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अमर उजाला संवाद में बोले लोग- नगर निगम के दायरे में आने के बाद भी नहीं बदले गांवों के हालात
Sat, 10 Aug 2019 10:24 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 10 Aug 2019 10:24 AM IST
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अमर उजाला संवाद
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ में कुछ भी बदल जाए, मगर उन गांवों की तस्वीर नहीं बदलने वाली, जिसकी नींव पर यह शहर खड़ा है। नगर निगम में शामिल होने के बाद गांवों के लिए एक उम्मीद जगी थी। ऐसा लगा था कि चंडीगढ़ के गांव भी आदर्श बनेंगे। सबने बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन जमीनी हालात में एक भी बदलाव देखने को नहीं मिला।
इस बात से लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं कि पहले तो समस्या होने पर वे पंच या सरपंच को बता देते थे और उसका हल भी निकल आता था, लेकिन अब किसे बताएं? नगर निगम जाते हैं तो कोई इधर जाने को कहता तो कोई उधर। लोगों की मांग है कि जिस तरह से सेक्टर को हर सुविधा मिल रही है, ठीक उसी तरह गांव के लोगों को भी सुनवाई हो।
जब तक चुनाव नहीं होते, तब तक गांव की समस्या सुनने के लिए किसी कमेटी का गठन हो या फिर अधिकारी की नियुक्ति हो। शुक्रवार को अमर उजाला में आयोजित संवाद में कई गांवों के प्रतिनिधि व उनके निवासी शामिल हुए। उन्होंने खुलकर अपनी समस्या बताई और अमर उजाला के माध्यम से प्रशासन से समस्याओं का जल्द से जल्द से निवारण की अपील की।
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इस बात से लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं कि पहले तो समस्या होने पर वे पंच या सरपंच को बता देते थे और उसका हल भी निकल आता था, लेकिन अब किसे बताएं? नगर निगम जाते हैं तो कोई इधर जाने को कहता तो कोई उधर। लोगों की मांग है कि जिस तरह से सेक्टर को हर सुविधा मिल रही है, ठीक उसी तरह गांव के लोगों को भी सुनवाई हो।
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जब तक चुनाव नहीं होते, तब तक गांव की समस्या सुनने के लिए किसी कमेटी का गठन हो या फिर अधिकारी की नियुक्ति हो। शुक्रवार को अमर उजाला में आयोजित संवाद में कई गांवों के प्रतिनिधि व उनके निवासी शामिल हुए। उन्होंने खुलकर अपनी समस्या बताई और अमर उजाला के माध्यम से प्रशासन से समस्याओं का जल्द से जल्द से निवारण की अपील की।
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गांव में गंभीर बनती जा रही पार्किंग समस्या
पंचायत समिति के पूर्व चेयरमैन शिंगारा सिंह ने कहा कि दड़वा में पार्किंग समस्या गंभीर बनती जा रही। गलियां छोटी हैं। आए दिन जाम लगता है। गांव में एक भी पार्क नहीं है, जबकि आसपास काफी जगह पड़ी है। गांव में 55 होटल, एक सौ गोदाम और चार सौ से भी अधिक ट्रकों का आना-जाना लगा रहता है। गांव के कॉमर्शियलाइजेशन की वजह से लोगों को परेशानी आ रही है। पहले तो बस भी आती थी, लेकिन अब नहीं आती।
मक्खनमाजरा की सड़क अब तक नहीं बनीं
दड़वा के पूर्व सरपंच गुरप्रीत सिंह हैप्पी ने कहा कि दड़वा से मक्खनमाजरा जाने वाली सड़क का अब तक कुछ नहीं बना। कई बार यह मुद्दा उठा, लेकिन बात नहीं बनी। गांव दड़वा में पानी का संकट है। जब तक नहरी पानी से सप्लाई नहीं होगी, तब तक पानी की आपूर्ति ठीक नहीं हो पाएगी। गांव के सामने रेलवे की जमीन है। उस पर साफ सफाई की बड़ी दिक्कत होती है। गंदगी का अंबार लगा रहता है।
गांव के युवाओं को भी रोजगार दो
बहलाना के पूर्व सरपंच मोहिंदर सिंह ने कहा कि गांव को नगर निगम में शामिल होने के बावजूद ग्रामीणों को कोई फायदा नहीं मिल रहा। नगर निगम ने 90 गाड़ियां खरीदी हैं। इनमें गांव के युवाओं को रखा जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यहां पर पंजाब व हरियाणा वाले रोजगार ले जाते हैं, लेकिन यूटी के युवाओं को रोजगार नहीं मिलता। स्कूल की हालत भी दयनीय है। क्षमता से ज्यादा विद्यार्थी ठूंस-ठूंसकर भरे हैं।
मक्खनमाजरा की सड़क अब तक नहीं बनीं
दड़वा के पूर्व सरपंच गुरप्रीत सिंह हैप्पी ने कहा कि दड़वा से मक्खनमाजरा जाने वाली सड़क का अब तक कुछ नहीं बना। कई बार यह मुद्दा उठा, लेकिन बात नहीं बनी। गांव दड़वा में पानी का संकट है। जब तक नहरी पानी से सप्लाई नहीं होगी, तब तक पानी की आपूर्ति ठीक नहीं हो पाएगी। गांव के सामने रेलवे की जमीन है। उस पर साफ सफाई की बड़ी दिक्कत होती है। गंदगी का अंबार लगा रहता है।
गांव के युवाओं को भी रोजगार दो
बहलाना के पूर्व सरपंच मोहिंदर सिंह ने कहा कि गांव को नगर निगम में शामिल होने के बावजूद ग्रामीणों को कोई फायदा नहीं मिल रहा। नगर निगम ने 90 गाड़ियां खरीदी हैं। इनमें गांव के युवाओं को रखा जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यहां पर पंजाब व हरियाणा वाले रोजगार ले जाते हैं, लेकिन यूटी के युवाओं को रोजगार नहीं मिलता। स्कूल की हालत भी दयनीय है। क्षमता से ज्यादा विद्यार्थी ठूंस-ठूंसकर भरे हैं।
एडवाइजरी काउंसिल में गांव का प्रतिनिधि नहीं
मार्केट कमेटी के पूर्व डायरेक्टर जीत सिंह ने कहा कि गांवों में ट्रैफिक इतना ज्यादा है कि इमरजेंसी पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का गांव में जाना मुश्किल हो सकता है। इस पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। रोड गली की तीन महीने से सफाई नहीं हुई है। हमारा कोई प्रतिनिधि ही नहीं है। प्रशासन की ओर से जो एडवाइजरी काउंसिल बनाई गई है, उसमें गांव के लोगों को शामिल नहीं किया गया है। कोई अधिकारी नियुक्त करो या कमेटी बनाओे, जिस पर लोग शिकायत कर सकें।
12 साल से सड़कों पर काम नहीं हुआ
दड़वा निवासी डा. नरेश पांचाल ने बताया कि 12 वर्षों से सड़क का काम नहीं हुआ है। गांव को नगर निगम में शामिल तो कर लिया गया, लेकिन अब तक निगम और प्रशासन के बीच तालमेल नहीं बन पाया। गांव के लोग अपनी समस्या किस संबंधित अधिकारी को बताएं इसका किसी को पता नहीं है। पहले सरपंच को बोलते थे तो काम हो जाता था, लेकिन अब कोई पूछने वाला नहीं है। लाल डोरा से बाहर बने मकानों की समस्या वहीं पर खड़ी है।
पशुओं से पूरा गांव परेशान
रायपुरकलां के राजविंदर सिंह ने बताया कि लावारिस पशु से गांव के लोग परेशान हैं। ग्रामीणों ने अपने पैसे के खर्चें पर सड़क के किनारे पेड़ लगाए हैं। लावारिस पशुओं की वजह से वे ज्यादा दिन तक ठहर नहीं पाते। शिकायत करते हैं तो नगर निगम वाले बाद में आते हैं, पशुओं के मालिकों को पहले सूचना मिल जाती है। स्टार्म वाटर की लाइन समतल नहीं होने की वजह से पानी पाइप में ही रहता है। इससे कई घरों की नींव पर खतरा मंडराने लगा है। बिजली की काफी परेशानी होती है। बिजली जाने के बाद कब आएगी इसका पता नहीं रहता। गलियां टूटी हुई हैं। स्कूल टाइम पर बसों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि बच्चों को स्कूल से आने जाने में परेशानी नहीं हो।
12 साल से सड़कों पर काम नहीं हुआ
दड़वा निवासी डा. नरेश पांचाल ने बताया कि 12 वर्षों से सड़क का काम नहीं हुआ है। गांव को नगर निगम में शामिल तो कर लिया गया, लेकिन अब तक निगम और प्रशासन के बीच तालमेल नहीं बन पाया। गांव के लोग अपनी समस्या किस संबंधित अधिकारी को बताएं इसका किसी को पता नहीं है। पहले सरपंच को बोलते थे तो काम हो जाता था, लेकिन अब कोई पूछने वाला नहीं है। लाल डोरा से बाहर बने मकानों की समस्या वहीं पर खड़ी है।
पशुओं से पूरा गांव परेशान
रायपुरकलां के राजविंदर सिंह ने बताया कि लावारिस पशु से गांव के लोग परेशान हैं। ग्रामीणों ने अपने पैसे के खर्चें पर सड़क के किनारे पेड़ लगाए हैं। लावारिस पशुओं की वजह से वे ज्यादा दिन तक ठहर नहीं पाते। शिकायत करते हैं तो नगर निगम वाले बाद में आते हैं, पशुओं के मालिकों को पहले सूचना मिल जाती है। स्टार्म वाटर की लाइन समतल नहीं होने की वजह से पानी पाइप में ही रहता है। इससे कई घरों की नींव पर खतरा मंडराने लगा है। बिजली की काफी परेशानी होती है। बिजली जाने के बाद कब आएगी इसका पता नहीं रहता। गलियां टूटी हुई हैं। स्कूल टाइम पर बसों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि बच्चों को स्कूल से आने जाने में परेशानी नहीं हो।
लोग सड़क पर सैर करने के लिए मजबूर
रायपुरकलां के पूर्व सरपंच गुरदीप सिंह ने बताया कि गांव में पार्क नहीं है। सड़क पर ही लोग सैर के लिए मजबूर हैं। गांव की जमीन पर लोग मलबा गिरा जाते हैं। गांव के अंदर भी इतना ज्यादा निर्माण हो गया है कि अब गांव की गलियों में गाड़ियां लेकर नहीं जा सकते। इस वजह से गाड़ियां सड़क पर खड़ी रहती हैं। फिरनी की सड़क अब तक नहीं बनी है। गांव में डिस्पेंसरी भी नहीं है। इसके कारण लोगों को काफी परेशानी होती है। स्टार्म वाटर की लाइन में चूहों ने अपना घर बना लिया है। इसके कारण और परेशानी बढ़ गई है।
बस के लिए डेढ़ किमी पैदल जाना पड़ता है
गुरुद्वारा साहिब के प्रधान सुखविंदर सिंह ने बताया कि गांव मक्खनमाजरा में अब तक बस नहीं आई। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे खूब लगते हैं, लेकिन गांव की बेटियों को पढ़ने के लिए स्कूल जाने के लिए डेढ़ से दो किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। गांव में न खेल के मैदान है और न ही डिस्पेंसरी है। बिजली की तारें लटकती हैं। ट्रैक्टर निकालने के लिए ये लटकती तारें परेशानी पैदा करती हैं। गांव में कोई कार्यक्रम नहीं कर सकते। कम्युनिटी सेंटर व धर्मशाला नाम की कोई चीज नहीं है।
बस के लिए डेढ़ किमी पैदल जाना पड़ता है
गुरुद्वारा साहिब के प्रधान सुखविंदर सिंह ने बताया कि गांव मक्खनमाजरा में अब तक बस नहीं आई। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे खूब लगते हैं, लेकिन गांव की बेटियों को पढ़ने के लिए स्कूल जाने के लिए डेढ़ से दो किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। गांव में न खेल के मैदान है और न ही डिस्पेंसरी है। बिजली की तारें लटकती हैं। ट्रैक्टर निकालने के लिए ये लटकती तारें परेशानी पैदा करती हैं। गांव में कोई कार्यक्रम नहीं कर सकते। कम्युनिटी सेंटर व धर्मशाला नाम की कोई चीज नहीं है।
लोगों ने दिए ये सुझाव
- गांवों के विकास की नियमित रूप से विकास की मॉनीटरिंग हो।
- गांवों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए एक विशेष मैकेनिज्म तैयार हो।
- ट्रैफिक, अतिक्रमण, साफ-सफाई और पानी की कमी समस्या गंभीर हो गई हैं।
- गांवों तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं पहुंचता। इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- गांवों तक जाने वाली सड़कों को गढ्ढा मुक्त बनाया जाए।
- गांव के आसपास काफी जमीन है, उस पर पार्क बनाए जाएं।
- गांवों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए एक विशेष मैकेनिज्म तैयार हो।
- ट्रैफिक, अतिक्रमण, साफ-सफाई और पानी की कमी समस्या गंभीर हो गई हैं।
- गांवों तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं पहुंचता। इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- गांवों तक जाने वाली सड़कों को गढ्ढा मुक्त बनाया जाए।
- गांव के आसपास काफी जमीन है, उस पर पार्क बनाए जाएं।