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'बादल' परिवार के खिलाफ आवाज उठाई तो पार्टी से बाहर, वर्चस्व कायम रखना चाहते हैं सुखबीर

Wed, 05 Feb 2020 01:04 PM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 05 Feb 2020 01:04 PM IST
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Badal Family Willing to Control Akali Dal Punjab Always, Sukhbir Badal
सुखबीर बादल
शिरोमणि अकाली दल पर बादल परिवार ने अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए हर उस नेता को चलता किया है, जिसने उनके खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की है। सुखदेव सिंह ढींढसा या परमिंदर सिंह ढींढसा पहले नेता नहीं है, जिनको पार्टी से निकाला गया हो, इससे पहले कई दिग्गजों को पार्टी से चलता किया गया है।
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2001 में जत्थेदार गुरुचरण सिंह टोहरा ने बादल दल के विरुद्ध विद्रोह कर सर्वहिंद अकाली दल का गठन किया था। एसजीपीसी के प्रधान थे लेकिन उन्होंने बादल परिवार के खिलाफ बगावती सुर उठाया तो पार्टी ने उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद दोआबा के दमदार अकाली नेता कुलदीप सिंह वडाला ने बादल परिवार के खिलाफ आवाज उठाई तो पार्टी ने उनको भी बाहर का रास्ता दिखा दिया।
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2011 में सुखबीर बादल के चचेरे भाई और सीएम प्रकाश सिंह बादल के भतीजे मनप्रीत सिंह बादल ने जब आवाज उठाई तो उसको पार्टी से निकाल दिया गया। उनके साथ कैंट से तत्कालीन शिरोमणि अकाली दल के विधायक जगबीर सिंह बराड़ को भी निकाला गया।
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2017 के विधानसभा चुनाव से पहले पद्मश्री परगट सिंह पार्टी प्रधान सुखबीर बादल के खिलाफ मुखर हुए तो पार्टी ने उनको व विधायक रमिंदर सिंह बुलारिया को पार्टी से निकाल दिया। पार्टी के सीनियर नेता व कई बार विधायक रहे मास्टर सरवण सिंह फिल्लौर को आवाज उठाने की यह सजा मिली कि उनकी टिकट कट गई।

बाद में उनको पार्टी से निकाला गया। पार्टी की तरफ से 2018 में आवाज उठाने पर सीनियर नेता सांसद रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा, पूूर्व मंत्री सेवा सिंह सेखवां और रतन सिंह अजनाला को पार्टी से निकाला गया क्योंकि वह सुखबीर सिंह बादल की लीडरशिप पर सवाल खड़ा कर रहे थे।


इसके बाद नंबर लगा दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान मंजीत सिंह जीके का। हालांकि जीके पार्टी प्रधान सुखबीर के निकट माने जाते थे लेकिन जीके की उठी आवाज ने उसको पार्टी से चलता होने पर मजबूर कर दिया।
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