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चंडीगढ़ के इन 10 कलाकारों को अमृता शेरगिल अवार्ड
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 20 Jan 2015 03:46 PM IST
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शहर के दस कलाकारों को कला के क्षेत्र में योगदान के लिए सोमवार को अमृता शेरगिल अवार्ड प्रदान किया गया। यह आयोजन चंडीगढ़ ललित कला अकादमी ने कराया। गवर्नमेंट आर्ट म्यूजिम एंड गैलरी सेक्टर-10 में आयोजित समारोह में प्रोफेसर बीएन गोस्वामी ने आर्टिस्टों को एक ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।
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यहां आर्टिस्टों का काम आडियो वीडियो के माध्यम से दिखाया गया। इस मौके पर चंडीगढ़ ललित कला अकादमी के चेयरमैन दीवान माना भी मौजूद रहे।
इन्हें किया सम्मानित:
रणबीर कालेका, प्रेम सिंह, गुरचरण सिंह, ब्रह्मप्रकाश, अवतारजीत धंजल, अलका पांडे, वीरेंदर सिंह तंवर, सिद्धार्थ, राज के जैन को अवार्ड दिए गए। स्वर्गीय जगमोहन चोपड़ा का अवार्ड उनकी बेटी ने लिया।
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कलाकारों की विशेषताएं
रणबीर कालेका एक चित्रकार हैं। उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट से स्टडी की। उनकी खूबी ऑयल और मिक्स मीडिया की पेंटिंग है। फिल्मों में रुचि के लिए उन्होंने वीडियो आर्ट का फॉर्म दिया।
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प्रेम सिंह वर्ष 1962-1967 में गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट से पांच वर्षीय डिप्लोमा किया और एक साल के ब्रेक के बाद 35 साल तक इस कॉलेज में रहे। वह एक पेंटर हैं और कंटेम्परेरी आर्ट में मास्टर हैं।
गुरचरण सिंह की खूबी है पेंटिंग, ड्रॉइंग और स्केच तैयार करना। गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट से शिक्षा लेने के बाद अपना कैरियर भी यहीं शुरू किया।
ब्रह्मप्रकाश एक पेंटर और प्रिंट मेकर हैं। वह इंटेग्लियो और रिलीफ प्रोसेस मीडिया में काम करते हैं। 1976 में गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट सेक्टर-10 में फैकल्टी के तौर पर ज्वाइन किया। पेंटिंग और प्रिंट मेकिंग डिपार्टमेंट के हेड रहे।
अवतारजीत धंजल एक बेहतरीन मूर्तिकार हैं। उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट चंडीगढ़ से शिक्षा हासिल की। वुड कर्विंग से बना उनका पहला स्कल्पचर चंडीगढ़ म्यूजियम ने वर्ष 1966 में खरीदा। वह अब लंदन में हैं।
अलका पांडे कला समीक्षक, संस्कृति विचारक और क्यूरेटर और लेखिका होने के साथ एक बेहतर अध्यापिका हैं। वे इंडिया हैबिटेट सेंटर की विजुअल आर्ट गैलरी की क्यूरेटर हैं। वे पंजाब यूनिवर्सिटी के फाइन आर्ट्स डिपार्टमेंट की हेड भी रही हैं।
प्रिंट मेकर आर्टिस्ट जगमोहन चोपड़ा का निधन मार्च 2013 में हुआ था। मॉडर्न आर्ट को प्रोमोट करने में इनका काफी योगदान रहा है। गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट के फॉर्मर प्रिंसिपल, गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी के डायरेक्टर और चंडीगढ़ ललित कला अकादमी के सचिव का पदभार संभाला था।
वीरेंदर सिंह तंवर पेंटर, स्कल्पचर और इंस्टॉलेशन आर्टिस्ट हैं। 1969-1974 के समय में आर्ट कॉलेज से पांच साल का डिप्लोमा किया। दस साल तक इसी कॉलेज में पढ़ाया। प्रिंट मेकिंग के विभागाध्यक्ष रहे।
नई दिल्ली के रहने वाले सिद्धार्थ एक पेंटर और मूर्तिकार हैं। शोभा सिंह से कला के गुण लेने के बाद चंडीगढ़ के आर्ट कॉलेज से शिक्षा हासिल की। मिनरल और वेजिटेबल कलर्स से कैनवास को पेंट करते हैं।
राज जैन गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट में प्रोफेसर रहे हैं। जैन एक पेंटर हैं। चंडीगढ़ में क्रिएटिव आर्ट की प्रमोशन में उनका खासा योगदान रहा। वह अब मुंबई में रहते हैं। उनकी पेंटिंग आसपास के माहौल पर आधारित होती है।