'आशुतोष महाराज के बेटे हो तो सबूत दो दिलीप'
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आशुतोष महाराज का शव 28 जनवरी 2014 की रात से दिव्य ज्योति जागृति संस्थान जालंधर में पड़ा है। वहां शव को फ्रीजर में रखा गया है।
डॉक्टर, दिलीप झा, पूर्ण सिंह और यहां तक पंजाब सरकार भी मानती है कि आशुतोष महाराज की मौत हो चुकी है, लेकिन संस्थान के श्रद्धालुओं का कहना है कि महाराज समाधि में हैं और कभी भी लौट सकते हैं।
पंजाब सरकार को कोर्ट की फटकार
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दिलीप झा से दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल, जालंधर के प्रमुख आशुतोष महाराज का बेटा होने का सुबूत मांगा है। अपने पिता के शव की मांग कर रहे दिलीप झा को जस्टिस एमएमएस बेदी की बेंच ने यह साबित करने को कहा है कि वह आशुतोष महाराज का ही बेटा है। दिलीप झा के वकील एसपी सोही ने कहा है कि वह जन्म प्रमाणपत्र पेश करेंगे। मामले पर अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
पिछली सुनवाई के दौरान पंजाब के रवैये पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की थी कि पंजाब का रवैया देश को शर्मसार कर रहा है। जस्टिस के कानन की बेंच ने कहा था कि अभी तक शव का पोस्टमार्टम हो जाना चाहिए था, लेकिन सरकार की आनाकानी सही नहीं है। मंगलवार को भी सरकार को बेंच की टिप्पणी का सामना करना पड़ा।
जस्टिस बेदी की बेंच ने सरकारी वकील को सरकार के लिए काम करने की सलाह दी है न कि संस्थान के लिए। संस्थान की बजाय सरकारी वकील ने ही कह दिया कि दिलीप कुमार झा आशुतोष महाराज का बेटा नहीं है। इस पर बेंच ने यह टिप्पणी की।
दिलीप झा ने पोस्टमार्टम की मांग की थी
पिछली बार हाईकोर्ट ने संस्थान को प्रतिवादी बनाते हुए जवाब मांगा था। अब संस्थान ने कहा है कि आशुतोष महाराज के शरीर का संस्कार नहीं किया जा सकता, वह कभी भी समाधि से लौट सकते हैं और वे उन्हें ऐसा कह कर ही समाधि में गए हैं।
इस कारण वह अपनी ड्यूटी में कोताही नहीं बरत सकते, यह संस्थान की परंपरा है। हाईकोर्ट ने कहा था कि आशुतोष की मौत पर संदेह जताया जा रहा है, ऐसे में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में उचित कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सरकार आनाकानी कर रही है। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से पहले पंजाब सरकार ने कहा कि ड्राइवर होने का दावा कर रहा पूर्ण सिंह शोहरत के लिए सारी कार्रवाई कर रहा है।
दिलीप झा ने याचिका दायर कर कहा था कि आशुतोष महाराज मधुबनी (बिहार) के गांव लखनौर के रहने वाले हैं। वहां के लोग चाहते हैं कि शव का अंतिम संस्कार गांव में ही हो। शव प्राप्त करने के लिए दिलीप झा ने बिहार के गृह सचिव तक पहुंच की थी। उसके मुताबिक गृह सचिव ने पंजाब के गृह सचिव को शव बिहार पहुंचाने के लिए पत्र भेजा था।
इसके अलावा उनके क्षेत्र के सांसद ने पंजाब के मुख्यमंत्री को भी पत्र भेज कर शव बिहार पहुंचाने की व्यवस्था करने का आग्रह किया था। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस दलील के साथ दिलीप झा ने शव प्राप्त करने और पोस्टमार्टम की मांग की थी।
पूर्ण सिंह और दिलीप झा ने दायर की याचिका
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से पहले पंजाब सरकार ने कहा कि ड्राइवर होने का दावा कर रहा पूर्ण सिंह शोहरत के लिए झूठे आरोप लगा रहा है। पूर्ण सिंह ने डेरे की संपत्ति हड़पने के लिए आशुतोष महाराज की हत्या की आशंका जताई थी।
केस में दिलीप झा ने याचिका दायर कर कहा था कि आशुतोष महाराज मधुबनी (बिहार) के गांव लखनौर के रहने वाले हैं। वहां के श्रद्धालु चाहते हैं कि शव का अंतिम संस्कार गांव में हो। शव पाने के लिए उन्होंने बिहार के गृह सचिव से गुहार लगाई थी, क्योंकि उन्हें पंजाब आने से डर लगता है। झा के अनुसार गृह सचिव ने पंजाब के गृह सचिव को शव बिहार पहुंचाने के लिए पत्र भेजा था। उनके क्षेत्र के सांसद ने भी पंजाब के मुख्यमंत्री को भी पत्र भेज कर शव बिहार पहुंचाने की व्यवस्था करने का आग्रह किया था। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस दलील के साथ दिलीप झा ने शव प्राप्त करने और पोस्टमार्टम की मांग की थी।
बेटे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांगी इजाजत
आशुतोष महाराज के बेटे दिलीप कुमार झा ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। आशुतोष महाराज के पुत्र ने याचिका दायर कर अपने पिता के अंतिम संस्कार की अनुमति मांगी है।
उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के अनुसार पिता के अंतिम संस्कार का हक पुत्र का होता है। साथ ही उन्होंने पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस की इस मामले में उदासीनता पर भी सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा है कि उनके पिता की हत्या की गई है। सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में यह याचिका दायर हुई है। एक दो दिन में हाईकोर्ट याचिका पर सुनवाई करेगा। दिलीप कुमार झा ने इस मामले में बिहार सरकार से भी हस्तक्षेप करने की मांग की है।