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चंडीगढ़ में ऑटो-कैब सेवा ठप्प, अब आपात बैठक से ही निकलेगा समाधान, ये हैं चालकों की मांगें
Wed, 05 Feb 2020 02:30 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Feb 2020 02:30 PM IST
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चंडीगढ़ में इस वक्त ऑटो और कैब का संकट चल रहा है। जो इक्का-दुक्का ऑटो चल रहे हैं, वे दोगुना किराया वसूल रहे हैं। कैब की बुकिंग भी नहीं हो रही है, क्योंकि ओला-ऊबर के मोबाइल एप से कैब गायब हैं। एप खोलने पर यही मैसेज दिखाई दे रहा है ‘नो कार अवेलेबल’। वहीं प्रशासन का सख्त रुख अभी भी बरकरार है।
मंगलवार को यूटी प्रशासन में बैठकों का दौर जारी रहा। कैब चालकों को लेकर एडवाइजर मनोज परिदा की अध्यक्षता में यूटी सचिवालय में एक बैठक हुई। बैठक में एडवाइजर परिदा ने कहा कि कैब चालकों को लंबित सरकारी राजस्व का भुगतान तो करना ही होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यूटी में प्रवेश शुल्क केवल 333 रुपये प्रति महीने है, जो पड़ोसी राज्यों की तुलना में बहुत कम है। पहले दो तिमाही का भुगतान 15 फरवरी तक और शेष 31 मार्च तक जमा कराने के आदेश दिए गए हैं।
इसके बाद परिवहन और यातायात विभाग स्पेशल ड्राइव चलाएगी जिसमें भुगतान न करने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा। वहीं एसटीए के सेक्रेटरी के साथ भी ऑटो चालक यूनियन की बैठक हुई। ऑटो यूनियन के प्रधान हरचरण सिंह ने बताया कि एसटीए सेक्रेटरी ने पंजाब और हरियाणा के उन आटो चालकों को अनुमति दी है, जो सभी नियमों को पूरा करते हैं। इसके साथ ही 11 फरवरी को इस संबंध में चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी की बैठक बुलाई गई है।
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मंगलवार को यूटी प्रशासन में बैठकों का दौर जारी रहा। कैब चालकों को लेकर एडवाइजर मनोज परिदा की अध्यक्षता में यूटी सचिवालय में एक बैठक हुई। बैठक में एडवाइजर परिदा ने कहा कि कैब चालकों को लंबित सरकारी राजस्व का भुगतान तो करना ही होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यूटी में प्रवेश शुल्क केवल 333 रुपये प्रति महीने है, जो पड़ोसी राज्यों की तुलना में बहुत कम है। पहले दो तिमाही का भुगतान 15 फरवरी तक और शेष 31 मार्च तक जमा कराने के आदेश दिए गए हैं।
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इसके बाद परिवहन और यातायात विभाग स्पेशल ड्राइव चलाएगी जिसमें भुगतान न करने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा। वहीं एसटीए के सेक्रेटरी के साथ भी ऑटो चालक यूनियन की बैठक हुई। ऑटो यूनियन के प्रधान हरचरण सिंह ने बताया कि एसटीए सेक्रेटरी ने पंजाब और हरियाणा के उन आटो चालकों को अनुमति दी है, जो सभी नियमों को पूरा करते हैं। इसके साथ ही 11 फरवरी को इस संबंध में चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी की बैठक बुलाई गई है।
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तीन किमी तक की राइड के मिलते हैं 44 रुपये, कैसे भरें हजारों का कर
पिछले 6 दिन से चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के कैब चालक धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन कैब चलाने वाली कंपनियों के पर कार्रवाई करने से बच रहा है और कैब चालकों को परेशान कर रहा है।
कैब ऑपरेशन सोशल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान हरविंदर सिंह ने बताया कि मोहाली की कारों का चंडीगढ़ में चालान हो रहा है और चंडीगढ़ की गाड़ियों का पंजाब और हरियाणा में। यही नहीं गाड़ियां जब्त भी की जा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कैब चालक को तीन एक राइड के 44 रुपये मिलते हैं, ऐसे में वे हजारों का कर कैसे अदा करेंगे। कंपनी ने पहले कहा था कि वह कर जमा करेगी लेकिन अब वह मुकर गई है। ऐसे में कैब चालक बहुत परेशान हैं।
यह है कैब चालकों की मांग
धरने पर बैठे कैब चालकों की मांग है कि पिछला चंडीगढ़ प्रशासन कंपनी से वसूले। टैक्स के दामों को अगर कम किया जाता है तो वह आगे से टैक्स देने के लिए तैयार हैं। साथ ही ट्राइसिटी का एक चार्ट बनाया जाए। ट्राइसिटी में कैब चलाने वालों के दाम तय किए जाएं।
ज्यादातर सवारियां चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली, जीरकपुर की होती हैं ऐसे में कैब चालकों को दिन में कई बार पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में दाखिल होना पड़ता है, इसलिए ट्राइसिटी का टैक्स कम होना चाहिए। विभिन्न यूनियनों का कहना है कि यह धरना ऐसे ही जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं।
ऑटो चालक भी घर बैठे, लोग हो रहे परेशान
यूटी प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में ट्राइसिटी के ज्यादातर ऑटो चालक भी घर बैठे हैं। इससे सवारियों को दिनभर भटकना पड़ा। मंगलवार को कई स्थानों पर लोग ऑटो रिक्शा के इंतजार में खड़े रहे, लेकिन कोई ऑटो नहीं मिला। ऐसे में लोग परेशान होकर निजी साधनों से या पैदल अपने स्थान तक गए। हिंद ऑटो रिक्शा वर्कर यूनियन के प्रेसिडेंट अनिल कुमार ने बताया कि पूरे कागज होने के बावजूद उन्हें शहर में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है।
पंचकूला के सभी ऑटो चालकों को सीएनजी गैस भरवाने के लिए चंडीगढ़ में ही आना पड़ता है। पंचकूला के आसपास लगभग 90 किलोमीटर के दायरे में कोई भी सीएनजी व एलपीजी फिलिंग स्टेशन नहीं है। इसकी वजह से वे मजबूरी में चंडीगढ़ के फिलिंग स्टेशन से गैस भराते हैं। ऐसे में उन्हें आने से रोका जाता है और ऑटो जब्त किए जा रहे हैं।
कैब ऑपरेशन सोशल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान हरविंदर सिंह ने बताया कि मोहाली की कारों का चंडीगढ़ में चालान हो रहा है और चंडीगढ़ की गाड़ियों का पंजाब और हरियाणा में। यही नहीं गाड़ियां जब्त भी की जा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कैब चालक को तीन एक राइड के 44 रुपये मिलते हैं, ऐसे में वे हजारों का कर कैसे अदा करेंगे। कंपनी ने पहले कहा था कि वह कर जमा करेगी लेकिन अब वह मुकर गई है। ऐसे में कैब चालक बहुत परेशान हैं।
यह है कैब चालकों की मांग
धरने पर बैठे कैब चालकों की मांग है कि पिछला चंडीगढ़ प्रशासन कंपनी से वसूले। टैक्स के दामों को अगर कम किया जाता है तो वह आगे से टैक्स देने के लिए तैयार हैं। साथ ही ट्राइसिटी का एक चार्ट बनाया जाए। ट्राइसिटी में कैब चलाने वालों के दाम तय किए जाएं।
ज्यादातर सवारियां चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली, जीरकपुर की होती हैं ऐसे में कैब चालकों को दिन में कई बार पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में दाखिल होना पड़ता है, इसलिए ट्राइसिटी का टैक्स कम होना चाहिए। विभिन्न यूनियनों का कहना है कि यह धरना ऐसे ही जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं।
ऑटो चालक भी घर बैठे, लोग हो रहे परेशान
यूटी प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में ट्राइसिटी के ज्यादातर ऑटो चालक भी घर बैठे हैं। इससे सवारियों को दिनभर भटकना पड़ा। मंगलवार को कई स्थानों पर लोग ऑटो रिक्शा के इंतजार में खड़े रहे, लेकिन कोई ऑटो नहीं मिला। ऐसे में लोग परेशान होकर निजी साधनों से या पैदल अपने स्थान तक गए। हिंद ऑटो रिक्शा वर्कर यूनियन के प्रेसिडेंट अनिल कुमार ने बताया कि पूरे कागज होने के बावजूद उन्हें शहर में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है।
पंचकूला के सभी ऑटो चालकों को सीएनजी गैस भरवाने के लिए चंडीगढ़ में ही आना पड़ता है। पंचकूला के आसपास लगभग 90 किलोमीटर के दायरे में कोई भी सीएनजी व एलपीजी फिलिंग स्टेशन नहीं है। इसकी वजह से वे मजबूरी में चंडीगढ़ के फिलिंग स्टेशन से गैस भराते हैं। ऐसे में उन्हें आने से रोका जाता है और ऑटो जब्त किए जा रहे हैं।
चंडीगढ़ के नंबर वाले ऑटो चालकों की चांदी
चंडीगढ़ नंबर के आटों चालकों की इन दिनों चांदी है। सैंकड़ों ऑटो के बंद होने की वजह से सवारियां काफी मिल रही हैं। इसकी वजह से उन्होंने किराया भी बढ़ा दिया है। अब किसी भी रूट के लिए सबसे कम किराया भी 20 रुपये कर दिया है। हालांकि ऑटो चालकों का कहना है कि चंडीगढ़ के आटो चालकों को भी पुलिस की तरफ से परेशान किया जा रहा है। बार-बार उन्हें रोका जाता है और फिर चेकिंग की जाती है। इसके अलावा तीन से ज्यादा सवारी बिठाने पर चालान भी किया जा रहा है।
रिएलिटी चेक- दोपहर एक बजे आईएसबीटी 43 के लिए नहीं मिली कैब
कैब चालकों की हड़ताल की वजह से मोबाइल एप पर टैक्सी बुक नहीं हो पाने की वजह से लोग परेशान हो रहे हैं। मंगलवार को अमर उजाला ने एक रिएलिटी चेक किया। दोपहर एक बजे सेक्टर-9 स्थित चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड से आईएसबीटी 43 जाने केलिए कैब बुक करने का प्रयास किया। पहले ऊबर के एप से कैब बुक करने की कोशिश की लेकिन एप पर ‘नो कार एविलेबल’ का मैसेज फ्लैश किया गया। इसके बाद ओला एप के माध्यम से कैब बुक करने की कोशिश की गई।
ओला मोबाइल एप खोलने के साथ ही एक नोटिफिकेशन आया कि ‘किराया आम दिनों से ज्यादा हो सकता है’। हालांकि इसके पीछे का कारण नहीं बताया गया। इसके बावजूद आईएसबीटी 43 के लिए कैब बुक करने की कोशिश की गई। करीब 3 मिनट सर्च करने के बाद ‘नो कार एविलेबल’ का मैसेज आ गया। हाल दिन के समय का है, पीक ऑवर्स का भी नहीं। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आने-जाने वालों को एप कैब नहीं मिलने की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
रिएलिटी चेक- दोपहर एक बजे आईएसबीटी 43 के लिए नहीं मिली कैब
कैब चालकों की हड़ताल की वजह से मोबाइल एप पर टैक्सी बुक नहीं हो पाने की वजह से लोग परेशान हो रहे हैं। मंगलवार को अमर उजाला ने एक रिएलिटी चेक किया। दोपहर एक बजे सेक्टर-9 स्थित चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड से आईएसबीटी 43 जाने केलिए कैब बुक करने का प्रयास किया। पहले ऊबर के एप से कैब बुक करने की कोशिश की लेकिन एप पर ‘नो कार एविलेबल’ का मैसेज फ्लैश किया गया। इसके बाद ओला एप के माध्यम से कैब बुक करने की कोशिश की गई।
ओला मोबाइल एप खोलने के साथ ही एक नोटिफिकेशन आया कि ‘किराया आम दिनों से ज्यादा हो सकता है’। हालांकि इसके पीछे का कारण नहीं बताया गया। इसके बावजूद आईएसबीटी 43 के लिए कैब बुक करने की कोशिश की गई। करीब 3 मिनट सर्च करने के बाद ‘नो कार एविलेबल’ का मैसेज आ गया। हाल दिन के समय का है, पीक ऑवर्स का भी नहीं। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आने-जाने वालों को एप कैब नहीं मिलने की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।