विश्व तंबाकू निषेध दिवसः विशेषज्ञ बोलें-सिगरेट नहीं 15 मिनट जिंदगी पी रहे हैं लोग, ऐसे पाएं छुटकारा
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विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर अमर उजाला कार्यालय में विशेषज्ञों के एक पैनल ने तंबाकू और सिगरेट के सेवन से होने वाले दुष्प्रभाव पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। कार्यक्रम में पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एडिशनल प्रोफेसर डा. सोनू गोयल ने बताया कि एक सिगरेट पीना भी स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
कई रिसर्च स्टडीज में दावा किया गया है कि एक सिगरेट पीने से जिंदगी के 15 मिनट कम होते हैं। युवाओं में हुक्का पीने की दीवानगी बढ़ती जा रही। हुक्के का एक सेशन लेना करीब 40 सिगरेट पीने के बराबर है। एक सेशन 35 से 40 मिनट का होता है।
उन्होंने एक डाटा को शेयर करते हुए बताया कि सौ में सिर्फ एक फीसदी रिसर्च इस क्षेत्र में की जाती है। यदि एक फीसदी में पॉलिसी पर फोकस करती रिसर्च पर बात की जाए तो उसका प्रतिशत भी प्वाइंट में मिलेगा। उन्होंने कहा कि तंबाकू या स्मोकिंग का मुद्दा हेल्थ से जुड़ा नहीं है, बल्कि वह एक राजनीतिक मुद्दा है। इसमें देश के कई मंत्रालय जुड़े हैं।
कार्यक्रम में पहुंचे टोबैको एंड एनसीडी कंट्रोल के डिप्टी रीजनल डायरेक्टर डा. राणा जे सिंह ने बताया कि एक सर्वे के मुताबिक देश में 15 साल से ऊपर करीब 27 करोड़ लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। स्मोकिंग या तंबाकू के सीधे सेवन से ब्रेन स्ट्रोक से लेकर इंफर्टिलिटी के चांस रहते हैं।
सिगरेट के धुएं के संपर्क में आने से गर्भवती महिला के साथ उसके बच्चे के जीवन पर खतरा रहता है।अजन्मे बच्चे के फेफड़े विकसित नहीं हो पाते। इससे उसके दिमाग पर असर पड़ता है और कई बार जन्म के बाद उसकी अचानक से मृत्यु भी हो जाती है। उनके मुताबिक हुक्के में फ्लेवर्ड का इस्तेमाल होता है, ताकि लोगों को फ्लेवर्ड की महक से तंबाकू का पता न चल सके।
अजवाइन खाइए, तंबाकू की लत छूटेगी
वरदान आयुर्वेदिक एंड हर्बल मेडिसिन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर सुभाष गोयल ने बताया कि आयुर्वेद में तंबाकू व सिगरेट की लत छुड़वाने का नायाब तरीका है। वे अब तक चंडीगढ़ के कई लोगों से तंबाकू की लत छुड़वा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी को तंबाकू छोड़ना है तो वह अजवाइन का सेवन करें। एक बार अजवाइन खाने से व्यक्ति को तीन घंटे तक तंबाकू की तलब नहीं उठेगी। उन्होंने कहा कि सबसे पहले इंसान के अंदर किसी भी चीज को छोड़ने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए।
सिगरेट पीने वाले पढ़े-लिखे भी हैं और अनपढ़ भी
पीजीआई के मेडिकल सोशल वर्कर अतुल कुमार राय ने बताया कि सिगरेट पीने वाले पढ़े-लिखे भी हैं और अनपढ़ भी इसलिए किसी एक कैटेगिरी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि आपके बच्चे बाहर पढ़ने जा रहे हैं या हास्टल में रहते हैं तो उन्हें स्मोकिंग के खतरे के बारे में जरूर बताएं।
समय-समय पर फीडबैक लेते रहें। ग्रोवर आई हास्पिटल की डा. मीनाक्षी ने बताया कि सिगरेट के धुएं का असर आंखों पर भी पड़ता है। आजकल आंखों में ड्राइनेस, खुजली और एलर्जी की शिकायत काफी आ रही है। इसकी एक वजह सिगरेट का धुआं भी हो सकता है। अजन्मे बच्चे की ऑप्टिक नर्व डेवलप नहीं होती।