कच्चा और पहाड़ी रास्ता है। प्रकृति के नजारों से भरे इन रास्तों पर साइकिल से जाना जीवन का एक बेहतरीन अनुभव है। मसौल से जीवाश्म मिलते रहते हैं। इन जीवाश्म पर शोध के लिए फ्रांस के कई वैज्ञानिक भी आते हैं। यहां ऐसे रास्ते हैं, जहां गाड़ियों का जाना संभव नहीं होता। ऐसे में साइकिल ही सबसे बेहतर है।
छतबीड़
इस नाम से लोगों के सामने छतबीड़ चिड़ियाघर का नजारा घूमने लगता है। एयरपोर्ट चौक से सीधे छतबीड़ के लिए रास्ता है। खेतों के बीच रास्ते से गुजरकर आगे जाने पर छतबीड़ डैम दिखाई पड़ता है। इससे पहले छतबीड़ जाने का जो रास्ता है, वहां साइकिल से जाने से एडवेंचर जैसा अहसास होता है। परिवार के साथ यहां जा सकते हैं। यहां सूर्योदय का नजारा भी जबरदस्त है।
चंडीगढ़ के आसपास इकलौता झरना है, जो पंचकूला में पड़ता है। चंडीगढ़ से करीब 30 किलोमीटर दूर बुर्ज कोटिया जाने के दौरान कच्चा रास्ता मिलता है। इसके एक तरफ घग्गर नदी है। इसी पर आगे जाकर झरना मिलता है। कई लोग यहां पिकनिक मनाने आते हैं। इस रास्ते पर सिर्फ माउंटेन बाइक जाती हैं। इसी सड़क पर आगे चलकर मुगलों के जमाने का किला बना हुआ है। यहां से पंचकूला, अमरावती व कौशल्या डैम का व्यू बहुत सुंदर दिखता है।
मसौल गांव
पीजीआई से करीब 17 किलोमीटर की दूरी पर मसौल गांव है। पीजीआई से नयागांव और वहां से करोरा होते हुए मसौल जा सकते हैं। मसौल पहुंचने से पहले कच्चा और पहाड़ी रास्ता है। प्रकृति के नजारों से भरे इन रास्तों पर साइकिल से जाना जीवन का एक बेहतरीन अनुभव है। मसौल से जीवाश्म मिलते रहते हैं। इन जीवाश्म पर शोध के लिए फ्रांस के कई वैज्ञानिक भी आते हैं। यहां ऐसे रास्ते हैं, जहां गाड़ियों का जाना संभव नहीं होता। ऐसे में साइकिल ही सबसे बेहतर है।
छतबीड़
इस नाम से लोगों के सामने छतबीड़ चिड़ियाघर का नजारा घूमने लगता है। एयरपोर्ट चौक से सीधे छतबीड़ के लिए रास्ता है। खेतों के बीच रास्ते से गुजरकर आगे जाने पर छतबीड़ डैम दिखाई पड़ता है। इससे पहले छतबीड़ जाने का जो रास्ता है, वहां साइकिल से जाने से एडवेंचर जैसा अहसास होता है। परिवार के साथ यहां जा सकते हैं। यहां सूर्योदय का नजारा भी जबरदस्त है।
यदि कोई साइक्लिंग करता है तो उसे इन जगहों पर जरूर जाना चाहिए। साइक्लिंग का ऐसा अनुभव आपको कहीं और नहीं मिल पाएगा। लेकिन जब भी इन जगहों पर जाएं तो कभी अकेले न जाएं, बल्कि ग्रुप में जाएं। यह सुरक्षा के लिहाज से सही होगा। -अक्षित पासी, वाइस प्रेसिडेंट, साइकिलगिरी
इन जगहों पर जाने से प्रकृति से जुड़ाव बढ़ता है। ताजी हवा मन को शांत कर शरीर को तरोताजा कर देती है। यहां पर लोगों को जाना चाहिए। लोग जाएंगे तो उन्हें साइक्लिंग के असली महत्व के बारे में पता चलेगा। -दीपकंवर सिंह, साइक्लिस्ट