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बेअंत सिंह मर्डर केस के मुख्य गवाह का आरोप, नहीं मिला पुरस्कार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 01 Apr 2016 06:45 PM IST
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बेअंत सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
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पूर्व सीएम बेअंत सिंह हत्याकांड के गवाह ने आरोप लगाया है कि 21 साल बाद भी उसे पुरस्कार राशि दस लाख रुपये नहीं दी गई। जबकि, उसने ही आरोपियों के बारे में सूचना दी थी। अपने वकील सुभाष कुमार के साथ प्रेस कांफ्रेंस में बलविंदर सिंह बिट्टू ने कहा कि 31 अगस्त-95 को बेअंत सिंह के कत्ल के बाद पुलिस को कातिलों के बारे में कोई सुराग नहीं मिला था।
दो सितंबर-95 को सीबीआई के डायरेक्टर ने अखबारों में विज्ञापन दिया कि आरोपियों को पकड़वाने वाले को दस लाख रुपये का ईनाम दिया जाएगा। तब उसने इस कांड में इस्तेमाल की गई अंबेसडर कार को सरकारी गाड़ी की तरह तैयार करने वाले लखविंदर सिंह के बारे में पुलिस को जानकारी दी। वह पंजाब पुलिस का ही मुलाजिम था।
उसने पुलिस के साथ जाकर लखविंदर को गिरफ्तार करवाया था। इस केस से संबंधित कागजों पर उसने 350 बार दस्तखत किए थे। पर सीबीआई के अधिकारी अब यह कह रहे हैं कि आरोपियों को सीबीआई ने ही अपने सूत्रों के जरिए पकड़ा था। सुभाष कुमार ने बताय कि इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में केस भी लंबित है।
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ईनामी राशि केबारे में उन्होंने सीबीआई से आरटीआई के तहत जानकारी भी मांगी थी। जिसके जवाब में कहा गया कि वह राशि उन अधिकारियों को दे दी गई, जिन्होंने आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पर उन अधिकारियों केनाम नहीं बताए गए। बलविंदर ने कहा कि उसने इस मामले में अदालत में बयान भी दर्ज करवाए थे। पर सीबीआई उसे झूठा करार दे रही है।
पुलिस की मदद केचलते उसे लंबे समय तक खौफ में रहना पड़ा, सारा कारोबार ठप हो गया। कई साल तक उसने होमगार्ड के तौर पर मामूली वेतन पर काम किया। साल 2005 में उसे पुलिस में हेड कांस्टेबल की नौकरी मिली।
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दो सितंबर-95 को सीबीआई के डायरेक्टर ने अखबारों में विज्ञापन दिया कि आरोपियों को पकड़वाने वाले को दस लाख रुपये का ईनाम दिया जाएगा। तब उसने इस कांड में इस्तेमाल की गई अंबेसडर कार को सरकारी गाड़ी की तरह तैयार करने वाले लखविंदर सिंह के बारे में पुलिस को जानकारी दी। वह पंजाब पुलिस का ही मुलाजिम था।
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उसने पुलिस के साथ जाकर लखविंदर को गिरफ्तार करवाया था। इस केस से संबंधित कागजों पर उसने 350 बार दस्तखत किए थे। पर सीबीआई के अधिकारी अब यह कह रहे हैं कि आरोपियों को सीबीआई ने ही अपने सूत्रों के जरिए पकड़ा था। सुभाष कुमार ने बताय कि इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में केस भी लंबित है।
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ईनामी राशि केबारे में उन्होंने सीबीआई से आरटीआई के तहत जानकारी भी मांगी थी। जिसके जवाब में कहा गया कि वह राशि उन अधिकारियों को दे दी गई, जिन्होंने आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पर उन अधिकारियों केनाम नहीं बताए गए। बलविंदर ने कहा कि उसने इस मामले में अदालत में बयान भी दर्ज करवाए थे। पर सीबीआई उसे झूठा करार दे रही है।
पुलिस की मदद केचलते उसे लंबे समय तक खौफ में रहना पड़ा, सारा कारोबार ठप हो गया। कई साल तक उसने होमगार्ड के तौर पर मामूली वेतन पर काम किया। साल 2005 में उसे पुलिस में हेड कांस्टेबल की नौकरी मिली।