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Chandigarh News: जल्द ही विश्व धरोहर कालका-शिमला रेल लाइन पर दौड़ेगी स्वचलित मल्टीपल हाईड्रोलिक यूनिट
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अंबाला। विश्व धरोहर कालका-शिमला रेल सेक्शन पर जल्द ही शताब्दी की तर्ज पर नई और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित स्वचलित मल्टीपल हाईड्रोलिक यूनिट दौड़ती नजर आएगी। अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (आरडीएसओ) लखनऊ के विशेषज्ञों की टीम की ओर से किया पांचवां परीक्षण सफल हो गया है।अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इस कोच के लिए आगामी दो परीक्षण विशेष महत्वपूर्ण होंगे जोकि इस नई यूनिट को रेल खंड पर संचालन के लिए जरूरी हैं। इसकी तैयारी भी आरडीएसओ ने कर दी है और आगामी दो-तीन दिन में यह परीक्षण हो जाएगा। इसके बाद नई ट्रेन के संचालन के लिए दस्तावेज संबंधी कार्यवाही की जाएगी ताकि रेलवे इस ट्रेन के संचालन को समय सारिणी व किराए आदि का निर्धारण कर सके। ट्रेन के संचालन से पहले स्थानीय इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों को भी इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि छोटी-मोटी खामियों को वो अपने स्तर पर दुरुस्त कर सकें।
पुरानी ट्रेनों का बदलेगा स्वरूप
रेलवे ने नैरोगेज पर चलने वाली ट्रेनों के स्वरूप में बदलाव को लेकर योजना तैयार की थी ताकि विश्व धरोहर रेल खंडों की खूबसूरती बढ़ सके और सैलानियों को भी सुविधाओं से सुसज्जित ट्रेनों में सफर करने का मौका मिल सके। इसलिए रेलवे ने इंजन सहित दो कोच की इस विशेष यूनिट को तैयार किया था जोकि देखने मात्र से ही शताब्दी ट्रेन का एहसास दिलाती है। हालांकि दूसरी तरफ रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला में भी पेनोरमिक कोच तैयार किए गए हैं जोकि लाल रंग के हैं और ये कोच पुराने इंजनों के साथ चलने में सक्षम हैं।
फरवरी में हुआ था पहला ट्रायल
स्वचलित मल्टीपल हाइड्रोलिक यूनिट का पहला परीक्षा 18 दिसंबर को किया गया था जोकि कालका से धर्मपुर के बीच में था और यह सफल रहा था। इसके बाद अगला परीक्षण 19 दिसंबर को धर्मपुर से सोलन के बीच और तीसरा परीक्षण 20 दिसंबर को कालका से शिमला तक किया गया था जोकि पूर्ण तरह से सफल रहा था। चौथा परीक्षण भार क्षमता के साथ मई माह के दूसरे हफ्ते में किया गया था जोकि असफल रहा था।
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समय की होगी बचत
स्वचलित हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट 25 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने में सक्षम है जबकि मौजूदा समय में जो ट्रेनें चल रही हैं वो 20 से 22 किमी प्रतिघंटा रफ्तार से चल रही हैं। ट्रेन के तीन कोच में 61 यात्री सफर कर सकेंगे। पहले और अंतिम कोच में 19-19 और बीच वाले कोच में 23 यात्री बैठ सकेंगे। ट्रेन सेट में सुविधाजनक सीटों के साथ वाई-फाई, एसी, हीटर, एलईडी की भी सुविधा है। तीनों कोच आपस में जुड़े हैं और इससे एक से दूसरे कोच में भी आवागमन किया जा सकेगा।
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पुरानी ट्रेनों का बदलेगा स्वरूप
रेलवे ने नैरोगेज पर चलने वाली ट्रेनों के स्वरूप में बदलाव को लेकर योजना तैयार की थी ताकि विश्व धरोहर रेल खंडों की खूबसूरती बढ़ सके और सैलानियों को भी सुविधाओं से सुसज्जित ट्रेनों में सफर करने का मौका मिल सके। इसलिए रेलवे ने इंजन सहित दो कोच की इस विशेष यूनिट को तैयार किया था जोकि देखने मात्र से ही शताब्दी ट्रेन का एहसास दिलाती है। हालांकि दूसरी तरफ रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला में भी पेनोरमिक कोच तैयार किए गए हैं जोकि लाल रंग के हैं और ये कोच पुराने इंजनों के साथ चलने में सक्षम हैं।
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फरवरी में हुआ था पहला ट्रायल
स्वचलित मल्टीपल हाइड्रोलिक यूनिट का पहला परीक्षा 18 दिसंबर को किया गया था जोकि कालका से धर्मपुर के बीच में था और यह सफल रहा था। इसके बाद अगला परीक्षण 19 दिसंबर को धर्मपुर से सोलन के बीच और तीसरा परीक्षण 20 दिसंबर को कालका से शिमला तक किया गया था जोकि पूर्ण तरह से सफल रहा था। चौथा परीक्षण भार क्षमता के साथ मई माह के दूसरे हफ्ते में किया गया था जोकि असफल रहा था।
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समय की होगी बचत
स्वचलित हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट 25 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने में सक्षम है जबकि मौजूदा समय में जो ट्रेनें चल रही हैं वो 20 से 22 किमी प्रतिघंटा रफ्तार से चल रही हैं। ट्रेन के तीन कोच में 61 यात्री सफर कर सकेंगे। पहले और अंतिम कोच में 19-19 और बीच वाले कोच में 23 यात्री बैठ सकेंगे। ट्रेन सेट में सुविधाजनक सीटों के साथ वाई-फाई, एसी, हीटर, एलईडी की भी सुविधा है। तीनों कोच आपस में जुड़े हैं और इससे एक से दूसरे कोच में भी आवागमन किया जा सकेगा।