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सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, पहले ये पढ़ लें
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 17 Jul 2014 02:01 PM IST
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बेहतर हैल्थ सर्विस के लिए जाने जाते चंडीगढ़ के तीन प्रमुख सरकारी संस्थानों में मरीजों की हालत दयनीय है। अगर किसी मरीज को अल्ट्रासाउंड ही कराना हो तो इन संस्थानों में 40 से 90 दिन की वेटिंग चल रही है। एक मशीन एक दिन में 80 से 90 अल्ट्रासाउंड कर सकती है, जबकि एक पोर्टेबल मशीन की क्षमता 40 से 45 होती है।
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जीएमसीएच-32: अल्ट्रासाउंड के लिए 80 से 90 दिन की वेटिंग। संस्थान में कम से कम आठ से दस मशीने हैं। इनमें दो गायनी, एक सर्जरी व बाकी रेडियोडायग्नोसिस सेंटर में काम कर रही हैं। इमरजेंसी में अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं होने से बोझ बढ़ गया है।
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जीएमएसएच-16: अल्ट्रासाउंड के लिए करीब सवा महीने की वेटिंग। इमरजेंसी में अल्ट्रासाउंड की मशीने नहीं हैं। एक पूरे दिन में करीब 40 मरीजों के अल्ट्रासाउंड होते हैं।
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पीजीआई: करीब डेढ़ महीने की वेटिंग। ओपीडी, इमरजेंसी व ट्रामा सेंटर में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी रही है। संस्थान में 15 अल्ट्रासाउंड मशीन हैं, जो एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर, एडवांस ट्रामा सेंटर, ओपीडी व रेडियोडायग्नोसिस में हैं। इनमें पांच पोर्टेबल हैं।
वेटिंग कम करने के लिए प्रयास चल रहे हैं। जल्द ही इसका असर देखने को मिलेगा। हमारे पास डाक्टरों की कुछ कमी है। उसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
-प्रोफेसर अतुल सचदेवा, डायरेक्टर जीएमसीएच 32
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ओपीडी व अन्य जगहों पर मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अल्ट्रासाउंड की अब काफी कम वेटिंग हो गई है। आगे भी कम करने के लिए प्रयास चल रहे हैं।
मंजू वडवालकर, प्रवक्ता, पीजीआई