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पाक में फांसी को मंजूरी से एक भारतीय पर लटका फंदा

Fri, 19 Dec 2014 05:06 PM IST
योगेश नारायण दीक्षित/अमर उजाला, नई दिल्ली/चंडीगढ़
योगेश नारायण दीक्षित/अमर उजाला, नई दिल्ली/चंडीगढ़ Updated Fri, 19 Dec 2014 05:06 PM IST
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Another 'sarabjit' near hanging at pakistan

पाकिस्तान में फांसी पर रोक हटने से भारतीय कैदी कृपाल सिंह की जान पर खतरा बढ़ गया है। सरबजीत की तरह लाहौर की कोट लखपत जेल में 22 साल से बंद गुरदासपुर के कृपाल को सुनाई गई फांसी की सजा पर अमल पिछले आठ साल से टला हुआ है। उसके परिवार वाले मानवाधिकार संगठनों के जरिये पाक में हर दर पर गुहार लगा चुके हैं लेकिन उसकी सजा कम नहीं हो सकी।

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लाहौर के वरिष्ठ पत्रकार खालिद महमूद ने वीरवार को फोन पर बताया कि कोट लखपत में 10 के करीब ऐसे कैदी बंद हैं जिन्हें कई साल पहले फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। इनमें गुरदासपुर के गांव मुस्तफाबाद का कृपाल सिंह भी शामिल है, जिस पर लाहौर में बम धमाके और जासूसी करने के आरोप लगे हैं। कृपाल को बैरक नंबर 7 में रखा गया है जिसे डेथ सेल कहा जाता है।
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जेल की डेथ सेल में रखा गया कृपाल सिंह को

Another 'sarabjit' near hanging at pakistan

कृपाल की बहन और भतीजे ने दो साल पहले पाक में सरबजीत के वकील ओवेस शेख से मिलकर उन्हें अपील करने का हक दिया था। सरबजीत की पिछले साल जेल में हत्या के बाद शेख ने स्वीडन में शरण ले ली और कृपाल को फांसी की सजा से राहत नहीं मिल सकी। परिवारवालों का कहना है कि 29 फरवरी, 1992 को कृपाल सिंह लापता हो गया था। ढाई साल बाद लाहौर से छूटकर आए भारतीयों ने उन्हें बताया था कि कृपाल कोट लखपत जेल में बंद है।   

मोदी के दर पर लगाऊंगी गुहार
साल 2011 में कृपाल सिंह से लाहौर जेल में मिल चुकीं सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने कहा कि वे पाक में बंद भारतीयों को रिहा कराने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही हैं। पाक सरकार के ताजा फैसले के बाद वे कृपाल और दूसरे भारतीय बंदियों की जान बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर गुहार लगाएंगी।

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