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ऑबर्न विवि और जीसीजी-42 सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती पर करेंगे काम
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चंडीगढ़। पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स सेक्टर-42 व ऑबर्न विश्वविद्यालय संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य एक समझौता हुआ है। दोनों ही संस्थान मिलकर पारस्परिक सांस्कृतिक संबंधों को सशक्त करने का काम करेंगे।
ऑबर्न विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. कार्ल स्टॉकटन और जीसीजी-42 कॉलेज की प्राचार्या प्रो. डॉक्टर निशा अग्रवाल के बीच समझौता हुआ। शिक्षा की अंतरराष्ट्रीय समझ, शैक्षणिक उत्कृष्टता, अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए भी काम किया जाएगा। डॉ. रंजय वर्धन अपने महाविद्यालय की ओर से और डॉ. प्रीत कौर ऑबर्न यूनिवर्सिटी से इस प्रोग्राम के निदेशक होंगे। डॉ. एंड्रयूमाइकल, डॉ. शांता वर्मा, प्रो. पूनम अग्रवाल और प्रोफेसर दीपिका कंसल को कार्यकारिणी सलाहकार नियुक्त किया गया है।
प्राचार्या प्रो. निशा अग्रवाल ने कहा कि यह एमओयू प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी बनाने के नए अवसर देगा। कार्यक्रम निदेशक डॉ. रंजय वर्धन ने बताया कि अमेरिकी विश्वविद्यालय के साथ एमओयू 2015 में इस क्षेत्र में अपनी तरह का पहला केंद्र था और अब इसे पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया है। अध्ययन और अनुसंधान के प्रयोजनों के लिए छात्रों की ओर से दौरा और विनिमय का काम होगा। पुस्तकालय सामग्री और अनुसंधान प्रकाशनों के आदान-प्रदान का काम भी होगा। संयुक्त पाठ्यक्रम विकास और वितरण डिप्लोमा, प्रमाण पत्र और डिग्री के लिए अग्रणी तरीकों से कार्य होगा।
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ऑबर्न विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. कार्ल स्टॉकटन और जीसीजी-42 कॉलेज की प्राचार्या प्रो. डॉक्टर निशा अग्रवाल के बीच समझौता हुआ। शिक्षा की अंतरराष्ट्रीय समझ, शैक्षणिक उत्कृष्टता, अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए भी काम किया जाएगा। डॉ. रंजय वर्धन अपने महाविद्यालय की ओर से और डॉ. प्रीत कौर ऑबर्न यूनिवर्सिटी से इस प्रोग्राम के निदेशक होंगे। डॉ. एंड्रयूमाइकल, डॉ. शांता वर्मा, प्रो. पूनम अग्रवाल और प्रोफेसर दीपिका कंसल को कार्यकारिणी सलाहकार नियुक्त किया गया है।
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प्राचार्या प्रो. निशा अग्रवाल ने कहा कि यह एमओयू प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी बनाने के नए अवसर देगा। कार्यक्रम निदेशक डॉ. रंजय वर्धन ने बताया कि अमेरिकी विश्वविद्यालय के साथ एमओयू 2015 में इस क्षेत्र में अपनी तरह का पहला केंद्र था और अब इसे पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया है। अध्ययन और अनुसंधान के प्रयोजनों के लिए छात्रों की ओर से दौरा और विनिमय का काम होगा। पुस्तकालय सामग्री और अनुसंधान प्रकाशनों के आदान-प्रदान का काम भी होगा। संयुक्त पाठ्यक्रम विकास और वितरण डिप्लोमा, प्रमाण पत्र और डिग्री के लिए अग्रणी तरीकों से कार्य होगा।
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