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अमर उजाला संवाद: GST के नफा-नुकसान पर बहस, देखिए किसने क्या कहा...

Thu, 02 Nov 2017 09:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 02 Nov 2017 09:11 AM IST
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Amarujala samvad on GST effect, chandigarh news
Amarujala Samvad
नोटबंदी और जीएसटी के बाद इस बार व्यापार की तस्वीर एकदम बदल चुकी है। आमतौर पर दीपावली का त्योहार कारोबार और व्यापार के लिए उत्साहवर्धक होता है पर असंगठित क्षेत्र के व्यापारियों का कहना है कि इस वर्ष नोटबंदी और जीएसट ने कारोबार प्रभावित किया है। खुदरा कारोबारियों के इस संगठन का दावा है कि दीपावली बिक्री में पिछले साल की तुलना में 40 प्रतिशत की गिरावट आई और यह पिछले 10 सालों की सबसे सुस्त दीपावली मानी जा रही है। इसको लेकर अमर उजाला द्वारा चंडीगढ़ सेक्टर-9 के कार्यालय में ‘संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें सिटी के प्रतिष्ठित रिटेलर्स, जीएसटी एक्सपर्ट और अर्थशास्त्री ने भाग लिया। इनके अनुसार दिवाली पर ट्राइसिटी का व्यापार तीस से चालीस फीसदी तक गिर गया। 
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कैट का दावा दस साल में सबसे सुस्त दिवाली
खुदरा कारोबारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार देश में सालाना करीब 40 लाख करोड़ रुपये का खुदरा कारोबार होता है। इसमें संगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी महज पांच प्रतिशत है जबकि शेष 95 प्रतिशत योगदान असंगठित क्षेत्र का है। जो बयान में बताया गया उसके अनुसार दीपावली के त्योहार के दस दिन पहले से शुरू होने वाली त्योहारी बिक्री पिछले सालों में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की रही है।
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इस साल यह 40 प्रतिशत नीचे गिर गई और इस दृष्टि से यह पिछले दस सालों की सबसे सुस्त दीपावली रही है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा कि बाजारों में उपभोक्ताओं की कम उपस्थिति, सीमित खर्च आदि इस बार दीपावली के कारोबार के कम रहने के मुख्य कारण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नोटबंदी के बाद अस्थिर बाजार तथा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था की दिक्कतों ने बाजार में संशय का माहौल तैयार किया जिसने उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों की धारणा प्रभावित की। रेडीमेड कपड़े, उपहार के सामान, रसोई के सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, एफएमसीजी वस्तुएं, घड़ियां, बैग-ट्रॉली, घर की साज-सज्जा, सूखे मेवे, मिठाइयां, नमकीन, फर्नीचर, लाइट-बल्ब आदि चीजें दीपावली के दौरान मुख्य तौर पर खरीदी जाती हैं। 
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आगे देखिए संवाद का वीडियो

Amarujala samvad on GST effect, chandigarh news
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दिवाली के मौके पर व्यापार पिछले तीन वर्ष की गिरावट पर रहा। कपड़े का व्यापार अबकी बार पिछले तीन साल के मुकाबले सत्तर फीसदी व्यापार कम हो गया। इसकी प्रमुख वजह नोटबंदी है। पहले लोगों के पास पांच से सात लाख रुपये होते थे। नोटबंदी के बाद घरों में महिलाओं तक ने पैसे रखने बंद कर दिए। अब घर में जो पैसे हैं वह जरूरत के लिए रखे जाते हैं। खरीदारी के लिए उन पैसों का इस्तेमाल कोई नहीं करता है। इसके बाद डिजिटाइजेशन ने आम लोगों को कम खर्च पर सीमित कर दिया। मसलन मैं यदि ज्वेलरी लेता हूं तो वह भी हमको दिखाना होगा। ऐसा लगता है जो कानून बनाए जा रहे हैं वह व्यापार को प्रभावित करने के लिए बनाए जा रहे हैं। मैं समझता हूं कि नोटबंदी, जीएसटी और डिजिटाइजेशन छोटे व्यापारियों को खत्म कर देगा। 
अरविंद जैन, महासचिव क्लाथ, रिटेलर्स एसोसिएशन

===यहां देखें वीडियो===


मैं इलेक्ट्रानिक्स गुड्स का कारोबार करता हूं। हमारे ज्यादातर आइटम दीपावली से संबंधित हैं। कारपोरेट हाउस, आम आदमी, इंडस्ट्री सभी बहुतायत में गिफ्ट लेते हैं। अबकी बार हमारा कारोबार चालीस से पचास फीसदी तक कम रहा। जो कारपोरेट्स पहले दो हजार रुपये तक का गिफ्ट लेते थे, वह अबकी बार पांच सौ से छह सौ रुपये तक का गिफ्ट तलाश रहे थे। इसके साथ ही हमारे ट्रेड पर आया यह प्रभाव आनलाइन मार्केट और मॉल्स कल्चर से भी प्रभावित रहा। वास्तव में दिवाली की खरीदारी में आई गिरावट में कई इश्यू का एक साथ एकत्र हो जाना है। यदि आप यह कहें कि आनलाइन मार्केट की वजह से रिटेल बिजनेस खराब हुआ तो ऐसा भी नहीं है। आनलाइन कंपनियों ने तीन से चार बार सेल लगाईं। इसका अर्थ है कि सेल ज्यादा नहीं हुई। वहीं बड़े मॉल्स में भी सस्ते गिफ्ट की खरीदारी ही हुई। 
अजय गुप्ता, वाइस प्रेसीडेंट, जनरल सेकेट्री हिमालयन मार्ग

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हमारा प्रोडक्ट रियल एस्टेट से संबंधित है। बिल्डिंग मैटेरियल में बोर्ड और पीवीसी की सप्लाई हम करते हैं। आमतौर पर दीपावली के पहले और उसके आसपास ज्यादा डिलीवरी हो जाती है। अबकी बार ऐसा नहीं हुआ। हम सबसे ज्यादा जीएसटी से प्रभावित हैं। बिल्डिंग मैटेरियल में कुछ में 28 फीसदी जीएसटी है। पहले टैक्स कम था। ऐसी स्थिति में ग्राहक चूजी हो गया है। वह अपने दो निर्माण कम कर देता है। ऐसा नहीं है कि सप्लाई खत्म हो गई है, असल में वह गिर गई है। जीएसटी तो जैसे लाद दिया गया, व्यापारियों को समझ तक नहीं आया। रिटर्न का सिस्टम ऐसा है, जिससे व्यापारी का पैसा ब्लाक होने लगा। इससे स्टाक कम हो गया। जो मुझे दिखाई दिया है उससे ऐसा लगता है कि अर्थव्यवस्था में लाए जाने वाले यह परिवर्तन छोटे व्यापारियों के हित में नहीं है। 
जगदीश अरोड़ा, चेयरमैन, चंडीगढ़ बिजनेस काउंसिल

===यहां देखें वीडियो===


हमारा रेडीमेड गारमेंट का काम है। रिटेल बिजनेस सीधा प्रोडक्शन से कनेक्ट है। अब रिटेल व्यापारी का माल निकलेगा नहीं तो प्रोडक्शन खत्म हो जाएगी। हमको चार माह के दौरान जीएसटी समझ में नहीं आया है। अबकी बार दीपावली पर हमारा व्यापार चालीस फीसदी तक घट गया। मैं तीन साल पहले की बात करूं तो बिजनेस बेहतरीन था लेकिन अबकी बार तो ग्राहक को हम तरस गए। रिटेल का व्यापार एफडीआई के तहत आए बड़े बड़े माल्स से भी प्रभावित हुआ है। मॉल्स आना अच्छी बात है पर हमारे ऊपर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए, वहां ऐसा माहौल तैयार करना चाहिए जो हमारे अनुकूल हो। लेकिन जो नए नियम बनाए जा रहे हैें वह किसी भी तरह से व्यापारियों के लिए हितकर नहीं हैं।
जेपीएस कालरा, महासचिव, जनरल सेकेट्री ट्रेडर एसोसिएशन

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मुझको ऐसा लगता है कि जीएसटी छोटे ट्रेडर को खत्म कर देगी। मेरा कास्मेटिक का काम है। जब से जीएसटी लागू हुई मैं व्यापार को बढ़ाने के बजाय अपने लिए सीए ढूंढता घूम रहा हूं। आमतौर पर दिवाली के समय पर माल भर लेते हैं पर अबकी बार ऐसा नहीं किया। ऐसा सिर्फ मैने ही नहीं बल्कि कइयों ने नहीं किया। इसकी वजह रही कि व्यापारी को डर है कि कहीं कोई नया नियम न आ जाए और स्टाक फंस जाए। दिवाली के सीजन के पहले करवाचौथ भी शामिल है। उस दौरान जो आकलन किया, वह यह था कि महिलाओं ने भी अपनी खरीदारी में कंजूसी बरती। जो लेडीज चार लिपिस्टिक लेती थीं वह दो लिपिस्टिक पर सीमित रह गईं। इसकी वजह नोटबंदी से कनेक्टेड है क्योंकि महिलाएं पहले अपने पास खरीदारी के लिए पैसा रखती थीं अब ऐसा नहीं रह गया है। इसी वजह से खरीदारी क्षमता भी कम हो गई है।  
रविंदर सिंह , चेयरमैन (लेबर सेल) चंडीगढ़ व्यापार मंडल

छह माह पहले सोने में एक हजार रुपये का अंतर होता था। अब मार्केट में सोने के दामों में दो हजार रुपये का अंतर आ चुका है। सोने में दो हजार रुपये का अंतर आने के बावजूद मार्केट में ग्राहक नहीं है। बाजार में सुस्ती की बात करें तो अबकी बार दिवाली में हमारा व्यापार साठ फीसदी तक नीचे आ गया। अब हमारी मार्केट में व्यापारियों के बीच में चर्चा होती है कि इस काम को बंद करके कोई और काम खोल लें। वास्तव में सोने के बाजार में आई इस कमी का कारण है खरीदार से आई कार्ड मांगना। कोई पचास हजार रुपये की खरादारी करने आता है और हम उससे आई कार्ड मांगते हैं तो उसके भीतर एक भय भी पैदा होता है और वह दोबारा नहीं आता है। दो लाख रुपये के ऊपर पैन कार्ड लेना ठीक है। 
संजय सहगल, इंडियन ज्वेलर्स एसोसिएशन , महासचिव, चंडीगढ़ ज्वेलरी एसोसिएशन

मैं लेदर गुड्स का काम करता हूं। दिवाली में ग्राहक भी होते थे और खरीदारी भी। अबकी रौनक तो रही पर खरीदारी नहीं हुई। हमारा व्यापार पिछले तीन वर्ष के दौरान एकदम गिर गया है। जीएसटी से ज्यादा जीएसटी का पैनिक था। दीवाली का समय खरीदारी का समय होता है, सामान लाने का समय होता है पर अबकी बार हम जीएसटी को ही समझते रह गए। हमारी सेल अबकी बार पच्चीस से तीस फीसदी हमारा व्यापार कम हुआ। इसमें पब्लिक के पास कैश कम होना एक प्रमुख वजह है। वैसे, यदि मैं ओवरआल बात करूं तो जीएसटी के साथ ही नोटबंदी और महंगाई प्रमुख हैं। सिर्फ मेरा ही नहीं, मेरे आसपास की अन्य दुकानों का व्यापार भी एकदम कम रहा। 
संजीव चड्ढा, लेदर गुड्स
 
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