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कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खोली चीन की पोल, बोले- गलवां घटना को गश्त के दौरान झड़प कहना बड़ी भूल

Wed, 24 Jun 2020 01:13 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 24 Jun 2020 01:13 AM IST
सार

  • पंजाब के सीएम बोले, चीन किसी योजना के तहत कर रहा है काम 
  • कैप्टन बोले- दौलतबेग दूरी को बंद करने की कोशिश में है चीनी सेना

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Amarinder Singh said, It is a big mistake to call Galwan incident as a clash during patrolling
कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गलवां घाटी में गश्त के दौरान हुई हिंसा को झड़प कहने को बड़ी भूल बताया है। कैप्टन ने इसे चीन के बड़े मंसूबे का हिस्सा बताते हुए कहा है कि देश को भारतीय क्षेत्र में चीन के किसी भी हमले के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाना चाहिए। कैप्टन कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरफ से आयोजित कांग्रेस वर्किंग कमेटी की वीडियो कॉन्फ्रेंस में अपना विचार रख रहे थे। कैप्टन ने कहा कि यदि हम एक इंच जगह भी गंवाते हैं तो वह जिम्मेदार होंगे। कॉन्फ्रेंस में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, राहुल गांधी और अन्य भी शामिल हुए। 

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कैप्टन ने कहा कि गलवां घाटी में हुआ घटनाक्रम दर्शाता है कि चीन किसी योजना के तहत काम कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में एक इंच जगह भी भारत को नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हम पाकिस्तान और चीन के साथ अपने समय की सभी झड़पें देख चुके हैं और यह निश्चित तौर पर गश्त के दौरान हुई झड़प नहीं है।' 
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क्षेत्र के नक्शे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से 1963 में पाक कब्जे वाले कश्मीर में शकसगाम घाटी के उत्तरी हिस्से को छोड़ देने के बाद चीन सियाचिन ग्लेशियर के आधे तक पहुंच गया था। उन्होंने विस्तार में बताया कि ग्लेशियर और अक्साई चिन क्षेत्र के बीच थोड़ी दूरी है, जिसे दौलत बेग दूरी कहते हैं, जिसे चीनी बंद करने की कोशिश कर रहे हैं।

केंद्र से 2800 करोड़ मिले, जीएसटी का बकाया अब तक नहीं

मुख्यमंत्री ने राज्य की कोविड के खिलाफ जंग में केंद्र द्वारा मदद न करने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पंजाब को केंद्र से राज्य के हिस्से के जनवरी से मार्च तक के 2800 करोड़ व थोड़ी अन्य ग्रांट ही प्राप्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के अप्रैल से जून के जीएसटी बकाया अभी तक नहीं मिले। उन्होंने कहा कि बार-बार अपीलों और मांग पत्रों के बावजूद केंद्र से राज्य को कोविड संकट से लड़ने में कोई सहायता नहीं की। पंजाब को 20 लाख करोड़ रुपये के घोषित पैकेज में से एक पैसा भी प्राप्त नहीं हुआ है।

कोविड के खिलाफ अपने स्रोतों से लड़ने को मजबूर कर रहा केंद्र
कैप्टन ने कहा कि उनकी सरकार को अपने स्रोतों के प्रबंध के साथ कोविड के खिलाफ लड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि उनको यकीन है कि अन्य राज्य भी इतने विपरीत हालातों का सामना कर रहे हैं। केंद्र द्वारा कोई सुनवाई न किए जाने पर अफसोस जाहिर किया। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें 500 रेलगाड़ियां से 5.63 लाख कामगारों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने में 35 करोड़ रुपए का खुद प्रबंध करना पड़ा।  मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में कुल 2.52 लाख उद्योगों में से 2.33 लाख उद्योग फिर से चालू हो गए हैं और प्रवासी मजदूर भी अब राज्य में वापस आ रहे हैं। 

आहलूवालिया कमेटी की वित्तीय टीम ने सौंपी रिपोर्ट
राज्य की अर्थव्यवस्था बहाली की योजना के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्य नीति तैयार करने के लिए मोंटेक सिंह आहलूवालिया कमेटी सरकार के साथ अपनी फीडबैक साझा कर रही है, जिसके मुताबिक ही अगला रास्ता तैयार किया जा रहा है। इस कमेटी के छह वर्किंग ग्रुप हैं, जिनमें से वित्त संबंधी टीम ने पहले ही अपनी रिपोर्ट सौंप दी है जबकि अन्यों टीमों द्वारा भी जल्द ही रिपोर्ट सौंप देने की आशा है।

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