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अमर उजाला वेलेंटाइन डे स्पेशल: देश ही है ‘इनकी’ मोहब्बत और महबूबा
Thu, 14 Feb 2019 04:15 AM IST
Priyesh Mishra
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: Priyesh Mishra
Updated Thu, 14 Feb 2019 04:15 AM IST
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वेलेंटाइन डे
- फोटो : अमर उजाला
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‘उनके’ लिए मोहब्बत और उनकी महबूबा सिर्फ मुल्क है। वे दीवानों की तरह अपनी भारत मां से प्यार करते हैं और हर वक्त उस पर मर मिटने को बेताब भी रहते हैं। उनपर मोहब्बत का रंग कुछ इस तरह से चढ़ा हुआ है कि अपनी मातृभूमि के लिए वे मर भी सकते हैं और मार भी सकते हैं।
हम बात कर रहे हैं देश के उन वीर जवानों की, जो दिन-रात अपने देश की सुरक्षा के लिए सीमाओं पर तैनात रहकर ‘इजहार-ए-मोहब्बत’ करते हैं। इन जवानों के लिए वेलेंटाइन डे के मायने भी कुछ और ही हैं। देश के तीन परमवीर चक्र विजेता भी यही मानते हैं, ‘माई कंट्री इज माई वेलेंटाइन।’
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हम बात कर रहे हैं देश के उन वीर जवानों की, जो दिन-रात अपने देश की सुरक्षा के लिए सीमाओं पर तैनात रहकर ‘इजहार-ए-मोहब्बत’ करते हैं। इन जवानों के लिए वेलेंटाइन डे के मायने भी कुछ और ही हैं। देश के तीन परमवीर चक्र विजेता भी यही मानते हैं, ‘माई कंट्री इज माई वेलेंटाइन।’
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मेरे लिए वतन से खूबसूरत कोई महबूब नहीं: सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव
योगेन्द्र सिंह यादव
प्रेमिका से तो बहुत लोग प्रेम करते हैं, लेकिन देश से प्यार करना ही सच्ची मोहब्बत है। मेरा वेलेंटाइन तो मेरा देश ही है। वतन से खूबसूरत कोई महबूब नहीं। इतिहास गवाह है लड़ाई मरकर नहीं, मारकर जीती जाती है। इस बात को मैंने टाइगर हिल में बहुत अच्छे से महसूस किया है। यह देश से प्यार का ही असर था गोलियां लगने के बावजूद मैंने टाइगर हिल पर चढ़कर दुश्मनों से भिड़ा और ग्रेनेड हमले से चार पाकिस्तानी ढेर किए। उसके बाद बाकी पलटन को टाइगर हिल पर चढ़ने का मौका मिला। उसके बाद एक अन्य बंकर पर अपने दो साथियों के साथ हमला किया और आमने-सामने की लड़ाई में चार और पाकिस्तानी ढेर किए। जब टाइगर हिल पर तिरंगा लहराया, उस वक्त आंखों में आंसू थे और दिल में भारत मां के लिए उमड़ रहा बेशुमार प्यार।
संदेश : वेलेंटाइन पर मौज मस्ती में पैसे और वक्त की बर्बादी से अच्छा है, युवा अपने भीतर कुछ ऐसा प्यार जागृत करें। फिर देखें उनके लिए भी वेलेंटाइन के मायने बदल जाएंगे।
- सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव, परमवीर चक्र विजेता (एलओसी फिल्म में मनोज वाजपेयी ने निभाया किरदार।)
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मां की गोद में जब लथपथ पड़ा था, उस प्यार का मजा कुछ और था: सूबेदार संजय कुमार
संजय कुमार
मेरा मकसद और मोहब्बत सिर्फ देश है। त्योहार और परिवार छोड़कर सबसे पहले मेरे लिए मातृभूमि है। यह अहसास तब से है, जब से मैंने फौज ज्वाइन की, लेकिन कारगिल स्थित मॉस्को वैली के फ्लैट टॉप पर इस अहसास को मैंने जीया है। टीम के 11 साथियों में से 8 घायल और 2 शहीद हो गए थे। मेरी राइफल में गोलियां भी खत्म हो गई थीं। तीन गोलियां (दो टांग में, एक पीठ पर) मुझे भी लगी हुईं थीं, लेकिन सामने अपनी मोहब्बत, अपनी मातृभूमि की छाती पर पांव रखकर आगे बढ़ते दुश्मन दिखाई दे रहे थे। खून से लहूलुहान आगे बढ़ा और हाथ में पट्टी बांध बेपरवाह एक बंकर से दुश्मन की राइफल छीन उन्हीं पर गोलियां दाग दी। तीन जवान मारे गए और बाकी भाग गए। मैं घायलावस्था में वहीं मातृभूमि की गोद में गिर गया, उस वक्त भारत मां के साथ मेरी मोहब्बत पूरी तरह परवान चढ़ रही थी, मां के लिए मरने को भी तैयार था। उसके बाद पलटन की रिइन्फोर्समेंट पहुंची और फ्लैट टॉप पर कब्जा किया।
संदेश : मेरा युवाओं से यही कहना है कि देश से प्यार और वफादारी सिर्फ फौज ही नहीं, बल्कि हर फील्ड में रहकर की जा सकती है। आज शिक्षकों से अपील है कि वफादारी और देशप्रेम के संस्कार बच्चों में जरूर डालें।
- सूबेदार संजय कुमार, परमवीर चक्र विजेता (एलओसी फिल्म में सुनील शेट्टी ने निभाया किरदार)
संदेश : मेरा युवाओं से यही कहना है कि देश से प्यार और वफादारी सिर्फ फौज ही नहीं, बल्कि हर फील्ड में रहकर की जा सकती है। आज शिक्षकों से अपील है कि वफादारी और देशप्रेम के संस्कार बच्चों में जरूर डालें।
- सूबेदार संजय कुमार, परमवीर चक्र विजेता (एलओसी फिल्म में सुनील शेट्टी ने निभाया किरदार)
वो मोहब्बत ही थी, जो वतन पर मर मिटने को तैयार कर गई: कैप्टन बाना सिंह
बाना सिंह
मुझे नहीं मालूम उस वक्त कौन सा प्यार उमड़ा, जब मेरे अफसरों ने कहा कि सियाचिन ग्लेशियर को पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त करना है। और वहां बनी पाक की ‘कायद चौकी’ को हटाकर अपनी बनानी है। मैंने तुरंत आगे बढ़कर ये टास्क मांगी और अपने चार साथियों के साथ जिंदगी जमा देने वाली बर्फीली चोटियों की ओर बढ़ा। पाक ने यह चौकी एक दुर्ग की तरह बनाई थी, दोनों ओर 1500 फीट ऊंची बर्फ की दीवारें थीं। वहां स्पेशल सर्विस ग्रुप के कमांडो तैनात थे। वहां तक पहुंचना मुश्किल था लेकिन हम बढ़ते गए, रास्ते में अपने बहादुर सैनिक भाइयों के शव भी मिले, जिन्होंने वहां तक पहुंचने की कोशिश में जान गंवाई थी। अंधेरे का फायदा उठाकर दो हिस्से में टीम बमुश्किल चौकी तक पहुंची, तो मैंने लगातार चौकी पर ग्रेनेड फेंकने शुरू कर दिए। दुश्मन हड़बड़ा गया, उसके बाद चौकी पर हमला कर बैनेट से दुश्मन सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। इस तरह चौकी पर भारत का कब्जा हुआ। इस पोस्ट का नाम आज ‘बाना पोस्ट’ है। ऐसा सिर्फ और सिर्फ अपने देश से प्यार की बदौलत संभव हुआ।
संदेश : युवा देश के भविष्य हैं। बड़ी कसक है कि आज का यूथ अपने शहीदों को नहीं जानता, अपनी मातृभूमि से मोहब्बत नहीं करता। एक बार अपने वतन से मोहब्बत करके देखो सबकुछ भूल जाओगे।
- कैप्टन बाना सिंह, परमवीर चक्र विजेता
संदेश : युवा देश के भविष्य हैं। बड़ी कसक है कि आज का यूथ अपने शहीदों को नहीं जानता, अपनी मातृभूमि से मोहब्बत नहीं करता। एक बार अपने वतन से मोहब्बत करके देखो सबकुछ भूल जाओगे।
- कैप्टन बाना सिंह, परमवीर चक्र विजेता