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आनंद कारज एक्टः पंजाब में ही नहीं होता मैरिज रजिस्ट्रेशन

Sun, 12 Jul 2015 01:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 12 Jul 2015 01:38 PM IST
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anand karaj act, no marriage ragistration in punjab

सुप्रीम कोर्ट की ओर से आनंद कारज मैरिज एक्ट में भी विवाह पंजीकरण अनिवार्य करने का आदेश जारी हुए नौ साल हो चुके हैं। इस मामले में राज्यों को नियम बनाने हैं, लेकिन हरियाणा को छोड़ किसी अन्य राज्य में नियम ही नहीं बने।

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यहां तक कि सिख बहुल राज्य पंजाब में भी नहीं। एडवोकेट नवकिरन सिंह की ओर से आरटीआई के तहत एकत्र की गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है।

नवकिरन सिंह ने यहां एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि सिखों के लिए आनंद मैरिज एक्ट साल 1909 में ही अस्तित्व में आ चुका था, लेकिन इसमें सिख रवायत के हिसाब से आनंद कारज के माध्यम से रचाई गई शादी के मामले में पंजीकरण का प्रावधान नहीं था।
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2010 में अनिवार्य किया गया था विवाह पंजीकरण

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सुप्रीम कोर्ट की ओर से शादी पंजीकरण को अनिवार्य बनाने के बाद साल 2012 में केंद्र की यूपीए सरकार ने आनंद मैरिज एक्ट में संशोधन कर पंजीकरण का प्रावधान शामिल किया था।

इसके बाद राज्यों को अपने स्तर पर पंजीकरण के नियम बनाने हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पंजाब में ही यह नियम नहीं बन सका जबकि यहां सिखों की आबादी सबसे अधिक है। यहां तक कि चंडीगढ़ और दिल्ली में भी यह नियम नहीं बन सका है।

पश्चिम बंगाल और मिजोरम में तैयारी
नवकिरन ने कहा कि हरियाणा की हुड्डा सरकार ने साल 2014 में पंजीकरण के नियम बना दिए और पश्चिमी बंगाल सरकार ने नियम बनाने के लिए हरियाणा से नियमों की प्रति मांगी है। मिजोरम जैसे राज्य नियम बनाने को प्रयास कर रहे हैं।

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