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हरियाणा विधानसभाः पीएलपीए संशोधन पर अडिग रहेगी सरकार, सीएम बोले- जरूरी था बदलाव

Wed, 22 Jan 2020 01:58 PM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 22 Jan 2020 01:58 PM IST
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Amendments in PLP Act Haryana Government, Punjab Land & Preservation Act
हरियाणा विधानसभा सत्र
हरियाणा सरकार ‘पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट’ (पीएलपीए) में किए गए संशोधन पर फिलहाल अडिग रहेगी। हालांकि इस संदर्भ में  विभिन्न याचिकाएं अदालतों में विचाराधीन हैं, मगर सरकार आगामी आदेशों तक अपने स्टैंड पर कायम रहेगी। यह बात मंगलवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विधानसभा में विधायकों के प्रशिक्षण सत्र के दौरान स्पष्ट कर दी। वह सीएम सदन में पेश होने वाले नए बिलों एवं संशोधन विधेयकों को भविष्य में सदन में लाने की नई व्यवस्था पर बात कर रहे थे।
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तभी उन्होंने पीएलपीए का उदाहरण देते हुए यह बताने का प्रयास किया आज बहुत से विधेयक ऐसे हैं, जो आज के परिवेश में व्यवहारिक नहीं हैं। लिहाजा उनमें संशोधन या उन्हें हटाने की जरूरत है। सीएम के अनुसार पीएलपीए भी इसी तरह का विधेयक है। जिसे सन 1900 में तैयार किया गया था।  सीएम ने उस वक्त इस विधेयक (अधिनियम) को लागू करने का मकसद भी सदन में बताया।
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सीएम ने कहा कि इस विधेयक के तैयार होने के करीब 120 साल बाद आज परिस्थितियां कुछ और हैं, उस वक्त बात कुछ और थी। इसलिए हम पीएलपीए से संबंधित संशोधन विधेयक  सदन मेंलाए और उसे सदन में पास करवाया। सीएम के अनुसार यह और बात है कि इस संदर्भ में याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट में विचाराधीन है, मगर आगामी आदेशों तक सरकार अपने फैसले पर अडिग है, क्योंकि हमें लगता है कि आज के परिदृश्य में पीएलपीए में संशोधन जरूरी था।
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यह था इस विधेयक का मकसद

अंग्रेजों के समय में सन 1900 में जब इस बिल को तैयार किया गया था, तो उस वक्त यह कानून मिट्टी के कटाव को बचाने के लिए लागू किया गया था। यह अधिनियमन के उस समय संयुक्त पंजाब के लिए लागू किया गया था। अब यह पूरे हरियाणा राज्य के लिए भी लागू है।

शिवालिक पहाड़ियों के साथ उत्तरी हरियाणा के क्षेत्र जहां बीहड़ और ढलवा इलाकों में पानी के प्रवाह के कारण मिट्टी का कटाव होने का खतरा है और दक्षिणी और पश्चिमी हरियाणा क्षेत्र जहां हवा और पानी दोनों से कटाव होने का खतरा है, जो इस कानून के अंतर्गत कुछ गतिविधियों पर प्रतिबंध रखा गया है। दक्षिणी क्षेत्र में अरावली की पहाड़ियां शामिल है। यह कहा गया था कि यह अधिनियम प्रदेश के कुछ भागों के बेहतर संरक्षण और सुरक्षा प्रदान करने के लिए है, इसलिए हरियाणा में भी इसे लागू किया जायेगा।

30 जनवरी को हाईकोर्ट में सरकार को देना है जवाब
 इस संदर्भ में एक याचिका शिवालिक विकास मंच के  चेयरमैन विजय बंसल ने हाईकोर्ट में लगा रखी है। बंसल का कहना है कि वैसे तो इस संशोधन का अधिकार प्रदेश सरकार को नहीं है। ये मामला केंद्र स्तर का है। उनके अनुसार यदि पीएलपीए में संशोधन पूरी तरह से लागू हो जाता तो हरियाणा में वन क्षेत्र को खतरा हो जाएगा।

वन क्षेत्र में अवैध माइनिंग, पेड़ों के कटाव, भूमिगत जल स्तर गिरना, इमारतों के निर्माण होने से पर्यावरण प्रभावित होने की संभावनाएं भी प्रबल हो जाएंगी। कई भू एवं खनन माफिया भी इसका फायदा उठा सकते हैं। इस याचिका पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 30 जनवरी को हरियाणा सरकार को अपना पक्ष रखने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में भी इस संदर्भ में मामला विचाराधीन है।

हमने विधानसभा अध्यक्ष से इस बात का भी अनुरोध किया कि हरियाणा गठन के बाद या उससे पूर्व के जो भी बिल पारित हुए हैं। उनकी एक सूची बनाई जाए और जो बिल काफी पुराने और व्यवहार्य नहीं है, उनको हटाया जाए। वन विभाग का पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम (पीएलपीए) वर्ष 1900 में बना था, जो भूमि के कटाव को रोकने के लिए बनाया गया था, क्योंकि पहले इस प्रकार की सड़कें व नहरें नहीं थी, जो वर्तमान में हैं। इसलिए हरियाणा ने गत वर्ष पीएलपीए में संशोधन किया।
- मनोहर लाल, मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार
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