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सियासतः दोआबा में प्रतिनिधित्व न मिलने से वाल्मीकि समाज खफा, 2017 में बढ़ीं कांग्रेस से दूरियां

Mon, 13 Jul 2020 11:42 AM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, जालंधर
सुरिंदर पाल, जालंधर Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 13 Jul 2020 11:42 AM IST
सार

  • लोकसभा चुनावों में भी आरक्षित सीटों में से एक भी टिकट नहीं मिला था
  • 2017 में वाल्मीकि समाज के वोट के कारण सत्ता में आई कांग्रेस से बढ़ी दूरी

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Balmiki Samaj Angry to Congress due to no Representation in Doaba, Punjab Politics
कैप्टन अमरिंदर सिंह

विस्तार

2017 में वाल्मीकि समाज की वोट लेकर पंजाब की सत्ता हासिल करने वाली कांग्रेस सरकार की तरफ से दोआबा में किसी भी वाल्मीकि समाज के नेता को प्रतिनिधित्व न दिये जाने से समुदाय के अंदर नाराजगी भारी पड़ने लगी है। कांग्रेस की परंपरागत वोट बैंक की नाराजगी को लेकर दोआबा में अकाली दल और आप ने तेजी से सक्रियता बढ़ा दी है, ताकि कांग्रेस से खिसकने वाले वोट बैंक को लपक लिया जाये।
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हाल ही में शिअद सुप्रीमो सुखबीर बादल व आप नेता हरपाल चीमा ने इस पर अपनी अपनी टीम को टिप्स देकर मैदान में उतार दिया है। दोनों पार्टी नेताओं ने दोआबा के वाल्मीकि समाज के प्रमुख नेताओं से मीटिंग का सिलसिला अंदरखाते शुरू कर दिया गया है। 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले टिकट वितरण में जातीय संतुलन न बैठने के कारण वाल्मीकि, मजहबी सिख समाज नाराज हे गया था।
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दोआबा की कुल आबादी में 37 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति की है। इनमें रविदास बिरादरी और वाल्मीकि-मजहबी सिख समाज प्रमुख हैं। 2002 में दोआबा के एससी वोट बैंक ने कांग्रेस का साथ दिया तो पार्टी ने सरकार बनाई। लेकिन 2007 और 2012 में यह वोट बैंक कांग्रेस से टूटकर अकाली दल भाजपा की तरफ चला गया, तो पार्टी भी सत्ता से दूर हो गई। दोनों चुनावों में दोआबा में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। इस कारण कैप्टन सत्ता से दूर रहे।
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दोआबा की सीटों पर वाल्मीकि समाज का गहरा प्रभाव

2017 में फिर दोआबा के दलित वोट बैंक ने कांग्रेस पर भरोसा जताया तो वह सत्ता में आ गई। वाल्मीकि समाज ने 2017 में कांग्रेस का साथ दिया, लेकिन सत्ता मिलने के बाद कांग्रेस ने दोआबा के वाल्मीकि समाज को कुछ नहीं दिया। दोआबा की सीटों पर वाल्मीकि समाज का गहरा प्रभाव है और कई सीटों की जीत-हार वाल्मीकि समाज का वोट ही तय करता है।

कांग्रेस सरकार की तरफ से दोआबा के वाल्मीकि समाज को प्रतिनिधित्व न दिये जाने से पार्टी में इसका विरोध भी शुरू हो चुका है। पार्टी के कद्दावर नेताओं ने अपनी बात कैप्टन अमरिंदर सिंह तक पहुंचा दी है कि वाल्मीकि समाज को अगर उनकी हिस्सेदारी सरकार में नहीं दी गई तो 2022 में नुकसान हो सकता है।

कांग्रेस सरकार की तरफ से वाल्मीकि समाज के डॉ. राजकुमार वेरका को पंजाब वेयर हाउस कारपोरेशन का चेयरमैन बनाकर समुदाय की नाराजगी खत्म करने की कोशिश की गई थी, लेकिन वेरका माझा इलाके से हैं। दोआबा के नेता अपनी हिस्सेदारी मांग रहे हैं। नेताओं ने दबी जुबान से कहना शुरू कर दिया है कि हम किसी का हक नहीं मांग रहे, लेकिन हमारा हक छीना जा रहा है तो हम क्या करें? हमें कोई अन्य विकल्प तलाशना ही होगा।
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