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Chandigarh News: डीजी सेट पर रोक, गाड़ियों की आवाजाही कम करने के लिए पार्किंग के रेट दोगुना वसूलने का सुझाव

Tue, 12 Nov 2024 03:23 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 12 Nov 2024 03:23 AM IST
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Ban on DG sets, suggestion to charge double the parking rate to reduce vehicle movement
चंडीगढ़। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) की टास्क फोर्स की सोमवार को आपात बैठक हुई। टास्क फोर्स ने डीजी सेट पर रोक लगाने, वाहनों की संख्या कम करने के लिए पार्किंग शुल्क दोगुना करने और सड़कों पर धूल को नियंत्रित करने के लिए 12 घंटे एंटी-स्मॉग गन चलाने जैसे अहम कदम सुझाए। टास्क फोर्स ने नगर निगम व अन्य विभागों को कई निर्देश भी जारी किए हैं। बैठक की अध्यक्षता चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति (सीपीसीसी) के सदस्य सचिव ने की, जिसमें नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस और उद्योग विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चंडीगढ़ के बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रैप के तहत अनेक उपायों पर विचार किया गया। इनमें पराली जलाना, विभिन्न मार्केटों में लगने वाले जाम, पटाखों का जलना और तापमान में गिरावट जैसे मुद्दे शामिल थे। वर्तमान में शहर की वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 301 से 400 के बीच है, जो ‘बहुत खराब’ की श्रेणी में आता है। वाहनों की आवाजाही को कम करने के लिए पार्किंग शुल्क को दोगुना करने का सुझाव दिया है। इस कदम का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने और निजी वाहनों के उपयोग को सीमित करने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे सड़कों पर भीड़भाड़ और प्रदूषण में कमी आ सके।
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टास्क फोर्स ने शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कुछ उपायों को तुरंत लागू करने का फैसला लिया। तय हुआ कि निगम रात में सड़कों की धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव करेगी। बिना पानी छिड़के किसी भी तरह की मैनुअल और मैकेनिकल सफाई नहीं की जाएगी, ताकि धूल हवा में न फैल सके। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए टास्क फोर्स ने पत्तियों और अन्य कचरे को खुले में जलाने पर सख्त प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम सख्त निगरानी रखेगा ताकि कचरे के जलने से उत्पन्न धुएं से वायु प्रदूषण को कम किया जा सके। निर्माण स्थलों पर ग्रीन नेट्स, बार-बार पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन का उपयोग अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर निर्माण गतिविधियों को रोक दिया जाएगा। सड़कों के किनारे पेड़ों पर जमी धूल को हटाने के लिए एंटी-स्मॉग गन का उपयोग किया जाएगा। ये मशीनें प्रतिदिन कम से कम 12 घंटे चलाई जाएंगी। सड़कों के किनारे की मिट्टी न उड़े, इसके लिए फैसला किया गया कि मिट्टी को पौधरोपण के माध्यम से ढंका जाएगा।
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पीजीआई, पेक और पीयू को भी एंटी-स्मॉग गन चलाने के निर्देश
डीजी सेट का उपयोग केवल आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं में ही किया जाएगा। अन्य स्थितियों में डीजी सेट चलाने के लिए सीपीसीसी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। नियम का उल्लंघन करने पर डीजी सेट को सील करने की कार्रवाई की जाएगी। पीजीआई, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) और पंजाब यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए एंटी-स्मॉग गन का उपयोग किया जाएगा। ट्रैफिक पुलिस स्कूलों के बाहर और व्यस्त चौराहों पर ट्रैफिक जाम को रोकने के लिए एकतरफा यातायात पर विचार करेगी। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा और सार्वजनिक जागरूकता के लिए स्मार्ट सिटी जंक्शनों पर ऑडियो मैसेज प्रसारित किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य परामर्श जारी करने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि नागरिकों को वायु प्रदूषण के संभावित खतरों के प्रति सचेत किया जा सके।
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शहर में सेक्टर-22, 25 और 53 में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन लगे हुए हैं। सोमवार को शाम 7 बजे सेक्टर-22 में एक्यूआई 335, सेक्टर-25 में 317 तो सेक्टर-53 में 341 दर्ज किया गया। पिछले तीन दिनों से एक्यूआई 350 के करीब दर्ज किया जा रहा है। प्रदूषण का असर ऐसा है कि अब रात के समय स्मॉग की हल्की परत भी देखी जाने लगी है। प्रदूषण का यह स्तर लंबे समय तक रहने पर स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। जहरीली हवा में मौजूद छोटे-छोटे प्रदूषण के कण सांस के माध्यम से फेफड़ों में पहुंच जाते हैं जिससे सांस लेने में परेशानी, खांसी, गले और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
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