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पीयू में एक और बायोगैस प्लांट लगेगा
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में एक और बायोगैस प्लांट लगेगा। यह प्लांट साउथ कैंपस में तैयार होगा। इसके लिए प्रस्ताव बनकर तैयार हो चुका है। इस पर 15 लाख रुपये से अधिक खर्च होंगे। हॉस्टलों से निकलने वाले हरे कचरे का निस्तारण इस प्लांट के जरिए होगा। इसके जरिए गैस भी बनेगी, जिससे खाना तैयार होगा।
नैक की टीम ने पीयू का दौरा छह साल पहले किया था। उस दौरान टीम को पीयू में बायोगैस प्लांट नहीं मिला। यह शिक्षण संस्थानों के लिए अनिवार्य था। इस प्लांट का मुख्य कार्य हरे कचरे का निस्तारण करना है। पीयू में 20 हॉस्टल हैं। यहां कैंटीन व मेस संचालित हैं। इसके अलावा विभागीय कैंटीन भी चल रही हैं। हर दिन कई क्विंटल हरा कचरा यहां से निकलता है, जिसका निस्तारण उस दौरान होता नहीं मिला। इसे लेकर टीम ने सुझाव दिया था कि बायोगैस प्लांट स्थापित किया जाए। इसके लिए कमेटी बनी और काफी प्रयास के बाद सेक्टर-14 में पहला बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया। अब दूसरे बायोगैस प्लांट की स्थापना किए जाने की तैयारी चल रही है। वहीं, दूसरी ओर, सूत्रों का कहना है कि पहले बायोगैस प्लांट का संचालन बेहतर नहीं हो पा रहा है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि इस प्लांट का उद्देश्य पूरा हो सके। इसके साथ ही गैस बन सके।
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नैक की टीम ने पीयू का दौरा छह साल पहले किया था। उस दौरान टीम को पीयू में बायोगैस प्लांट नहीं मिला। यह शिक्षण संस्थानों के लिए अनिवार्य था। इस प्लांट का मुख्य कार्य हरे कचरे का निस्तारण करना है। पीयू में 20 हॉस्टल हैं। यहां कैंटीन व मेस संचालित हैं। इसके अलावा विभागीय कैंटीन भी चल रही हैं। हर दिन कई क्विंटल हरा कचरा यहां से निकलता है, जिसका निस्तारण उस दौरान होता नहीं मिला। इसे लेकर टीम ने सुझाव दिया था कि बायोगैस प्लांट स्थापित किया जाए। इसके लिए कमेटी बनी और काफी प्रयास के बाद सेक्टर-14 में पहला बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया। अब दूसरे बायोगैस प्लांट की स्थापना किए जाने की तैयारी चल रही है। वहीं, दूसरी ओर, सूत्रों का कहना है कि पहले बायोगैस प्लांट का संचालन बेहतर नहीं हो पा रहा है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि इस प्लांट का उद्देश्य पूरा हो सके। इसके साथ ही गैस बन सके।
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