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Chandigarh News: जीएमसीएच-32 में पीजी एडमिशन में मनमानी, अभिभावकों ने पीएमओ से की शिकायत

Tue, 10 Jun 2025 02:23 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Jun 2025 02:23 AM IST
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Arbitrary PG admissions in GMCH-32, parents complained to PMO
चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 में पीजी एमडी-एमएस प्रवेश प्रक्रिया में कॉलेज प्रशासन की मनमानी का मामला सामने आया है। इसे गंभीरता से लेते हुए अभ्यर्थियों के अभिभावकों ने पीएमओ के साथ स्वास्थ्य मंत्रालय और नेशनल मेडिकल कमिशन को सोमवार को इस संबंध में शिकायत कर मनमानी पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।
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अभिभावकों का कहना है कि कॉलेज प्रशासन ने मेडिकल काउंसिल के मानकों की अनदेखी करते हुए पीजी की ऑल इंडिया और स्टेट कोटा की सीटों की संख्या में अपने स्तर पर फेरबदल कर लिया है। इसके चलते चंडीगढ़ के छात्रों को काफी नुकसान होगा। वहीं, जीएमसीएच ने ऐसा कर पूरे देश में लागू मानक की अनदेखी की है, इसलिए इसे तत्काल संज्ञान में लेकर इस पर रोक लगाना बेहद जरूरी है।
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इस साल जीएमसीएच की पीजी प्रवेश प्रक्रिया 6 महीने से लंबित है, जबकि देश के अन्य मेडिकल कॉलेज में यह जनवरी में पूरी कर ली गई है। 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर जीएमसीएच 32 में डोमिसाइल आधारित प्रवेश प्रक्रिया को खत्म करने का आदेश दिया था। उसके बाद स्टेट कोटा में यूटी पूल खत्म कर इंस्टीट्यूशन में सभी सीटों को भरना था। क्योंकि स्टेट कोटा का यही विकल्प बचा था।
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कोर्ट के आदेश पर क्लीयरेंस के लिए प्रशासन ने फिर अर्जी लगाई, जिस पर कोर्ट ने मार्च में सुनवाई कर उसे खारिज करते हुए यूटी प्रशासन पर पेनल्टी लगाई थी। इसके बाद 9 अप्रैल को एडमिशन का नोटिफिकेशन जारी किया गया। कोर्ट के आदेश पर स्टेट कोटा की सीटों को इंस्टीट्यूशन कोटा में बदल दिया गया। इसके बाद कुछ छात्र कोर्ट चले गए।
इस संबंध में यूटी पूल को लेकर दाखिल किए गए आवेदक को कोर्ट ने खारिज कर दिया। वहीं, दूसरी तरफ 2 जून को यूटी प्रशासन के ला ऑफिसर ने सभी सीटों को इंस्टीट्यूशन पुल में डालने का सुझाव दिया। जिसे 3 जून को कॉलेज की स्टैंडिंग काउंसिल ने पीजी कमेटी के साथ बैठक कर बची हुई सीटों को इंस्टीट्यूशन पुल और ऑल इंडिया पुल में आधा-आधा करके नोटिफिकेशन निकाल दिया, जबकि देश में इन सीटों को लेकर 50-50 का कोटा होता है लेकिन कॉलेज प्रशासन की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेशन में 75 और 25 का अनुपात हो गया, जो नेशनल मेडिकल काउंसिल के मानकों के अनुसार नहीं था।
मौजूदा समय में पहली और दूसरी काउंसलिंग के बाद बची हुई 32 सीटों पर प्रवेश के लिए तीसरी काउंसलिंग होनी है लेकिन इस मानक के कारण बची हुई सीटों के आधार पर अगर प्रवेश हुआ तो चंडीगढ़ के छात्रों को काफी नुकसान होगा। अभिभावकों का कहना है कि उन्हें यह आशंका है कि कॉलेज प्रशासन ने इस संबंध में नेशनल मेडिकल काउंसिल से कोई अनुमति नहीं ली है।

अगर ये सीटें ऑल इंडिया कोटे में जाती हैं तो इसकी प्रवेश प्रक्रिया नेशनल मेडिकल काउंसिल की देखरेख में होना चाहिए जबकि जीएमसीएच इन सीटों पर अपने स्तर पर काउंसलिंग करने की तैयारी कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ कॉलेज प्रशासन की ओर से इस संबंध जारी किए गए विज्ञापन में भी अधूरी जानकारी दी गई है, जिससे आशंका और मजबूत हो रही है।
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