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हाईकोर्ट का फैसला: बच्चे की कस्टडी के लिए उसके असल निवास स्थान पर ही किया जा सकता है आवेदन
Tue, 03 Sep 2024 08:53 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Sep 2024 08:53 PM IST
सार
बच्चा अपने पिता के साथ पंचकूला में रहता है। उसकी कस्टडी के लिए उसकी मां ने कैथल में याचिका दायर की थी। इसके बाद बच्चे के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंचकूला में पिता के साथ रह रहे बच्चे की कस्टडी के लिए कैथल की फैमिली कोर्ट में दाखिल याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करने के फैसले को रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किया है।
याचिका दाखिल करते हुए बच्चे के पिता ने बताया कि बच्चे की कस्टडी के संबंध में आवेदन उस जिला न्यायालय में किया जा सकता है जहां वह रहता है। याची ने कहा कि उसका बेटा उसके साथ पंचकूला में रहता है। ऐसे में कैथल की अदालत में कस्टडी के लिए याचिका दाखिल नहीं की जा सकती। पत्नी ने तर्क दिया था कि जब बच्चे की आयु पांच वर्ष से कम हो और कस्टडी मां के पास न हो तो जिस जिले में मां रहती है, वहां वह याचिका दाखिल कर सकती है।
फैमिली कोर्ट ने माना था कि भले ही पांच वर्ष से कम आयु का बच्चा मां के साथ न रहता हो, फिर भी उसकी कस्टडी के लिए जहां मां रहती है, वहां याचिका दाखिल कर सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रावधान को पढ़ने से पता चलता है कि अधिकार क्षेत्र के संबंध में धारा नौ में विधायिका का इरादा यह है कि नाबालिग की कस्टडी के लिए आवेदन उस जिला न्यायालय में होगा जहां नाबालिग निवास कर रहा है।
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याचिका दाखिल करते हुए बच्चे के पिता ने बताया कि बच्चे की कस्टडी के संबंध में आवेदन उस जिला न्यायालय में किया जा सकता है जहां वह रहता है। याची ने कहा कि उसका बेटा उसके साथ पंचकूला में रहता है। ऐसे में कैथल की अदालत में कस्टडी के लिए याचिका दाखिल नहीं की जा सकती। पत्नी ने तर्क दिया था कि जब बच्चे की आयु पांच वर्ष से कम हो और कस्टडी मां के पास न हो तो जिस जिले में मां रहती है, वहां वह याचिका दाखिल कर सकती है।
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फैमिली कोर्ट ने माना था कि भले ही पांच वर्ष से कम आयु का बच्चा मां के साथ न रहता हो, फिर भी उसकी कस्टडी के लिए जहां मां रहती है, वहां याचिका दाखिल कर सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रावधान को पढ़ने से पता चलता है कि अधिकार क्षेत्र के संबंध में धारा नौ में विधायिका का इरादा यह है कि नाबालिग की कस्टडी के लिए आवेदन उस जिला न्यायालय में होगा जहां नाबालिग निवास कर रहा है।
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