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इस शख्स की 25 साल की मेहनत दीवारों पर सजी, आप भी देखने आएं

Fri, 21 Oct 2016 09:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 21 Oct 2016 09:28 AM IST
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artist ishwar dyal gaur 25 years hard work displayed in punjab university
पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ईश्वर दयाल गौड़
इस शख्स का सपना साकार हो गया, जब उसकी 25 साल की मेहनत दीवारों पर सजी। है न अनोखी बात, आप भी आएं देखने के लिए। फोक की कोई प्रमाणिकता नहीं होती। फोक को तो सांस्कृतिक स्तर पर ही देखा जाना चाहिए ना कि वैज्ञानिक तौर पर। आज एक ही लोककथा को विभिन्न-विभिन्न जगहों पर अलग-अलग रूप में पेश किया जाता है।
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विज्ञान से जोड़कर इसकी खूबसूरती को कम नहीं किया जाना चाहिए। यह कहना है प्रो. ईश्वर दयाल गौड़ का। पंजाब यूनिवर्सिटी में प्रो. गौड़ की बुधवार को शुरू हुई ‘वारिस शाह दी हीर’ प्रदर्शनी 27 अक्तूबर तक चलेगी। इसका आयोजन हिस्ट्री डिपार्टमेंट की ओर से पीयू के डिपार्टमेंटल म्यूजियम ऑफ एशिएंट इंडियन हिस्ट्री कल्चर एंड अर्केलॉजी में किया जा रहा है।
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वारिस शाह की हीर की 83 फोटोग्राफ
हीर-रांझा की कहानी को बयां करने के लिए प्रदर्शनी में प्रो. ईश्वर दयाल ने 83 तस्वीरें डिस्प्ले की हैं। इनमें हीर-रांझा की प्रेम कहानी से संबंधित चित्रों के साथ-साथ वारिस शाह द्वारा हस्तलिखित पोथियां भी शामिल की गईं हैं जो कि 1843 वर्ष की है। इसके अलावा प्रदर्शनी में लाहौर में स्थित हीर-रांझा की कब्र के चित्र भी डिस्प्ले किए गए हैं जो यह दर्शाते हैं कि लाहौर में इन नायकों की लोग पूजा भी करते हैं।
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25 साल लगे तस्वीरें एकत्रित करने में
प्रोफेसर ईश्वर दयाल ने बताया कि वह पिछले 25 साल से इस विषय पर रिसर्च कर रहे थे। इन तस्वीरों को इकट्ठा करने के लिए उन्हें पंजाब के  साथ-साथ पाकिस्तानी पंजाब में लग रहे मेलों में जाकर इन तस्वीरों को इकट्ठा करना पड़ा। इसके अलावा इन्हीं तस्वीरों के लिए वह राजस्थान, हरियाणा गए। इसमें लंदन की भी तस्वीरें शामिल की गई हैं।


फोटोग्राफ एकत्रित करने का कारण जब प्रो. ईश्वर दयाल से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इसके जरिए उस समय की औरतों की सामाजिक दशा को दिखाना चाहता हूं। जिन्हें अपने परिवार की इज्जत के नाम पर अपनी खुशियों को दांव पर लगाना पड़ा। उन्हें अपने प्यार की खातिर अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ता था।
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