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‘अंधा युग’ ने दिखाई युद्ध की भीष्ाण्ा तबाही
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 26 Dec 2013 09:08 AM IST
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भगवान कृष्ण के युद्ध के लिए आह्वान के साथ सुनाई देती है गोलियों की गड़गड़ाहट। फिर दिखता है टूटा हुआ विश्व। यह सांकेतिक युद्ध का दृश्य है।
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इसके साथ शुरू होता है युद्ध के बाद का अंधा युग। यह सीन है-अलंकार थियेटर द्वारा प्रस्तुत किए गए धर्मवीर भारती के नाटक ‘अंधा युग’ का।
इसमें दिखाया गया है कि युद्ध का परिणाम हमेशा एक ही रहा है तबाही। युद्ध चाहे महाभारत का हो, फिर इराक- इरान का या भारत-पाकिस्तान का।
सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में अलंकार थिएटर ने इस नाटक का मंचन किया। नाटक अब होने वाले युद्ध और महाभारत के युद्ध दोनों को एक पटल पर लेकर चलता है।
इसमें भगवान श्रीकृष्ण को दो रूपों को दिखाया गया है। एक रासलीला करने वाले दूसरे रणभूमि में दिखने वाले कृष्ण। एक का रंग साफ है और दूसरे का काला।
नाटक की शुरुआत दो प्रहरियों के वार्तालाप के साथ शुरू होती है। यहां विश्व का नक्शा दिखाई देता है....अचानक गोलियां चलती हैं और फिर लाशें दिखाई जाती हैं।
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प्रहरियों की वार्तालाप के साथ महाभारत का दृश्य शुरू हो जाता है। इसमें धृतराष्ट्र और गांधारी बैठे बात कर रहे हैं। अंधे होने के कारण वे कुछ भी देख नहीं सकते।
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नाटक में समकालीनता और नवीन व्याख्या के साथ नए अर्थ लिए गए हैं। नाटक के निर्देशक चक्रेश ने बताया कि स्टेज सज्जा का खास ख्याल रखा गया है। इस नाटक में अभिषेक पूनिया ने अश्वथामा का किरदार निभाया।
कलाकार
सैनिक-रमन कुमार, राजेश कुमार कश्यप
गांधारी-प्रोमिला थापा
धृतराष्ट्र-हरदीप सिंह
कृष्ण-ज्योति और शिवानी
अश्वत्थामा-अभिषेक पूनिया
विदुर-सुमित
कृपाचार्य-मधुसूदन
कृत वर्मा-करण अरोड़ा