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देश विदेश की 250 से ज्यादा गुड़िया है यहां
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 28 Oct 2013 08:12 PM IST
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क्यों देखें : देश और विदेशी गुड़ियों का कलेक्शन, ट्वॉय ट्रेन
सेक्टर 23 के बाल भवन में स्थित इंटरनेशनल डॉल्स म्यूजियम बच्चों के घूमने के लिए आकर्षण का केंद्र है। इसका संचालन इंडियन काउंसिल ऑफ चाइल्ड वेलफेयर, चंडीगढ़ करती है।
1985 में इसकी स्थापना बच्चों के मनोरंजन को ध्यान में रख कर की गई थी। इसमें देश और विदेशी गुड़ियों और कठपुतलियों का दिलचस्प कलेक्शन है।
पढ़ें: बेहतरीन वास्तुशिल्प का नमूना है कैपिटल कांपलेक्स
जर्मनी, स्पेन, कोरिया, डेनमार्क, नीदरलैंड और रूस सहित 25 से ज्यादा देशों की 250 से अधिक गुड़िया यहां है। भारतीय गुड़ियों के लिए एक अलग सेक्शन है।
इसमें मौजूद गुड़िया को देश के विभिन्न राज्यों की परंपरागत परिधान पहनाई गई है। गुड़ियों का पहनावा ऐसा है, जिससे यह किसी परी कथा जैसी लगती है। यह इस इंटरनेशनल डॉल म्यूजियम की सबसे बड़ी खासियत है।
मनोरंजन के लिए यहां एक ट्रॉय ट्रेन भी है। इसके सहारे आप म्यूजियम के अलग-अलग सेक्शन घूम सकते हैं। यह म्यूजियम सप्ताह के सातों दिन खुला रहता है। रविवार को छुट्टी होने की वजह से यहां बड़ी संख्या में बच्चे आते हैं।
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सेक्टर 23 के बाल भवन में स्थित इंटरनेशनल डॉल्स म्यूजियम बच्चों के घूमने के लिए आकर्षण का केंद्र है। इसका संचालन इंडियन काउंसिल ऑफ चाइल्ड वेलफेयर, चंडीगढ़ करती है।
1985 में इसकी स्थापना बच्चों के मनोरंजन को ध्यान में रख कर की गई थी। इसमें देश और विदेशी गुड़ियों और कठपुतलियों का दिलचस्प कलेक्शन है।
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जर्मनी, स्पेन, कोरिया, डेनमार्क, नीदरलैंड और रूस सहित 25 से ज्यादा देशों की 250 से अधिक गुड़िया यहां है। भारतीय गुड़ियों के लिए एक अलग सेक्शन है।
इसमें मौजूद गुड़िया को देश के विभिन्न राज्यों की परंपरागत परिधान पहनाई गई है। गुड़ियों का पहनावा ऐसा है, जिससे यह किसी परी कथा जैसी लगती है। यह इस इंटरनेशनल डॉल म्यूजियम की सबसे बड़ी खासियत है।
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मनोरंजन के लिए यहां एक ट्रॉय ट्रेन भी है। इसके सहारे आप म्यूजियम के अलग-अलग सेक्शन घूम सकते हैं। यह म्यूजियम सप्ताह के सातों दिन खुला रहता है। रविवार को छुट्टी होने की वजह से यहां बड़ी संख्या में बच्चे आते हैं।
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