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अमृतसर: एसएसपी विजिलेंस, पूर्व डीआईजी व पूर्व एसएचओ बरी
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Updated Thu, 20 Apr 2017 09:34 AM IST
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एडिशनल सेशन जज प्रीति साहनी की अदालत में बुधवार को बड़ा फैसला आया है। अदालत ने बीस साल पुराने मामले में एसएसपी विजिलेंस आरके बख्शी, रिटायर्ड डीआईजी सुखदयाल सिंह भुल्लर व रिटायर्ड एसएचओ बलबीर सिंह को निचली अदालत से सुनाई गई तीन-तीन साल की सजा को चुनौती देने वाली अपील को स्वीकार करते हुए तीनों पुलिस अधिकारियों को बरी कर दिया है।
अमृतसर की अदालत ने 31 दिसंबर 1997 व पहली जनवरी 1998 की रात में लारेंस रोड पर सुखविंदर सिंह बल्ल (कमांडेंट सीआरपीएफ, सिक्किम) व रघुबीर सिंह बल्ल (कमांडेंट सीआरपीएफ, हैदराबाद) निवासी रंजीत एवेन्यू सी ब्लाक कोठी नंबर 2090 से मारपीट के मामले में 6 जुलाई 2013 को न्यायाधीश बीएस रॉय ने यह सजा सुनाई थी। अदालत के फैसले को एडिशनल सेशन जज की अदालत में 8 जुलाई 2013 को चुनौती दी गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए यह बड़ा फैसला आया।
अमर उजाला से बातचीत करते हुए आरके बख्शी ने कहा कि सच्चाई की जीत हुई है। नववर्ष के जश्न में दोनों भाई (कमांडेंट सुखविंदर सिंह बल्ल व रघुबीर सिंह बल्ल ने नशे में धुत्त होकर पहले लारेंस रोड पर तब तेज रफ्तार से गाड़ी चलाते हुए पहुंचे थे जब हजारों की गिनती में लोग जश्न मना रहे थे। पुलिस पार्टी ने उन्हें रोका तो दोनों ने ऊंची पहुंच दिखाकर पुलिस वालों से हाथापाई की और एक हवलदार अर्जुन से राइफल छीन ली। मौके पर दोनों को काबू कर लिया गया था। डिवाइडर पर धक्कामुक्की के दौरान सुखविंदर की बाजू टूट गई थी। इस पर आरोपियों ने उल्टा पुलिस पर मारपीट का झूठा मामला बताकर अदालत में इस्तगासा दायर किया था। खुशी है कि सच्चाई की जीत हुई है।
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अमृतसर की अदालत ने 31 दिसंबर 1997 व पहली जनवरी 1998 की रात में लारेंस रोड पर सुखविंदर सिंह बल्ल (कमांडेंट सीआरपीएफ, सिक्किम) व रघुबीर सिंह बल्ल (कमांडेंट सीआरपीएफ, हैदराबाद) निवासी रंजीत एवेन्यू सी ब्लाक कोठी नंबर 2090 से मारपीट के मामले में 6 जुलाई 2013 को न्यायाधीश बीएस रॉय ने यह सजा सुनाई थी। अदालत के फैसले को एडिशनल सेशन जज की अदालत में 8 जुलाई 2013 को चुनौती दी गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए यह बड़ा फैसला आया।
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अमर उजाला से बातचीत करते हुए आरके बख्शी ने कहा कि सच्चाई की जीत हुई है। नववर्ष के जश्न में दोनों भाई (कमांडेंट सुखविंदर सिंह बल्ल व रघुबीर सिंह बल्ल ने नशे में धुत्त होकर पहले लारेंस रोड पर तब तेज रफ्तार से गाड़ी चलाते हुए पहुंचे थे जब हजारों की गिनती में लोग जश्न मना रहे थे। पुलिस पार्टी ने उन्हें रोका तो दोनों ने ऊंची पहुंच दिखाकर पुलिस वालों से हाथापाई की और एक हवलदार अर्जुन से राइफल छीन ली। मौके पर दोनों को काबू कर लिया गया था। डिवाइडर पर धक्कामुक्की के दौरान सुखविंदर की बाजू टूट गई थी। इस पर आरोपियों ने उल्टा पुलिस पर मारपीट का झूठा मामला बताकर अदालत में इस्तगासा दायर किया था। खुशी है कि सच्चाई की जीत हुई है।
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पंजाब पुलिस की पैरवी कर रहे एडवोकेट अजय
कोर्ट
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पंजाब पुलिस की पैरवी कर रहे एडवोकेट अजय
विरमानी, वरूण बहल व सौरभ पंजगौत्रा ने बताया कि इस मामले में सीआरपीएफ के दोनों कमांडेंट ने अदालत में इस्तगासा दायर कर सिविल लाइन थाने में तीन जनवरी 1998 को दोनों कमांडेंट व गुरनाम सिंह निवासी चौक मन्ना के खिलाफ पुलिस पर हमला व नववर्ष के दौरान लारेंस रोड पर वाहनों पर प्रतिबंध के बाद कार में पहुंचे थे, पुलिस के रोकने के बाद तीनों ने पुलिस पार्टी पर हमला कर दिया था।
निचली अदालत ने इस मामले में तीनों पुलिस अधिकारियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई थी।
निचली अदालत से मिली सजा को चुनौती दी गई थी। बुधवार को न्यायाधीश ने तीनों पुलिस अधिकारियों को बरी कर दिया है जबकि दोनों कमांडेंट को उनकी प्रतिष्ठा व नेक चाल चलन के चलते जेल की सजा नहीं सुनाई है लेकिन दो-दो हजार रुपये का दंड दिया है।
विरमानी, वरूण बहल व सौरभ पंजगौत्रा ने बताया कि इस मामले में सीआरपीएफ के दोनों कमांडेंट ने अदालत में इस्तगासा दायर कर सिविल लाइन थाने में तीन जनवरी 1998 को दोनों कमांडेंट व गुरनाम सिंह निवासी चौक मन्ना के खिलाफ पुलिस पर हमला व नववर्ष के दौरान लारेंस रोड पर वाहनों पर प्रतिबंध के बाद कार में पहुंचे थे, पुलिस के रोकने के बाद तीनों ने पुलिस पार्टी पर हमला कर दिया था।
निचली अदालत ने इस मामले में तीनों पुलिस अधिकारियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई थी।
निचली अदालत से मिली सजा को चुनौती दी गई थी। बुधवार को न्यायाधीश ने तीनों पुलिस अधिकारियों को बरी कर दिया है जबकि दोनों कमांडेंट को उनकी प्रतिष्ठा व नेक चाल चलन के चलते जेल की सजा नहीं सुनाई है लेकिन दो-दो हजार रुपये का दंड दिया है।