पाक में फांसी को मंजूरी से एक भारतीय पर लटका फंदा
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पाकिस्तान में फांसी पर रोक हटने से भारतीय कैदी कृपाल सिंह की जान पर खतरा बढ़ गया है। सरबजीत की तरह लाहौर की कोट लखपत जेल में 22 साल से बंद गुरदासपुर के कृपाल को सुनाई गई फांसी की सजा पर अमल पिछले आठ साल से टला हुआ है। उसके परिवार वाले मानवाधिकार संगठनों के जरिये पाक में हर दर पर गुहार लगा चुके हैं लेकिन उसकी सजा कम नहीं हो सकी।
लाहौर के वरिष्ठ पत्रकार खालिद महमूद ने वीरवार को फोन पर बताया कि कोट लखपत में 10 के करीब ऐसे कैदी बंद हैं जिन्हें कई साल पहले फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। इनमें गुरदासपुर के गांव मुस्तफाबाद का कृपाल सिंह भी शामिल है, जिस पर लाहौर में बम धमाके और जासूसी करने के आरोप लगे हैं। कृपाल को बैरक नंबर 7 में रखा गया है जिसे डेथ सेल कहा जाता है।
जेल की डेथ सेल में रखा गया कृपाल सिंह को
कृपाल की बहन और भतीजे ने दो साल पहले पाक में सरबजीत के वकील ओवेस शेख से मिलकर उन्हें अपील करने का हक दिया था। सरबजीत की पिछले साल जेल में हत्या के बाद शेख ने स्वीडन में शरण ले ली और कृपाल को फांसी की सजा से राहत नहीं मिल सकी। परिवारवालों का कहना है कि 29 फरवरी, 1992 को कृपाल सिंह लापता हो गया था। ढाई साल बाद लाहौर से छूटकर आए भारतीयों ने उन्हें बताया था कि कृपाल कोट लखपत जेल में बंद है।
मोदी के दर पर लगाऊंगी गुहार
साल 2011 में कृपाल सिंह से लाहौर जेल में मिल चुकीं सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने कहा कि वे पाक में बंद भारतीयों को रिहा कराने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही हैं। पाक सरकार के ताजा फैसले के बाद वे कृपाल और दूसरे भारतीय बंदियों की जान बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर गुहार लगाएंगी।