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Chandigarh News: बैंक ने लोन बंद करने के लिए 4% राशि मांगी, देना होगा 3.67 लाख रुपये हर्जाना
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चंडीगढ। जिला उपभोक्ता आयोग ने एमएसएमई के दायरे में आने के बावजूद लोन भरने के बाद बैंक की ओर से फोरक्लोजर राशि लेने के मामले में सुनवाई करते हुए आईडीएफसी बैंक को सेवा में कोताही बरतने का दोषी करार दिया है। साथ ही बैंक को शिकायतकर्ता को 3.67 लाख रुपये हर्जाना देने का निर्देश दिया है। वहीं, मानसिक उत्पीड़न के लिए 15 हजार रुपये देने के लिए भी कहा है।
यह है मामला
किशनगढ़ स्थित गौरव एजेंसी के मालिक गौरव ने आयोग को शिकायत दी थी कि उसका बिजनेस एमएसएमई के अंतर्गत आता है। साल 2021 में आईडीएफसी बैंक लिमिटेड से कम ब्याज दर पर लोन लिया था। साथ हर फोरक्लोजर राशि न लेने की बात भी कहीं थी तो गौरव ने अपनी प्रॉपर्टी पर लोन लिया था। इसके बाद उसी साल जुलाई में दूसरा लोन जारी किया। इसके बाद जब शिकायतकर्ता ने चेक किया तो पाया कि बाकी बैंक इस बैंक से कम ब्याज वसूल रहे हैं। कई बार कहने के बावजूद संबंधित बैंक ने ब्याज कम नहीं किया। ऐसे में याचिकाकर्ता ने बैंक को दोनों लोन अकाउंट बंद करने के लिए कहा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं, लोन फोरक्लोजर के रूप में 4 प्रतिशत राशि की मांग की गई। इसके बाद एक्सिस बैंक की ओर से पूरे लोन के 96.70 लाख रुपये फोरक्लोजर चार्ज के साथ भर दिए गए। शिकायतकर्ता के मुताबिक ऐसे कोई चार्ज एमएसएमई फर्म से लेना मान्य नहीं था। ऐसे में गलत मांग करके 3.67 लाख रुपये अतिरिक्त वसूले गए हैं। मामले पर सुनवाई करते हुए आयोग ने बैंक को शिकायतकर्ता को हर्जाना के रूप में 3.67 लाख रुपये लौटाने का निर्देश दिया है। वहीं, मानसिक उत्पीड़न के लिए 15 हजार रुपये देने का निर्देश भी दिया है।
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यह है मामला
किशनगढ़ स्थित गौरव एजेंसी के मालिक गौरव ने आयोग को शिकायत दी थी कि उसका बिजनेस एमएसएमई के अंतर्गत आता है। साल 2021 में आईडीएफसी बैंक लिमिटेड से कम ब्याज दर पर लोन लिया था। साथ हर फोरक्लोजर राशि न लेने की बात भी कहीं थी तो गौरव ने अपनी प्रॉपर्टी पर लोन लिया था। इसके बाद उसी साल जुलाई में दूसरा लोन जारी किया। इसके बाद जब शिकायतकर्ता ने चेक किया तो पाया कि बाकी बैंक इस बैंक से कम ब्याज वसूल रहे हैं। कई बार कहने के बावजूद संबंधित बैंक ने ब्याज कम नहीं किया। ऐसे में याचिकाकर्ता ने बैंक को दोनों लोन अकाउंट बंद करने के लिए कहा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं, लोन फोरक्लोजर के रूप में 4 प्रतिशत राशि की मांग की गई। इसके बाद एक्सिस बैंक की ओर से पूरे लोन के 96.70 लाख रुपये फोरक्लोजर चार्ज के साथ भर दिए गए। शिकायतकर्ता के मुताबिक ऐसे कोई चार्ज एमएसएमई फर्म से लेना मान्य नहीं था। ऐसे में गलत मांग करके 3.67 लाख रुपये अतिरिक्त वसूले गए हैं। मामले पर सुनवाई करते हुए आयोग ने बैंक को शिकायतकर्ता को हर्जाना के रूप में 3.67 लाख रुपये लौटाने का निर्देश दिया है। वहीं, मानसिक उत्पीड़न के लिए 15 हजार रुपये देने का निर्देश भी दिया है।
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