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हुनरः 200 साल पुरानी कला को संजोए हैं 150 परिवार, दिलचस्प कहानी

Mon, 07 Nov 2016 09:23 PM IST
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 07 Nov 2016 09:23 PM IST
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amazing story of andhra pradesh village people, who preserved 200 years old art work
नेशनल क्राफ्ट मेला में आए कलाकार
150 परिवारों का एक गांव। हर परिवार का हर सदस्य में गजब का हुनर, वो भी 200 साल पुरानी कला को लेकर। इसी से रोजी रोटी कमाते हैं। न कोई सुविधा और न कोई मशीन। हाथों से मूर्तियां तराशते, जिसमें तीन से चार महीने लगते। आंध्रप्रदेश जिले के गांव माथोवाला के कलाकारों की टीम चंडीगढ़ आई तो उनकी ये दिलचस्प कहानी पता चली।
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अमर उजाला से खास बातचीत में गांव के ही एक कलाकार दोरा स्वामी बताते हैं कि इनके पास 650 रुपये से लेकर 80 हजार रुपये तक की कलाकृतियां  है। यह सभी मूर्तियां देवताओं की हैं। इनमें  गणेश, लक्ष्मी, राधा कृष्ण, बालाजी की  हैं। इनकी खास बात है कि यह भी दोरा स्वामी की हाथों से सिंगल लकड़ी पर बनाई गई हैं।
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दोरा स्वामी ने बताया वह आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के माथोवाला गांव के रहने वाले हैं। उनके वंशज करीब 200 वर्षों से इस कला से जुड़े हुए हैं। स्वामी ने बताया कि गांव के सभी 150 परिवार इस काम से अपनी रोजी रोटी चलाते हैं। स्वमी ने बताया एक एक कलाकृति को लकड़ी पर उकारने केलिए दो से चार महीने तक समय लगता है। यह सभी हाथ से बनाई जाती हैं जिनमें किसी तरह का कोई मशीनी काम नहीं होता।
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छह फीट के राधा कृष्ण, कीमत 80 हजार

amazing story of andhra pradesh village people, who preserved 200 years old art work
नेशनल क्राफ्ट मेला में आई कलाकृतियां
दोरा स्वामी के स्टाल पर  650 रुपये से लेकर 80 हजार रुपये तक की शानदार वुडन पर तराशी गई कलाकृतियां हैं। यह भी सांगवान की सिंगल लकड़ी पर तराशी गई हैं। इनमें सबसे कम 650 रुपये की गणेश जी मूर्ति है और सबसे महंगी राधा कृष्ण की छह फीट की कलाकृति है जिसकी कीमत 80 हजार रुपये है जोकि छह फीट की है। वहीं,  3 फीट केबालाजी की कीमत 25 हजार रुपये है। महीनों की मेहनत के बाद तैयार होती है।

पिछले साल दो लाख में बिकी थी बालाजी
उन्होंने बताया कि वह इस क्राफ्ट मेले में पिछले पांच साल से शामिल हो रहे हैं। पिछले साल उनकी बनाई बालाजी की कलाकृति 2 लाख रुपये में सिटी के कस्टमर ने खरीदी थी।
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