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Chandigarh News: ट्रॉमा और बर्न इंजरी की रोकथाम और प्रबंधन के लिए किया जाएगा जागरूक
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चंडीगढ़। पीजीआई में सोमवार को ट्रॉमा और बर्न पर बनाए नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के अंतर्गत पहले प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इसमें फैकल्टी सदस्यों और रेजिडेंट डॉक्टरों ने भाग लिया। भारत में सिर की चोट और जले हुए मरीजों की देखभाल को आगे बढ़ाने के उद्देश्य यह कार्यक्रम करवाया जा रहा है। यह सेंटर भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की एक पहल के तहत ट्रॉमा और जले हुए मरीजों की चोटों की रोकथाम एवं प्रबंधन कार्यक्रम (एनपीपीएमटीबीआई) के अंतर्गत स्थापित किया गया है।
निदेशक प्रो. विवेक लाल ने इस पहल को भारत के ट्रॉमा केयर सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने ट्रॉमा और जलने से होने वाली चोटों से होने वाली रोकथाम और मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों, मजबूत अंतर विभागीय समन्वय और राष्ट्रीय क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रो. लाल ने कहा कि एक शीर्ष स्वास्थ्य सेवा संस्थान के रूप में पीजीआई की जिम्मेदारी है कि वह इमरजेंसी देखभाल की तैयारियों में भूमिका निभाए। इस एक्सीलेंस सेंटर को न केवल कर्मियों को प्रशिक्षित करना चाहिए, बल्कि देश भर में ट्रॉमा सिस्टम के विकास के लिए मानक स्थापित करने चाहिए। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अतुल पाराशर ने कहा यह प्रशिक्षण एक राष्ट्रीय मिशन की शुरुआत है। हमारा लक्ष्य प्रत्येक पहले रिस्पोंडर को वह ज्ञान और कौशल देना है जो जीवन को संकट के समय बचा सके। पहले चरण में ही सेंटर ने काम करना शुरू कर दिया है।
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एनेस्थीसिया प्रोफेसर डॉ. निधि भाटिया ने बताया कि यह पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम जनरल सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स और एनेस्थीसिया के 60 रेजिडेंट डॉक्टरों के क्षमता निर्माण के लिए समर्पित है। ये विभाग ट्रॉमा और जलने की आपात स्थितियों में पहली लाइन की भूमिका निभाते हैं। प्रतिभागियों को रक्तबहाव नियंत्रण, मल्टीसिस्टम चोट प्रबंधन, प्रारंभिक जलन देखभाल समेत अन्य इंटरैक्टिव सत्रों में भाग लेना होगा। इसका उद्देश्य अच्छी तरह से प्रशिक्षित, उत्तरदायी और आत्मविश्वासियों का एक कैडर तैयार करना है।
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निदेशक प्रो. विवेक लाल ने इस पहल को भारत के ट्रॉमा केयर सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने ट्रॉमा और जलने से होने वाली चोटों से होने वाली रोकथाम और मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों, मजबूत अंतर विभागीय समन्वय और राष्ट्रीय क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।
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प्रो. लाल ने कहा कि एक शीर्ष स्वास्थ्य सेवा संस्थान के रूप में पीजीआई की जिम्मेदारी है कि वह इमरजेंसी देखभाल की तैयारियों में भूमिका निभाए। इस एक्सीलेंस सेंटर को न केवल कर्मियों को प्रशिक्षित करना चाहिए, बल्कि देश भर में ट्रॉमा सिस्टम के विकास के लिए मानक स्थापित करने चाहिए। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अतुल पाराशर ने कहा यह प्रशिक्षण एक राष्ट्रीय मिशन की शुरुआत है। हमारा लक्ष्य प्रत्येक पहले रिस्पोंडर को वह ज्ञान और कौशल देना है जो जीवन को संकट के समय बचा सके। पहले चरण में ही सेंटर ने काम करना शुरू कर दिया है।
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एनेस्थीसिया प्रोफेसर डॉ. निधि भाटिया ने बताया कि यह पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम जनरल सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स और एनेस्थीसिया के 60 रेजिडेंट डॉक्टरों के क्षमता निर्माण के लिए समर्पित है। ये विभाग ट्रॉमा और जलने की आपात स्थितियों में पहली लाइन की भूमिका निभाते हैं। प्रतिभागियों को रक्तबहाव नियंत्रण, मल्टीसिस्टम चोट प्रबंधन, प्रारंभिक जलन देखभाल समेत अन्य इंटरैक्टिव सत्रों में भाग लेना होगा। इसका उद्देश्य अच्छी तरह से प्रशिक्षित, उत्तरदायी और आत्मविश्वासियों का एक कैडर तैयार करना है।