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स्कूलों को राहत नहीं, केंद्र ने कहा- चंडीगढ़ को है पंजाब के एक्ट में संशोधन का पूरा अधिकार
Thu, 18 Jun 2020 12:36 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 18 Jun 2020 12:36 PM IST
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा निजी स्कूलों से अपनी बैलेंस शीट वेबसाइट पर अपलोड करने संबंधी आदेश के खिलाफ़ याचिका पर केंद्र सरकार ने भी चंडीगढ़ प्रशासन का बचाव किया है। केंद्र सरकार ने कहा कि उसके पास यह अधिकार है कि वह किसी भी एक्ट में संशोधन के साथ लागू कर सकती है। ऐसे में निजी स्कूलों की दलील कि पंजाब के एक्ट में बदलाव कर इसे चंडीगढ़ में लागू करना गलत है, वह इस दलील से इत्तेफाक नहीं रखता है।
केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन ने कहा कि जब निजी स्कूल छात्रों के अभिभावकों से ली गई फीस पर ही चलते हैं तो अभिभावकों को यह अधिकार है कि वह स्कूल की बैलेंस शीट देख सकें। जैन ने कहा कि अब निजी स्कूल इंडस्ट्री की तरह बनते जा रहे हैं, ऐसे में इन पर लगाम लगाना जरूरी है। जहां तक केंद्र के एक्ट में संशोधन और बदलाव की बात है, केंद्र के पास इसका अधिकार है।
बुधवार को याचिकाकर्ता संस्था की ओर से सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पंजाब के 2016 के एक्ट को ही केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ में 2018 में लागू किया है। मूल एक्ट में कहीं भी बैलेंस शीट वेबसाइट पर अपलोड किए जाने का प्रावधान नहीं है । लेकिन शहर में इस एक्ट में बदलाव कर यह प्रावधान बना दिया गया जो पूरी तरह से गलत है। ऐसे में स्कूलों को बैलेंस शीट अपनी वेबसाइट पर अपलोड किए जाने के आदेशों पर रोक लगाई जाए।
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दो साल पहले बनाया था प्रावधान, अब दे रहे चुनौती
जस्टिस जसवंत सीवम जस्टिस संत प्रकाश की खंडपीठ ने सभी दलीलों को सुनने के बाद निजी स्कूलों को फ़िलहाल कोई राहत नहीं दी और कहा कि वह अब इस पूरे मामले का निपटारा करेंगे कि चंडीगढ़ प्रशासन के यह आदेश सही हैं या नहीं। वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन गत दिवस ही मामले में अपना जवाब दायर कर कह चुका है कि बैलेंस शीट अपलोड किए जाने का दो वर्ष पहले ही प्रावधान बनाया जा चूका है जिसे निजी स्कूल अब जाकर चुनौती दे रहे हैं, जो सही नहीं है।
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केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन ने कहा कि जब निजी स्कूल छात्रों के अभिभावकों से ली गई फीस पर ही चलते हैं तो अभिभावकों को यह अधिकार है कि वह स्कूल की बैलेंस शीट देख सकें। जैन ने कहा कि अब निजी स्कूल इंडस्ट्री की तरह बनते जा रहे हैं, ऐसे में इन पर लगाम लगाना जरूरी है। जहां तक केंद्र के एक्ट में संशोधन और बदलाव की बात है, केंद्र के पास इसका अधिकार है।
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बुधवार को याचिकाकर्ता संस्था की ओर से सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पंजाब के 2016 के एक्ट को ही केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ में 2018 में लागू किया है। मूल एक्ट में कहीं भी बैलेंस शीट वेबसाइट पर अपलोड किए जाने का प्रावधान नहीं है । लेकिन शहर में इस एक्ट में बदलाव कर यह प्रावधान बना दिया गया जो पूरी तरह से गलत है। ऐसे में स्कूलों को बैलेंस शीट अपनी वेबसाइट पर अपलोड किए जाने के आदेशों पर रोक लगाई जाए।
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दो साल पहले बनाया था प्रावधान, अब दे रहे चुनौती
जस्टिस जसवंत सीवम जस्टिस संत प्रकाश की खंडपीठ ने सभी दलीलों को सुनने के बाद निजी स्कूलों को फ़िलहाल कोई राहत नहीं दी और कहा कि वह अब इस पूरे मामले का निपटारा करेंगे कि चंडीगढ़ प्रशासन के यह आदेश सही हैं या नहीं। वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन गत दिवस ही मामले में अपना जवाब दायर कर कह चुका है कि बैलेंस शीट अपलोड किए जाने का दो वर्ष पहले ही प्रावधान बनाया जा चूका है जिसे निजी स्कूल अब जाकर चुनौती दे रहे हैं, जो सही नहीं है।