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आतंकियों ने दो पंजाबियों की ली जान: पिता ने दी बेटे को मुखाग्नि, गांव में नहीं जले चूल्हे, हर आंख दिखी नम

Thu, 08 Feb 2024 09:37 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Thu, 08 Feb 2024 09:37 PM IST
सार

बुधवार की शाम श्रीनगर में आतंकियों ने पंजाब के दो युवकों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इनमें से एक युवक अमृतपाल सिंह का गुरुवार को पैतृक गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया है। पूरे गांव में शोक की लहर है। पंजाब सरकार ने दोनों युवकों के परिवार को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक मद्द प्रदान की है। 

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Amritpal Singh funeral took place in Amritsar of Punjab
विलाप करते परिजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

श्रीनगर में आतंकियों ने पंजाब के अमृतसर जिले के दो युवकों की गोली मारकर हत्या कर दी। दोनों अजनाला तहसील के गांव चमियारी के रहने वाले थे। गांव में मातम छाया है। ज्यादातर घरों में चूल्हे भी नहीं चले। अमृतपाल सिंह का शव दोपहर को गांव पहुंचा। कश्मीर पुलिस की टुकड़ी शव को ताबूत में लेकर चमियारी गांव पहुंची। शव को देखते ही मृतक के पिता सुरमुख सिंह अपने सबसे छोटे बेटे को मुखाग्नि देने के बाद फूट-फूट कर रोने लगे।

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अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह के घरों में कोहराम मचा है। अमृतपाल सिंह का गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। मृतक के पिता ने रोते हुए अपने पांच बच्चों में सबसे छोटे अमृतपाल को मुखाग्नि दी। अमृतपाल की अंतिम यात्रा में शामिल होने भारी संख्या में गांववासी पहुंचे। इस दौरान गांव के हर व्यक्ति की आंख नम थी। यहां तक कि शवयात्रा में शामिल पाठी सिंह की भी अरदास करने के बाद आंखें नम हो गईं।

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Amritpal Singh funeral took place in Amritsar of Punjab
मृतकों की फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

मंगलवार को ही गया था श्रीनगर

अमृतपाल सिंह (31) लकड़ी का काम करता है। वह गुरदासपुर निवासी एक ठेकेदार के कहने पर मंगलवार को ही रोहित मसीह (25) को हेल्पर के तौर पर साथ लेकर श्रीनगर काम करने गया था। बुधवार शाम आतंकियों ने दोनों को गोलियां मार दीं। अमृतपाल सिंह की तो मौके पर ही मौत हो गई जबकि रोहित मसीह ने उपचार के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया था।

परिवार को जब घटना की सूचना मिली तो वह सलामती की दुआ करने लगे। अमृतपाल पांच भाई-बहनों के परिवार में सबसे छोटा था। घर में गरीबी के चलते 12वीं के बाद ही वह लकड़ी (कारपेंटर) के काम में अपने पिता का हाथ बंटाने लगा था। इससे पहले भी वह श्रीनगर में कारपेंटर का काम कर चुका था। जबकि रोहित की छोटी बहन 11वीं में पढ़ रही है और वह खुद 12वीं तक पढ़ने के बाद परिवार की मदद के लिए काम में जुट गया था।

पंजाब सरकार ने की आर्थिक मदद

अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह के परिवारों को सरकार ने दो-दो लाख रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की है। मंत्री कुलदीप सिंह गुरुवार की देर शाम पीड़ित परिवारों से शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे। उन्होंने पीड़ित दोनों परिवारों के साथ अफसोस व्यक्त किया और पंजाब सरकार की ओर से दो-दो लाख रुपये के चेक सौंपे। धालीवाल ने कहा कि दुख की इस घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है। 

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