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'रॉक लेजेंड' नेकचंद के 'वंडरलैंड' रॉक गार्डन को बचाने आए अमेरिकन आर्टिस्ट, देंगे नया रूप
Sat, 15 Feb 2020 12:46 PM IST
खुशबू गोयल
रूबी सिंह, चंडीगढ़
रूबी सिंह, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 15 Feb 2020 12:46 PM IST
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रॉक गार्डन
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चंडीगढ़ की धरोहर और देश विदेश में तआकर्षण का केंद्र बने रॉक गार्डन की खूबसूरत मूर्तियां टूट रही हैं। पद्मश्री नेकचंद की सपनों की दुनिया की हालत खराब है। रॉक गार्डन की हालत को देख भले प्रशासन के अधिकारियों ने इस आर्टिस्ट के तरीके से न देखा हो, लेकिन अमेरिकन आर्टिस्ट का दिल रॉक गार्डन की हालत को देखकर दुखा है। यही वजह है कि पूरी दुनिया से चंडीगढ़ की इस शान कहलाए जाने वाले रॉक गार्डन की हालत को देखकर ही अमेरिकन आर्टिस्ट आगे आए हैं।
जाहरिस एलिमेंटरी मेसा के प्रिंसिपल एवं शिक्षिका जूली वॉ ने प्रशासक चंडीगढ़ वीपी सिंह बदनौर को पत्र लिखकर इसे बचाने का आग्रह किया है। जाहरिस एलिमेंटरी, मेसा अकादमी की ओर से आर्टिस्ट एवं शिक्षिका जूली वॉ के नेतृत्व में यह कार्य करना चाहती है। इसमें उनकी अकादमी के थर्ड ग्रेड स्टूडेंट की टीम काम करेंगी। अकादमी की यह पत्र प्रशासक को ईमेल के जरिये भेजा गया है। प्रशासक केअलावा यह पत्र होम सेक्रेटरी को भी भेजा गया है।
रॉक गार्डन को बचाने चाहते हैं अकादमी
जहरिस एलिमेंटरी प्रिंसिपल माइक ओलिवर, क्लास टीचर जूली वॉ की टीम यह कार्य करना चाहती हैं। प्रिंसिपल माइक ने रॉक गार्डन के वर्क को मास्टर पीस कहते हुए कहा कि अकादमी इसे उसी लुक में मुरम्मत करना चाहती है। अकादमी के प्रिंसिपल ने कहा कि वे चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से उनकी इच्छा के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
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जाहरिस एलिमेंटरी मेसा के प्रिंसिपल एवं शिक्षिका जूली वॉ ने प्रशासक चंडीगढ़ वीपी सिंह बदनौर को पत्र लिखकर इसे बचाने का आग्रह किया है। जाहरिस एलिमेंटरी, मेसा अकादमी की ओर से आर्टिस्ट एवं शिक्षिका जूली वॉ के नेतृत्व में यह कार्य करना चाहती है। इसमें उनकी अकादमी के थर्ड ग्रेड स्टूडेंट की टीम काम करेंगी। अकादमी की यह पत्र प्रशासक को ईमेल के जरिये भेजा गया है। प्रशासक केअलावा यह पत्र होम सेक्रेटरी को भी भेजा गया है।
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रॉक गार्डन को बचाने चाहते हैं अकादमी
जहरिस एलिमेंटरी प्रिंसिपल माइक ओलिवर, क्लास टीचर जूली वॉ की टीम यह कार्य करना चाहती हैं। प्रिंसिपल माइक ने रॉक गार्डन के वर्क को मास्टर पीस कहते हुए कहा कि अकादमी इसे उसी लुक में मुरम्मत करना चाहती है। अकादमी के प्रिंसिपल ने कहा कि वे चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से उनकी इच्छा के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
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सोशल मीडिया पर भी रॉक गार्डन की खराब हालत की निंदा
नेक चंद सैनी की सपनों की दुनिया रॉक गार्डन में चूड़ियों से बनीं मूर्र्तियों में दरारे आ गई है। पर्यटकों का स्वागत टूटी हुई मिट्टी की मटकियां करती हैं। इतना ही नहीं झरने के पूल के एक किनारे में इतनी दरारें हैं कि अगर थोड़ा सा भी ज्यादा भार पड़ा तो टूट सकता है।
रॉक गार्डन की इस खस्ता हालत से सोसायटी फार द मेंटेनेंस एंड डेवपलमेंट ऑफ रॉक गार्डन चंडीगढ़ के प्रशासनिक अधिकारी बेखबर है। इनके पास इनको रिपेयर करवाने तक का समय नहीं है जबकि रॉक गार्डन के कर्मचारी एवं पर्यटकों की ओर से सभी कई बार रॉक गार्डन की हालत पर सोशल मीडिया पर भी अपने विचार रखे है। लेकिन किसी की ओर से कोई भी कदम नहीं उठाया जा रहा है।
2018 में एक भी दिन नहीं हुई मीटिंग, अभी भी मीटिंग राम भरोसे
रॉक गार्डन की मेंटेनेंस सोसायटी की पिछले 2018 में एक भी नहीं हुई है। हालांकि यह सोसायटी चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से गठित की हुई है। जो रॉक गार्डन की देखरेख का जिम्मा उठा रही है। सोसायटी फार द मेंटेनेंस एंड डेवलपमेंट आफ रॉक गार्डन के चेयरमैन होम सेक्रेटरी, मेंबर सेक्रेटरी, डीसी यूटी, चीफ आर्किटेक्ट अधिकारी के नेतृत्व में कार्य करती है।
रॉक गार्डन की इस खस्ता हालत से सोसायटी फार द मेंटेनेंस एंड डेवपलमेंट ऑफ रॉक गार्डन चंडीगढ़ के प्रशासनिक अधिकारी बेखबर है। इनके पास इनको रिपेयर करवाने तक का समय नहीं है जबकि रॉक गार्डन के कर्मचारी एवं पर्यटकों की ओर से सभी कई बार रॉक गार्डन की हालत पर सोशल मीडिया पर भी अपने विचार रखे है। लेकिन किसी की ओर से कोई भी कदम नहीं उठाया जा रहा है।
2018 में एक भी दिन नहीं हुई मीटिंग, अभी भी मीटिंग राम भरोसे
रॉक गार्डन की मेंटेनेंस सोसायटी की पिछले 2018 में एक भी नहीं हुई है। हालांकि यह सोसायटी चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से गठित की हुई है। जो रॉक गार्डन की देखरेख का जिम्मा उठा रही है। सोसायटी फार द मेंटेनेंस एंड डेवलपमेंट आफ रॉक गार्डन के चेयरमैन होम सेक्रेटरी, मेंबर सेक्रेटरी, डीसी यूटी, चीफ आर्किटेक्ट अधिकारी के नेतृत्व में कार्य करती है।
करोड़ से अधिक राशि हो चुकी है जमा
रॉक गार्डन जब से बना है तब से लेकर अब तक इसकी एंट्री पास से ही करीब आठ करोड़ से अधिक राशि जमा हो चुकी है, लेकिन इस राशि का प्रयोग कहां हो रहा है, इसका किसी को पता नहीं है।
म्यूजियम का काम अधूरा
अपने जीते जी स्वर्गीय नेकचंद ने रॉक गार्डन के फेस थ्री में एक म्यूजियम बनाने की इच्छा जाहिर की और उन्होंने इसको बनाना शुरू भी करवाया। लेकिन जितने वे कर पाए, उतनी इसकी इमारत बन गई। उनके निधन के बाद म्यूजियम को काम भी रोक दिया गया। अब यहां एमसी के डस्टबिन की जगह बना दी गई है।
आधे से ज्यादा झूले टूटे
फेस तीन में बने झूलों की भी हालत खस्ता है। यहां झूले आधे से जयादा टूटे पडे़ है। तो यहां कई एरिया के पत्थर घिस गए हैं कि वहां चलने से फिसलने का डर है। रॉक गार्डन में न पानी की व्यवस्था है और न ही बैठने की। यहां आने वाले पर्यटकों ने इसकी कमी भी महसूस की। जिन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यहां पानी की व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए। यहां काफी कार्य अधूरे पडे़ हैं।
म्यूजियम का काम अधूरा
अपने जीते जी स्वर्गीय नेकचंद ने रॉक गार्डन के फेस थ्री में एक म्यूजियम बनाने की इच्छा जाहिर की और उन्होंने इसको बनाना शुरू भी करवाया। लेकिन जितने वे कर पाए, उतनी इसकी इमारत बन गई। उनके निधन के बाद म्यूजियम को काम भी रोक दिया गया। अब यहां एमसी के डस्टबिन की जगह बना दी गई है।
आधे से ज्यादा झूले टूटे
फेस तीन में बने झूलों की भी हालत खस्ता है। यहां झूले आधे से जयादा टूटे पडे़ है। तो यहां कई एरिया के पत्थर घिस गए हैं कि वहां चलने से फिसलने का डर है। रॉक गार्डन में न पानी की व्यवस्था है और न ही बैठने की। यहां आने वाले पर्यटकों ने इसकी कमी भी महसूस की। जिन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यहां पानी की व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए। यहां काफी कार्य अधूरे पडे़ हैं।