चंडीगढ़: पीपीई किट पहनने-उतारने की प्रक्रिया को बनाया सुरक्षित, पीजीआई में ड्यूटी दे रहे सभी स्वास्थ्यकर्मी कोरोना से दूर
अब डॉक्टरों का दावा है कि पीजीआई देश का पहला ऐसा संस्थान है जहां रिमोट सर्विलांस तकनीक लागू होने के बाद से अब तक कोविड अस्पताल में ड्यूटी करने वाला एक भी कर्मी ड्यूटी के अगले सात दिनों के भीतर संक्रमित नहीं हुआ है। 1000 स्टाफ पर अध्ययन के बाद इस बात की पुष्टि हुई है।
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चंडीगढ़ पीजीआई के कोविड अस्पताल में लागू की गई ऑडियो विजुअल रिमोट सर्विलांस ऑफ डोफिंग सिस्टम की वजह से यहां ड्यूटी कर रहा एक भी कोरोना योद्धा अब तक कोरोना की चपेट में नहीं आया है। इस तकनीक के जरिए अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ के बल पर डोफिंग-डोनिंग रूम को सीसीटीवी कैमरे से लैस कर उसे रिमोट सर्विलांस तकनीक से जोड़ दिया, जिससे संक्रमण के खतरे को कम करने में सफलता हासिल की है। देश में यह अपनी तरह का एकमात्र प्रयोग है, जिसकी सफलता को देखते हुए इस पर किए गए अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय जरनल में प्रकाशित किया गया है।
इस तकनीक को बनाने वाले पीजीआई के एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अजय सिंह ने बताया कि मार्च 2020 में जब पीजीआई में अलग कोविड अस्पताल बनाया गया, तब वहां ड्यूटी कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए पीपीई किट पहनने व उतारने की प्रक्रिया संबंधित जानकारी को दीवार पर चस्पा कर दिया गया था। इसके एक-एक स्टेप को पढ़कर ही स्वास्थ्यकर्मी पीपीई किट पहनते (डोनिंग) और उतारते (डोफिंग) थे।
इस दौरान अलग-अलग कुल 16 स्टेप करने पड़ते थे। इस दौरान किसी भी स्टेप के छूटने या गलत होने पर संक्रमित होने का खतरा बना रहता था। ऐसी स्थिति से बचाव के लिए कोविड अस्पताल में ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों ने यह तकनीक प्रयोग के तौर पर मई 2020 में शुरू की। डोफिंग की प्रक्रिया के दौरान सीसीटीवी कैमरे से कनेक्ट रूम में बैठा प्रशिक्षित कर्मचारी ड्यूटी करके लौटे स्टाफ को डोफिंग से जुड़ी एक एक प्रक्रिया बताता है, जिसे सुनकर और देखकर बड़े ही आराम से स्टाफ पीपीई किट को मानक के अनुसार आसानी से उतार देता है।
ड्यूटी के सात दिन बाद तक एक भी स्टाफ नहीं हुआ संक्रमित
डॉ. अजय ने दावा किया कि पीजीआई देश का पहला ऐसा संस्थान है जहां रिमोट सर्विलांस तकनीक लागू होने के बाद से अब तक कोविड अस्पताल में ड्यूटी करने वाला एक भी स्टाफ ड्यूटी के अगले सात दिनों के भीतर संक्रमित नहीं हुआ है। 1000 स्टाफ पर अध्ययन के बाद इस बात की पुष्टि हुई है। इस अध्ययन को पुष्ट करने के लिए ड्यूटी के बाद सभी स्टाफ का 7 दिनों तक फॉलोअप किया गया है।
अध्ययन के दौरान स्टाफ से मिले फीडबैक के आधार पर यह पुष्ट हुआ है कि इस तकनीक से स्वास्थ्यकर्मियों के तनाव को भी नियंत्रित करने में काफी मदद मिली है। वहीं, संक्रमण का खतरा भी न के बराबर रह गया है। डॉ. अजय ने बताया कि जो भी स्टाफ अब तक संक्रमित हुआ है, वह 7 दिनों के बाद या फिर घर से कहीं और जाने या बाहर के लोगों के संपर्क में आने पर संक्रमित हुआ है। इससे इस तकनीक का काफी फायदा मिला है।
पीजीआई के कोविड अस्पताल में डोफिंग और डोनिंग के लिए बनाई गई रिमोट सर्विलांस तकनीक से स्वास्थ्यकर्मियों को संक्रमित होने से बचाने में काफी मदद मिली है। युवा डॉक्टरों की सूझबूझ का पीजीआई को प्रत्येक स्तर पर लाभ मिल रहा है। वहीं, कोविड के मरीजों को भी बेहतर इलाज के साथ ही युवा बौद्धिक कौशल का भी भरपूर लाभ मिल रहा है। -प्रो. जीडी पुरी, पीजीआई में कोविड के प्रबंधक