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हादसे में घायल हुए थे पवन, मरने से पहले 4 को दे गए नई जिंदगी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 16 May 2016 12:01 PM IST
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यमुनानगर के पवन कुमार ने किया देहदान
- फोटो : अमर उजाला
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यमुनानगर के पवन कुमार हादसे में घायल हो गए थे, लेकिन दम तोड़ने से पहले वे 4 लोगों को नई जिंदगी दे गए। पवन की इच्छानुसार, उनकी दोनों आंखें सुरक्षित रख दी गईं हैं, जबकि दोनों किडनियों को ट्रांसप्लांट कर दिया गया है। पीजीआई ने माना कि पवन कुमार के परिवार ने एक मुश्किल समय में साहस से भरा फैसला लिया है। आर्गन डोनेशन से न सिर्फ चार लोगों को जिंदगी मिली, बल्कि समाज के सामने एक उदाहरण भी प्रस्तुत किया है। पीजीआई के लगातार प्रयास से समाज में जागरूकता फैल रही है।
पवन कुमार यमुनानगर के रहने वाले थे। वे छछरौली में एजुकेशन डिपार्टमेंट में कार्यरत थे। सात मई को जब वे बाइक से जा रहे थे, तभी एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में पवन कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। आनन-फानन में उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। आठ मई को उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया। पीजीआई के डाक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए जी-जान लगा दी, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। वीरवार शाम 7.30 बजे उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। बाकी अंग उनके काम कर रहे थे।
पीजीआई के ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने पवन कुमार के परिवार को आर्गन डोनेशन के बारे में समझाया। इस मुश्किल समय में किसी परिवार को आर्गन डोनेशन के बारे में समझाना और उन्हें डोनेशन के लिए तैयार करना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने अपने काम को बखूबी निभाया। पवन कुमार की फेमिली निरंकारी बाबा की फालोवर है। बाबा अपने अनुयायियों को अंगदान के प्रति जागरूक करते हैं, इसलिए पवन कुमार की फेमिली भी आर्गन डोनेशन के लिए तैयार हो गई।
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परिजनों की स्वीकृति मिलने के बाद पीजीआई के डाक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक उनकी किडनी और आंखें निकाल लीं। लीवर और हार्ट में दिक्कत थी, इसलिए उन्हें नहीं निकाला गया। परिजनों ने बताया कि पवन कुमार बहुत ही दयालु इंसान थे। वे हमेशा दूसरों की मदद करने पर विश्वास रखते थे। रीजनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (रोटो) के नोडल आफिसर विपिन कौशल ने बताया कि लोगों में आर्गन डोनेशन के प्रति जागरूकता फैल रही है। इससे जरूरतमंदों को नई जिंदगी मिल रही है।
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पवन कुमार यमुनानगर के रहने वाले थे। वे छछरौली में एजुकेशन डिपार्टमेंट में कार्यरत थे। सात मई को जब वे बाइक से जा रहे थे, तभी एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में पवन कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। आनन-फानन में उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। आठ मई को उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया। पीजीआई के डाक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए जी-जान लगा दी, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। वीरवार शाम 7.30 बजे उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। बाकी अंग उनके काम कर रहे थे।
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पीजीआई के ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने पवन कुमार के परिवार को आर्गन डोनेशन के बारे में समझाया। इस मुश्किल समय में किसी परिवार को आर्गन डोनेशन के बारे में समझाना और उन्हें डोनेशन के लिए तैयार करना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने अपने काम को बखूबी निभाया। पवन कुमार की फेमिली निरंकारी बाबा की फालोवर है। बाबा अपने अनुयायियों को अंगदान के प्रति जागरूक करते हैं, इसलिए पवन कुमार की फेमिली भी आर्गन डोनेशन के लिए तैयार हो गई।
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परिजनों की स्वीकृति मिलने के बाद पीजीआई के डाक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक उनकी किडनी और आंखें निकाल लीं। लीवर और हार्ट में दिक्कत थी, इसलिए उन्हें नहीं निकाला गया। परिजनों ने बताया कि पवन कुमार बहुत ही दयालु इंसान थे। वे हमेशा दूसरों की मदद करने पर विश्वास रखते थे। रीजनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (रोटो) के नोडल आफिसर विपिन कौशल ने बताया कि लोगों में आर्गन डोनेशन के प्रति जागरूकता फैल रही है। इससे जरूरतमंदों को नई जिंदगी मिल रही है।