'अमरिंदर का नौ सूत्रीय कार्यक्रम इंदिरा के गरीबी हटाओ जैसा'
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शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब कांग्रेस के नौ सूत्रीय कार्यक्रम को शिगूफा करार दिया है। शिअद ने कहा है कि कांग्रेस का यह नाटक पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के गरीबी हटाओ नारे की तरह का है। मगर ऐसे नारों को हमेशा भुनाया नहीं जा सकता।
पंजाब के शिक्षा मंत्री और शिअद के प्रवक्ता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस ने ही सबसे ज्यादा राज्यों में सरकारें बनाईं। मगर किसी भी सरकार ने अमरेंदर की तरह की सुविधाएं देने के हवाई वादे नहीं किए।
खास बात यह है कि अमरिंदर ने अपने 2002-07 के कार्यकाल में इन्हीं नौ सूत्री कार्यक्त्रस्मों के विपरीत काम किए। प्रदेश के 40 लाख परिवारों में से हर एक परिवार के सदस्य को नौकरी देने का वादा करने वाले अमरिंदर ने अपने कार्यकाल में नौकरियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।
अगर उन्होंने बीस लाख नौकरियां दीं होती तो 2007 में पंजाब में बेरोजगारी का संकट न होता। कृषि ऋणों को माफ करने के वादे पर चीमा ने कहा कि अमरेंदर पहले यह बताएं कि उन्होंने कर्ज में डूबे किसानों के लिए क्या किया?
'चुनाव से पहले कर चुके पीएम मोदी की वंदना'
अगर उन्होंने किसानों के कर्जे माफ किए होते तो उनकी सरकार के दौरान कर्ज में डूबे किसानों की तादाद इतनी ज्यादा न होती। नौ सूत्रीय कार्यक्त्रस्म के तहत कर्ज माफी का वादा करने वाले अमरिंदर चुनाव से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चरण वंदना कर चुके हैं। भविष्य में भी वह ऐसा नहीं करेंगे, कौन नहीं जानता?
उन्होंने कहा कि महिलाओं को नौकरी और शिक्षण संस्थानों के अलावा आवासीय और व्यवसायिक प्लाटों के आवंटन में 33 फीसदी आरक्षण का वादा करने वाले अमरिंदर को सबसे पहले चुनावों में 33 फीसदी महिलाओं को टिकट देने की परंपरा शुरू करनी चाहिए।
आज तक किसी भी कांग्रेस शासित राज्य में महिलाओं को यह अधिकार नहीं दिए गए हैं। अमरिंदर बताएं कि अपने कार्यकाल में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए क्या किया?
उन्होंने कहा कि यही हालत अमरेंदर के अनुसूचित जाति और बेघरों को घर या पांच मरला प्लाट और एक लाख रुपये देने का वादा कर वोट बटोरने के लक्ष्य की है। अमरिंदर ने अकाली-भाजपा गठबंधन की दलित कल्याणकारी शगुन और आटा दाल स्कीम के अलावा मुफ्त बिजली पर ही तालाबंदी कर डाली थी। गठबंधन ने सत्ता में आते ही इन योजनाओं को दोबारा चालू किया।