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Chandigarh News: गैस की दवा खा रहे हैं तो हो जाइए सावधान, किडनी फेल होने का खतरा
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चंडीगढ़। अगर आप गैस की परेशानी दूर करने के लिए प्रतिदिन दवा खा रहे हैं तो सावधान हो जाइए, क्योंकि गैस की गोली आपकी किडनी खराब कर सकती है। इतना ही नहीं, अगर 4 हफ्ते से ज्यादा इसका सेवन किया गया तो ये पेट के एसिड को भी खत्म कर देगी। इससे पेट में संक्रमण शुरू हो जाएगा। यह जानकारी पीजीआई गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. उषा दत्ता ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता में दी। उन्होंने बताया कि गैस की परेशानी पर काबू पाने के लिए ही इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ने गैस की दवाओं यानी पीपीआई के सेवन संबंधी गाइडलाइन जारी की है। उन्होंने बताया कि विश्व में अब तक इस संबंध में हुए विभिन्न शोधों के परिणाम में पाया गया है कि इस दवा का लंबे समय तक सेवन करने वालों में आयरन की कमी के साथ विटामिन बी 12 को बाधित करता है। वहीं, इसके सेवन से हम पेट में बनने वाले अच्छे एसिड को भी दबा देते हैं इसलिए इस संबंध में गाइडलाइन जारी करना जरूरी हो गया था।
विभाग के डॉ. विशाल ने बताया कि प्रोटॉन पंप अवरोधक (पीपीआई) तीन दशकों से अधिक समय से उपलब्ध है और सबसे अधिक निर्धारित दवाओं में से हैं। यह विभिन्न प्रकार के गैस्ट्रिक एसिड से संबंधित विकारों के इलाज में प्रभावी है। ये स्वतंत्र रूप से उपलब्ध है और वर्तमान साक्ष्यों के आधार पर, अनुचित संकेतों और अवधि के लिए पीपीआई का उपयोग आम प्रतीत होता है। पिछले कुछ वर्षों में पीपीआई की सुरक्षा पर चिंताएं जताई गई हैं क्योंकि वे कई प्रतिकूल प्रभावों से जुड़े हुए हैं। इसलिए, उचित संकेत और अवधि के लिए पीपीआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पीपीआई प्रबंधन की आवश्यकता है। इस उद्देश्य से इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ने पीपीआई के तर्कसंगत उपयोग पर दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। इसमें विभाग की प्रो. उषा दत्ता के मार्गदर्शन में काम किया गया है। इस विश्लेषण को इंडियन जरनल ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में जून 2023 में प्रकाशित किया गया है। प्रो. उषा दत्ता इस जरनल की संपादक है।
इनसेट-
पीपीआई ड्रग आप भी जान लें
प्रोटॉन-पंप अवरोधक (पीपीआई) दवाओं के एक वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो एसिड से संबंधित विकारों में उनके उपयोग के लिए सबसे प्रमुख रूप से जाने जाते हैं। ओमेप्राज़ोल, इस वर्ग से संबंधित दवा। सामान्य तौर पर, माना जाता है कि पीपीआई के कुछ प्रतिकूल प्रभाव होते हैं। मरीजों को सिरदर्द, दाने, चक्कर आना, मतली, पेट दर्द, पेट फूलना, कब्ज और दस्त सहित गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण होते हैं।
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इनसेट-
गैस की दवा दे सकती है ये मर्ज
गैस की दवा बोन फ्रेक्चर, हाइपोमैग्नीसिमिया, विटामिन बी 12 और आयरन डिफीशिएंसी, पेट संबंधी संक्रमण, एक्यूट इंट्रस्टाइनल नेफ्रैटिस जैसे मर्ज का कारण बन सकती है। पीपीआई तीव्र अंतरालीय नेफ्रैटिस को ट्रिगर कर सकता है, जो एक संभावित गंभीर प्रतिकूल घटना है, जो आमतौर पर तीव्र गुर्दे की चोट से जुड़ी होती है। अध्ययनों से पता चला है कि पीपीआई के लंबे समय तक उपयोग से क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) का खतरा बढ़ सकता है।
कोट-
गैस की परेशानी को दूर करने के लिए लोग बिना डॉक्टर के सलाह के महीनों पीपीआई मेडिसिन का सेवन कर रहे हैं। यह बेहद घातक है क्योंकि इससे पेट में संक्रमण हाेने के साथ किडनी पर भी दुष्प्रभाव पड़ने का खतरा रहता है इसलिए इस संबंध में अब तक विश्वभर में हुए प्रमुख शोध का विश्लेषण कर दिशा-निर्देश तैयार किया गया है।
-प्रो. उषा दत्ता, प्रमुख गैस्ट्रोएंटरोलॉजी पीजीआई
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विभाग के डॉ. विशाल ने बताया कि प्रोटॉन पंप अवरोधक (पीपीआई) तीन दशकों से अधिक समय से उपलब्ध है और सबसे अधिक निर्धारित दवाओं में से हैं। यह विभिन्न प्रकार के गैस्ट्रिक एसिड से संबंधित विकारों के इलाज में प्रभावी है। ये स्वतंत्र रूप से उपलब्ध है और वर्तमान साक्ष्यों के आधार पर, अनुचित संकेतों और अवधि के लिए पीपीआई का उपयोग आम प्रतीत होता है। पिछले कुछ वर्षों में पीपीआई की सुरक्षा पर चिंताएं जताई गई हैं क्योंकि वे कई प्रतिकूल प्रभावों से जुड़े हुए हैं। इसलिए, उचित संकेत और अवधि के लिए पीपीआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पीपीआई प्रबंधन की आवश्यकता है। इस उद्देश्य से इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ने पीपीआई के तर्कसंगत उपयोग पर दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। इसमें विभाग की प्रो. उषा दत्ता के मार्गदर्शन में काम किया गया है। इस विश्लेषण को इंडियन जरनल ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में जून 2023 में प्रकाशित किया गया है। प्रो. उषा दत्ता इस जरनल की संपादक है।
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पीपीआई ड्रग आप भी जान लें
प्रोटॉन-पंप अवरोधक (पीपीआई) दवाओं के एक वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो एसिड से संबंधित विकारों में उनके उपयोग के लिए सबसे प्रमुख रूप से जाने जाते हैं। ओमेप्राज़ोल, इस वर्ग से संबंधित दवा। सामान्य तौर पर, माना जाता है कि पीपीआई के कुछ प्रतिकूल प्रभाव होते हैं। मरीजों को सिरदर्द, दाने, चक्कर आना, मतली, पेट दर्द, पेट फूलना, कब्ज और दस्त सहित गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण होते हैं।
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गैस की दवा दे सकती है ये मर्ज
गैस की दवा बोन फ्रेक्चर, हाइपोमैग्नीसिमिया, विटामिन बी 12 और आयरन डिफीशिएंसी, पेट संबंधी संक्रमण, एक्यूट इंट्रस्टाइनल नेफ्रैटिस जैसे मर्ज का कारण बन सकती है। पीपीआई तीव्र अंतरालीय नेफ्रैटिस को ट्रिगर कर सकता है, जो एक संभावित गंभीर प्रतिकूल घटना है, जो आमतौर पर तीव्र गुर्दे की चोट से जुड़ी होती है। अध्ययनों से पता चला है कि पीपीआई के लंबे समय तक उपयोग से क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) का खतरा बढ़ सकता है।
कोट-
गैस की परेशानी को दूर करने के लिए लोग बिना डॉक्टर के सलाह के महीनों पीपीआई मेडिसिन का सेवन कर रहे हैं। यह बेहद घातक है क्योंकि इससे पेट में संक्रमण हाेने के साथ किडनी पर भी दुष्प्रभाव पड़ने का खतरा रहता है इसलिए इस संबंध में अब तक विश्वभर में हुए प्रमुख शोध का विश्लेषण कर दिशा-निर्देश तैयार किया गया है।
-प्रो. उषा दत्ता, प्रमुख गैस्ट्रोएंटरोलॉजी पीजीआई