बालटाल हिंसा: दिल्ली में 500 हिरासत में
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बालटाल में भंडारों में हुई आगजनी की घटना के विरोध में श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन (एसएबीएलओ) के बैनर तले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे करीब 500 शिवभक्तों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए शिवभक्तों में करीब 60 लोग चंडीगढ़ के गौरी शंकर दल सेवा भंडारा कमेटी के हैं।
हिरासत में लिए शिवभक्तों में कमेटी प्रधान सुनील कुमार, चेयरमैन अजय गुप्ता, प्रवक्ता अवनीश बंसल, दिनेश कांसल, सुमित शर्मा्र अमित मित्तल, मोहित बंसल समेत अन्य लोग शामिल हैं। शिवभक्तों का ये अनिश्चितकालीन रोष प्रदर्शन कल से जंतर-मंतर पर शुरू हुआ था।
पार्लियामेंट्री स्टेट थाने में शिवभक्त
दिल्ली पुलिस ने दोपहर करीब दो से अढ़ाई बजे के बीच ये कार्रवाई की। हिरासत में लिए सदस्यों को पार्लियामेंट्री स्टेट थाने में रखा गया है।
एसएबीएलओ के प्रधान विजय ठाकुर और महासचिव राजन गुप्ता का कहना है कि आर्गेनाइजेशन की मांग है कि हमेशा के लिए श्री अमरनाथ यात्रा की कमान पैरा मिलिट्री फोर्स के हाथों में सौंपी जाए और यात्रा में जेएंडके पुलिस का कोई हस्तक्षेप न हो। ये प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।
ये है मुख्य मामला
भंडारे वाले यहां पर लंगर लगाकर देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं की मुफ्त में सेवा करते हैं। पिछले कई सालों से उन्हें जेएंडके सरकार सब्सिडी पर राशन दे रही थी लेकिन दो साल से इसे बंद कर दिया। उस पर भी हमने आपत्ति नहीं जताई। लेकिन इस साल की यात्रा में जेएंडके पुलिस के सामने कश्मीरियों ने नौ भंडारे फूंक दिए।
कश्मीरी चाहते हैं कि यहां पर लंगर न लगे और वो श्रद्धालुओं के साथ लूटपाट करें। ठाकुर ने कहा कि पिछली यात्राओं में नूनवन और शेषनाग में विस्फोट हुआ था लेकिन यात्रा प्रभावित नहीं हुई। लोगों को जोश और बढ़ गया था। भंडारे फूंकने से नुकसान जरूर हुआ है लेकिन वे लंगर बंद नहीं करेंगे।
ठाकुर ने कहा कि दिल्ली में जेएंडके सरकार और सोई हुई केंद्रीय सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा। उनकी मांग है कि श्री अमरनाथ यात्रा की कमान पैरा मिलिट्री फोर्स के हाथों में सौंपी जाए। जब तक उनकी ये मांग पूरी नहीं होगी दिल्ली में रोष प्रदर्शन जारी रहेगा।
ठाकुर ने कहा कि श्रद्धालु लंगर वालों के भरोसे यात्रा करने के लिए आ रहे हैं। श्रद्धालु लंगर को अपना परिवार समझते हैं। उनको कश्मीरियों के हवाले नहीं छोड़ सकते। भंडारे जलने के बाद भी लंगर जारी रखे हैं।