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Chandigarh News: चंडीगढ़ में लागू होगा असम टेनेंसी एक्ट, किरायेदार और मकान मालिक दोनों को मिलेगा कानूनी संरक्षण
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ में किराया व्यवस्था को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए यूटी प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने असम टेनेंसी एक्ट को कुछ संशोधनों के साथ लागू करने का प्रस्ताव तैयार कर गृह मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा है। मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद के अनुसार इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार से जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
इससे पहले यूटी प्रशासन ने फरवरी 2022 में चंडीगढ़ टेनेंसी एक्ट का खाका तैयार कर एमएचए को भेजा था, जिसे संसद में पेश किया जाना था। हालांकि चार साल से अधिक समय बीतने के बावजूद यह बिल अभी तक संसद में पेश नहीं हो सका। ऐसे में प्रशासन ने नया कानून लाने के बजाय असम टेनेंसी एक्ट को अपनाने का फैसला लिया है।
किराया समझौता करना होगा अनिवार्य
नए नियमों के तहत किसी भी मकान को किराए पर देने या लेने के लिए लिखित एग्रीमेंट अनिवार्य होगा। इस एग्रीमेंट की जानकारी मकान मालिक और किरायेदार को संयुक्त रूप से दो महीने के भीतर रेंट अथॉरिटी को देनी होगी। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो दोनों पक्षों को अलग-अलग एक महीने के भीतर इसकी जानकारी देनी होगी। इससे किराया लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादों की संभावना कम होगी।
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आवश्यक सेवाएं बंद करने पर सख्ती
नए कानून के तहत मकान मालिक, प्रॉपर्टी मैनेजर या किरायेदार कोई भी व्यक्ति किसी भी जरूरी सेवा जैसे पानी, बिजली आदि को बंद नहीं कर सकेगा। ऐसा करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा। यदि किरायेदार तय समय के बाद भी मकान खाली नहीं करता है तो मकान मालिक को अतिरिक्त मुआवजा देने का प्रावधान रखा गया है। इसके तहत पहले दो महीनों तक किराए का दोगुना और उसके बाद चार गुना किराया देना होगा। इस कानून के लागू होने से चंडीगढ़ में किराया व्यवस्था अधिक संगठित होगी और मकान मालिक तथा किरायेदार दोनों को स्पष्ट अधिकार और जिम्मेदारियां मिलेंगी।
मॉडल टेनेंसी एक्ट पर आधारित है नया कदम
दरअसल जून 2021 में केंद्र सरकार ने मॉडल टेनेंसी एक्ट को मंजूरी दी थी, जिसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनाने के लिए कहा गया था। असम उन शुरुआती राज्यों में शामिल रहा, जिसने इस मॉडल एक्ट को लागू किया। इसी को ध्यान में रखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन अब असम के कानून को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस प्रक्रिया के बाद इसे संसद में पेश करने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि केंद्र की मंजूरी के बाद सीधे लागू किया जा सकेगा।
पुराने कानून की जगह लेगा नया एक्ट
नया टेनेंसी कानून ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रिस्ट्रिक्शन एक्ट 1949 की जगह लेगा जो अभी तक चंडीगढ़ में लागू है। नए कानून के लागू होने के बाद शहर में एक रेंट अथॉरिटी का गठन किया जाएगा, जो किराया संबंधी मामलों की निगरानी करेगी। इसके साथ ही एक रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल भी बनाए जाएंगे जहां विवादों की सुनवाई और अपील की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य मकान मालिक और किरायेदार के बीच संतुलन बनाना और विवादों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। फिलहाल ऐसे मामलों की सुनवाई सिविल कोर्ट में होती है, जहां मामलों का लंबित रहना एक बड़ी समस्या है।
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इससे पहले यूटी प्रशासन ने फरवरी 2022 में चंडीगढ़ टेनेंसी एक्ट का खाका तैयार कर एमएचए को भेजा था, जिसे संसद में पेश किया जाना था। हालांकि चार साल से अधिक समय बीतने के बावजूद यह बिल अभी तक संसद में पेश नहीं हो सका। ऐसे में प्रशासन ने नया कानून लाने के बजाय असम टेनेंसी एक्ट को अपनाने का फैसला लिया है।
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किराया समझौता करना होगा अनिवार्य
नए नियमों के तहत किसी भी मकान को किराए पर देने या लेने के लिए लिखित एग्रीमेंट अनिवार्य होगा। इस एग्रीमेंट की जानकारी मकान मालिक और किरायेदार को संयुक्त रूप से दो महीने के भीतर रेंट अथॉरिटी को देनी होगी। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो दोनों पक्षों को अलग-अलग एक महीने के भीतर इसकी जानकारी देनी होगी। इससे किराया लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादों की संभावना कम होगी।
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आवश्यक सेवाएं बंद करने पर सख्ती
नए कानून के तहत मकान मालिक, प्रॉपर्टी मैनेजर या किरायेदार कोई भी व्यक्ति किसी भी जरूरी सेवा जैसे पानी, बिजली आदि को बंद नहीं कर सकेगा। ऐसा करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा। यदि किरायेदार तय समय के बाद भी मकान खाली नहीं करता है तो मकान मालिक को अतिरिक्त मुआवजा देने का प्रावधान रखा गया है। इसके तहत पहले दो महीनों तक किराए का दोगुना और उसके बाद चार गुना किराया देना होगा। इस कानून के लागू होने से चंडीगढ़ में किराया व्यवस्था अधिक संगठित होगी और मकान मालिक तथा किरायेदार दोनों को स्पष्ट अधिकार और जिम्मेदारियां मिलेंगी।
मॉडल टेनेंसी एक्ट पर आधारित है नया कदम
दरअसल जून 2021 में केंद्र सरकार ने मॉडल टेनेंसी एक्ट को मंजूरी दी थी, जिसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनाने के लिए कहा गया था। असम उन शुरुआती राज्यों में शामिल रहा, जिसने इस मॉडल एक्ट को लागू किया। इसी को ध्यान में रखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन अब असम के कानून को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस प्रक्रिया के बाद इसे संसद में पेश करने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि केंद्र की मंजूरी के बाद सीधे लागू किया जा सकेगा।
पुराने कानून की जगह लेगा नया एक्ट
नया टेनेंसी कानून ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रिस्ट्रिक्शन एक्ट 1949 की जगह लेगा जो अभी तक चंडीगढ़ में लागू है। नए कानून के लागू होने के बाद शहर में एक रेंट अथॉरिटी का गठन किया जाएगा, जो किराया संबंधी मामलों की निगरानी करेगी। इसके साथ ही एक रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल भी बनाए जाएंगे जहां विवादों की सुनवाई और अपील की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य मकान मालिक और किरायेदार के बीच संतुलन बनाना और विवादों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। फिलहाल ऐसे मामलों की सुनवाई सिविल कोर्ट में होती है, जहां मामलों का लंबित रहना एक बड़ी समस्या है।