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बादलों का फोकसः बठिंडा टू अमृतसर वाया गुरदासपुर

Fri, 18 Apr 2014 03:44 PM IST
अनिल भारद्वाज/अमर उजाला, चंडीगढ़
अनिल भारद्वाज/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 18 Apr 2014 03:44 PM IST
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Badal Family Focus on Bathinda to Amritsar through Gurdaspur

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और यूथ अकाली दल प्रमुख बिक्रम मजीठिया का पूरा जोर बठिंडा, अमृतसर और गुरदासपुर सीटों पर लगा हुआ है। यूं तो बीच-बीच में ये दिग्गज अन्य 10 सीटों पर प्रचार के लिए भी जा रहे हैं, लेकिन उक्त सीटों पर तीनों अकाली दिग्गजों में से कोई न कोई रोजाना रहता ही है।

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मुख्यमंत्री बादल की बात करें तो वह एक दिन बादल बठिंडा और दूसरे दिन अमृतसर में दिखाई पड़ते हैं। यही हाल सुखबीर का है। वह गुरदासपुर पर भी बराबर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। वहां से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े रहे पीपीसीसी अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ सुखबीर रुटीन में बयान भी जारी करते रहते हैं।
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बिक्रम मजीठिया का सारा ध्यान गृह क्षेत्र होने की वजह से अमृतसर पर ही केंद्रित है। बीच-बीच में समय निकालकर वह माझा की दो अन्य सीटों गुरदासपुर और खडूर साहिब में भी प्रचार करने जा रहे हैं। फिलहाल तो जुबानी प्रचार पर ही इन नेताओं का ध्यान केंद्रित है, लेकिन आखिरी लम्हों में वार्ड-मोहल्ला स्तरीय माइक्रो लेवल मैनेजमेंट को अकाली दिग्गज अमल में लाएंगे।
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पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त से शुरू की गई इस नीति का सुखबीर बादल द्वारा एसजीपीसी, पंजाब विधानसभा, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, मोगा, दसूहा, पंजाब नगर निगम, पंचायत तथा दिल्ली विधानसभा चुनावों में भी इस्तेमाल किया जा चुका है।

बठिंडा में एड़ी चोटी का जोर

Badal Family Focus on Bathinda to Amritsar through Gurdaspur

बठिंडा से प्रकाश सिंह बादल की पुत्रवधू, सुखबीर की पत्नी और मजीठिया की बड़ी बहन हरसिमरत कौर बादल शिअद-भाजपा गठबंधन की उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला सुखबीर के चचेरे भाई और कांग्रेसी उम्मीदवार मनप्रीत सिंह बादल से है।

बादल-मजीठिया को किसी भी हालत में वहां हार मंजूर नहीं, इसलिए हर कोशिश जीत के लिए की जा रही है। बीते लोकसभा चुनाव में बठिंडा से हरसिमरत के मुकाबले कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेटे रणइंदर सिंह मैदान में थे। उस समय भी बादलों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था और करीब सवा लाख वोट से जीत हासिल की थी।

इस बार भी बादल गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले जा रहे हैं। बादल-मजीठिया परिवार बड़े-बड़े दावे भी कर रहा है, लेकिन नतीजा वहां के मतदाता तय करेंगे। जहां तक कंपेनिंग का सवाल है, दोनों ही तरफ से जबरदस्त प्रचार जारी है।

अमृतसर में हर जुगाड़

Badal Family Focus on Bathinda to Amritsar through Gurdaspur

अमृतसर से भाजपा प्रत्याशी अरुण जेटली के पक्ष में प्रचार की कमान बिक्रम मजीठिया ने संभाल रखी है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल बठिंडा से समय निकालकर यहां रुटीन में प्रचार करने आ रहे हैं। वह अरुण जेटली की जीत को अपनी व पंजाब की जीत करार देते हुए कहते हैं कि जेटली जीते, तो इसका पंजाब को बहुत लाभ होगा।

साथ ही कहते हैं कि केंद्र में एनडीए सरकार बनने पर जेटली प्रभावशाली मंत्री होंगे और पंजाब को पैसे की कोई कमी नहीं आएगी। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने बीते दिन अमृतसर लोकसभा क्षेत्र में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अरुण जेटली भाजपा के इतने बड़े नेता हैं कि वह देश में कहीं से भी खड़े हो जाते, तो आसानी से जीत जाते। वह जोर देकर जेटली को यहां लेकर आए, ताकि अमृतसर से उन्हें जीत मिले और पंजाब का भला हो।

यहां तक कह दिया कि जेटली पंजाब के नाती हैं, इसलिए उन्हें जिताना अमृतसर के लोगों फर्ज है। यानी शिरोमणि अकाली दल कोई भी कसर जेटली के प्रचार में नहीं छोड़ रहा है तथा इसका पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित हो गया है कि किसी भी तरह पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुकाबले यह सीट जीत ली जाए।

गुरदासपुर पर सुखबीर की पैनी नजर

Badal Family Focus on Bathinda to Amritsar through Gurdaspur

गुरदासपुर पर शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल खुद नजर रखे हुए हैं, क्योंकि यहां गठबंधन का मुकाबला पीपीसीसी प्रमुख प्रताप सिंह बाजवा से है। मजीठिया को माझा की तीनों सीटों का ख्याल रखने की जिम्मेदारी अलग से दी गई है।

चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद सुखबीर यहां कई चुनावी सभाओं को संबोधित कर चुके हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल गुरदासपुर में होंगे और सुखबीर शनिवार को फिर से यहां चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे।

आज हालत यह है कि गुरदासपुर हल्के के शिअद नेता व कार्यकर्ता इसे विनोद खन्ना नहीं, बल्कि अपना चुनाव मानते हुए काम कर रहे हैं। निशाना केवल एक ही है, बाजवा को हराना।

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