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Chandigarh News: बीएड स्पेशल एजुकेशन के छात्रों ने विभागीय अव्यवस्था और मानसिक उत्पीड़न का लगाया आरोप
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी एजुकेशन एंड डिसएबिलिटी स्टडीज के बीएड स्पेशल एजुकेशन (लर्निंग डिसएबिलिटी) कोर्स के छात्रों ने विभाग में भारी अव्यवस्था और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि बिना पूर्व सूचना के अचानक नोटिस जारी कर दिए जाते हैं, जिससे वह मानसिक तनाव में हैं।
छात्रों के अनुसार मिड सेमेस्टर परीक्षाओं की घोषणा परीक्षा से मात्र दो दिन पहले की गई थी। अब 31 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे यह सूचना दी गई कि टीचिंग प्रैक्टिस (टीपी) का कार्यक्रम 1 नवंबर से पंचकूला में शुरू होगा। छात्रों को इसकी पहले से कोई जानकारी नहीं थी, न ही किसी प्रकार की यातायात व्यवस्था की गई है।
गैर-हॉस्टलर छात्रों ने सवाल उठाया है कि वह रोजाना इतनी दूरी से आते हैं। ऐसे में वह कैसे समय पर पहुंचेंगे और देर रात लौटने के बाद अगले दिन फिर सुबह जल्दी कैसे जाएंगे। छात्रों का कहना है कि उन्हें पूरे आने-जाने का खर्च खुद वहन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक और शारीरिक परेशानी बढ़ गई है।
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छात्रों ने यह भी बताया कि टीचिंग प्रैक्टिस के साथ-साथ नियमित विभागीय कक्षाएं भी जारी हैं, जिससे वह मानसिक और शारीरिक रूप से थकावट महसूस कर रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और विभाग से जवाबदेही तय करने और इस तरह की लापरवाह योजना एवं अकादमिक उत्पीड़न को रोकने की मांग की है।
छात्रों का कहना है कि इस तरह के असंगठित और अचानक फैसले उनके शैक्षणिक प्रदर्शन और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं।
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छात्रों के अनुसार मिड सेमेस्टर परीक्षाओं की घोषणा परीक्षा से मात्र दो दिन पहले की गई थी। अब 31 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे यह सूचना दी गई कि टीचिंग प्रैक्टिस (टीपी) का कार्यक्रम 1 नवंबर से पंचकूला में शुरू होगा। छात्रों को इसकी पहले से कोई जानकारी नहीं थी, न ही किसी प्रकार की यातायात व्यवस्था की गई है।
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गैर-हॉस्टलर छात्रों ने सवाल उठाया है कि वह रोजाना इतनी दूरी से आते हैं। ऐसे में वह कैसे समय पर पहुंचेंगे और देर रात लौटने के बाद अगले दिन फिर सुबह जल्दी कैसे जाएंगे। छात्रों का कहना है कि उन्हें पूरे आने-जाने का खर्च खुद वहन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक और शारीरिक परेशानी बढ़ गई है।
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छात्रों ने यह भी बताया कि टीचिंग प्रैक्टिस के साथ-साथ नियमित विभागीय कक्षाएं भी जारी हैं, जिससे वह मानसिक और शारीरिक रूप से थकावट महसूस कर रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और विभाग से जवाबदेही तय करने और इस तरह की लापरवाह योजना एवं अकादमिक उत्पीड़न को रोकने की मांग की है।
छात्रों का कहना है कि इस तरह के असंगठित और अचानक फैसले उनके शैक्षणिक प्रदर्शन और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं।