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अब सड़कों पर पशु छोड़ना पड़ेगा महंगा
अमर उजाला मोहाली
Updated Mon, 09 Dec 2013 09:21 AM IST
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शहर में अब पशुओं को खुले में छोड़ना लोगों को काफी मंहगा पड़ेगा। क्योंकि नगर निगम ने शहर को कैटल फ्री बनाने की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी कड़ी में अब पशु पकड़ते समय फोटोग्राफी की जाएगी।
साथ में जब पशु रिलीज कराने के लिए पशु मालिक आएंगे, तो उन्हें एफिडेबिट देना होगा कि वे दोबारा पशु को खुले में नहीं छोड़ेंगे।
इसके बाद भी यदि पशु सड़कों पर पकड़े जाते हैं, तो नगर निगम द्वारा पशु मालिक के खिलाफ जुर्माने समेत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम द्वारा इंडस्ट्रिलय एरिया फेज-1 में गौशाला बनाई गई है। इसे चलाने की जिम्मेदारी पांच साल के लिए समाजसेवी संस्था श्री गोपाल सेवा समिति को सौंपी गई है।
समिति ने अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है। साथ ही पशुओं की देखभाल का काम शुरू कर दिया है। हालांकि नगर निगम द्वारा गौशाला का औपचारिक शुभारंभ कराया जाना है।
इसके लिए नगर निगम की टीम प्लानिंग में जुट गई है। गौशाला में 350 पशुओं के रखने की क्षमता है। इसके साथ ही निगम ने गौशाला के दूसरे हिस्से को भी तैयार करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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60 के करीब पशु पहुंचे गौशाला
नगर निगम की कैटल टीम एवं एनजीओ की टीम अब लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए मिलकर काम कर रही है। करीब 15 मुलाजिम दिन रात पशुओं को पकड़ने में जुटे हैं।
अब तक 60 के करीब पशु पकड़े जा चुके हैं। इसके अलावा कुछ पशु घायल अवस्था में भी पकड़े गए हैं। जिनका गौशाला में उपचार किया जा रहा है।
स्पेशल टैग बताएंगे पशु का इतिहास
गौशाला के संचालक भूपिंदर शर्मा ने बताया कि उन्होंने पकड़े जाने वाले पशुओं का रिकॉर्ड तैयार करने के लिए एक विशेष किस्म के टैग बनाने की दिशा में काम शुरू किया है।
यह टैग पूरी तरह कंप्यूटर चिप की तरह होंगे। जिसमें पशु से संबंधित सारी जानकारी होगी। जिन्हें एक कैप्सूल के माध्यम से पशु के पेट में स्थापित कर दिया जाएगा। जब भी पशु पकड़ा जाएगा, तो उसका सारा ब्योरा अपने आप ही उनके कंप्यूटर पर आ जाएगा।
धार्मिक संस्थाओं को सहयोग के लिए पत्र लिखा
एनजीओ के संचालक ने बताया कि उन्होंने गौशाला के सहयोग के लिए धार्मिक संस्थाओं एवं सामाजिक जत्थेबंदियों से सहयोग की अपील की है।
कोई भी व्यक्ति जो गौ सेवा करना चाहता है। वह फेज-1 में आकर सहयोग कर सकता है।
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साथ में जब पशु रिलीज कराने के लिए पशु मालिक आएंगे, तो उन्हें एफिडेबिट देना होगा कि वे दोबारा पशु को खुले में नहीं छोड़ेंगे।
इसके बाद भी यदि पशु सड़कों पर पकड़े जाते हैं, तो नगर निगम द्वारा पशु मालिक के खिलाफ जुर्माने समेत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम द्वारा इंडस्ट्रिलय एरिया फेज-1 में गौशाला बनाई गई है। इसे चलाने की जिम्मेदारी पांच साल के लिए समाजसेवी संस्था श्री गोपाल सेवा समिति को सौंपी गई है।
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समिति ने अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है। साथ ही पशुओं की देखभाल का काम शुरू कर दिया है। हालांकि नगर निगम द्वारा गौशाला का औपचारिक शुभारंभ कराया जाना है।
इसके लिए नगर निगम की टीम प्लानिंग में जुट गई है। गौशाला में 350 पशुओं के रखने की क्षमता है। इसके साथ ही निगम ने गौशाला के दूसरे हिस्से को भी तैयार करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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60 के करीब पशु पहुंचे गौशाला
नगर निगम की कैटल टीम एवं एनजीओ की टीम अब लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए मिलकर काम कर रही है। करीब 15 मुलाजिम दिन रात पशुओं को पकड़ने में जुटे हैं।
अब तक 60 के करीब पशु पकड़े जा चुके हैं। इसके अलावा कुछ पशु घायल अवस्था में भी पकड़े गए हैं। जिनका गौशाला में उपचार किया जा रहा है।
स्पेशल टैग बताएंगे पशु का इतिहास
गौशाला के संचालक भूपिंदर शर्मा ने बताया कि उन्होंने पकड़े जाने वाले पशुओं का रिकॉर्ड तैयार करने के लिए एक विशेष किस्म के टैग बनाने की दिशा में काम शुरू किया है।
यह टैग पूरी तरह कंप्यूटर चिप की तरह होंगे। जिसमें पशु से संबंधित सारी जानकारी होगी। जिन्हें एक कैप्सूल के माध्यम से पशु के पेट में स्थापित कर दिया जाएगा। जब भी पशु पकड़ा जाएगा, तो उसका सारा ब्योरा अपने आप ही उनके कंप्यूटर पर आ जाएगा।
धार्मिक संस्थाओं को सहयोग के लिए पत्र लिखा
एनजीओ के संचालक ने बताया कि उन्होंने गौशाला के सहयोग के लिए धार्मिक संस्थाओं एवं सामाजिक जत्थेबंदियों से सहयोग की अपील की है।
कोई भी व्यक्ति जो गौ सेवा करना चाहता है। वह फेज-1 में आकर सहयोग कर सकता है।